राजस्थान के हनुमानगढ़ जिले में इथेनॉल फैक्ट्री को लेकर चल रहा विवाद अब गहराते हुए तनावपूर्ण स्थिति में बदल चुका है। टिब्बी क्षेत्र के राठीखेड़ा गांव के चक्र 5 आर में प्रस्तावित फैक्ट्री के खिलाफ ग्रामीण पिछले सवा साल से विरोध प्रदर्शन कर रहे थे। लेकिन 18 नवंबर की सुबह पुलिस कार्रवाई के बाद मामला अचानक भड़क गया। प्रशासन द्वारा धरनास्थल पर लगे टैंट और टीन शेड हटाने की कार्रवाई ने ग्रामीणों में भारी आक्रोश पैदा कर दिया। इसके बाद पूरे इलाके का माहौल तनावपूर्ण हो गया, जिसके चलते एहतियातन इंटरनेट सेवाएं बंद कर दी गईं और सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए भारी पुलिस बल तैनात किया गया है।
ग्रामीणों का आरोप है कि वे शांतिपूर्ण विरोध कर रहे थे और उनका उद्देश्य सिर्फ अपनी जमीन, जल–जंगल–पर्यावरण की सुरक्षा करना था। लेकिन अचानक सुबह करीब 4 बजे पुलिस की टीम मौके पर पहुंची और धरने पर बने ढांचे हटाने शुरू कर दिए। ग्रामीणों ने इसे उनके लोकतांत्रिक अधिकारों को दबाने की कोशिश बताया और कहा कि पिछले सवा साल से वे शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे थे, जिसे प्रशासन ने किसी भी स्तर पर आपराधिक या असामाजिक नहीं माना था। ऐसे में बिना पूर्व सूचना जारी कार्रवाई से लोगों में गहरी नाराजगी फैल गई।
घटना के बाद पुलिस और ग्रामीणों के बीच स्थिति और बिगड़ गई। कई जगहों पर हल्की झड़प जैसी स्थितियां भी सामने आईं। विरोध कर रहे ग्रामीणों का कहना है कि प्रशासन फैक्ट्री को किसी भी कीमत पर शुरू करवाना चाहता है, जबकि गांव वाले इसके निर्माण के सख्त खिलाफ हैं। ग्रामीणों का मानना है कि फैक्ट्री शुरू होने से उनके पर्यावरण और जमीन पर गंभीर खतरा पैदा होगा। उनका कहना है कि इथेनॉल फैक्ट्री से होने वाले संभावित प्रदूषण और रासायनिक प्रभाव से आसपास की खेती, भूजल और जनजीवन प्रभावित होगा। इसलिए वे चाहते हैं कि सरकार इस परियोजना को तत्काल स्थगित करे।
दूसरी ओर, प्रशासन का कहना है कि कानून एवं व्यवस्था बनाए रखना उनकी जिम्मेदारी है और धरनास्थल पर बने ढांचे हटाना आवश्यक था। हालांकि पुलिस और प्रशासन ने किसी भी प्रकार की हिंसा से इनकार किया है, लेकिन स्थानीय लोगों का दावा है कि पुलिस की कार्रवाई बिना किसी बातचीत और परामर्श के की गई, जिससे उनके भावनात्मक और सामाजिक अधिकारों को चोट पहुंची है।
तनाव बढ़ने के बाद हनुमानगढ़ जिला प्रशासन ने तुरंत इंटरनेट सेवाएं बंद करने का निर्णय लिया। इसके पीछे कारण यह बताया गया कि सोशल मीडिया पर फैलने वाली अफवाहों और भ्रामक सूचनाओं से माहौल और बिगड़ सकता था। इसके अलावा टिब्बी और आस-पास के ग्रामीण इलाकों में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात कर दिया गया है ताकि स्थिति नियंत्रण में रहे और कोई अप्रिय घटना न हो।
विवादित इथेनॉल फैक्ट्री की स्थापना को लेकर गांव में दो ध्रुव साफ दिखाई दे रहे हैं—एक ओर सरकार और प्रशासन है जो इसे विकास परियोजना बताते हैं, वहीं दूसरी ओर ग्रामीण हैं जो इसे अपने अस्तित्व और पर्यावरण के लिए खतरा मानते हैं। पिछले सवा साल से ग्रामीण कई बार ज्ञापन, प्रदर्शन और बैठकों के जरिए अपनी चिंता जता चुके हैं। वे आरोप लगाते हैं कि उनकी आवाज सुनने के बजाय प्रशासन परियोजना को आगे बढ़ाने के प्रयास में लगा हुआ है।
फिलहाल स्थिति संवेदनशील बनी हुई है। पुलिस-प्रशासन लगातार हालात पर नजर बनाए हुए है, जबकि ग्रामीणों ने साफ कहा है कि वे किसी भी कीमत पर जमीन और पर्यावरण से जुड़ी अपनी लड़ाई नहीं छोड़ेंगे। आने वाले दिनों में यह मामला किस दिशा में जाएगा, इस पर सभी की निगाहें टिकी हुई हैं। पर इतना तय है कि यह विवाद राजस्थान के ग्रामीण इलाकों में विकास और पर्यावरण संतुलन को लेकर उठ रहे सवालों को एक बार फिर सामने ला रहा है।








