बिहार के लखीसराय जिले में स्थित किऊल जंक्शन पर मंगलवार सुबह एक बड़ी दुर्घटना सामने आई, जब रेलवे डाक सेवा (RMS) ऑफिस में अचानक भीषण आग लग गई। घटना इतनी गंभीर थी कि कुछ ही मिनटों में पूरा कार्यालय धू-धू कर जलने लगा और वहां रखे लाखों रुपये के सामान के साथ कई महत्वपूर्ण दस्तावेज भी राख में तब्दील हो गए। आगजनी की इस घटना ने पूरे रेलवे स्टेशन क्षेत्र और आसपास के इलाकों में अफरा-तफरी मचा दी। सुबह के समय जब स्टेशन सामान्य गतिविधियों के साथ चल रहा था, तभी अचानक उठती आग की लपटों ने सबका ध्यान खींचा और देखते ही देखते हालात नियंत्रण से बाहर होते गए।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, आग इतनी भयावह थी कि उसकी लपटें दूर से साफ दिखाई दे रही थीं। RMS ऑफिस के भीतर मौजूद लकड़ी के रैक, डाक पार्सल, पुरानी फाइलें और अन्य सामग्री आग पकड़ते ही तेजी से जलने लगी। कार्यालय के अंदर मौजूद कई महत्वपूर्ण सरकारी दस्तावेज, पार्सल रिकॉर्ड और डाक सामग्री भी जलकर नष्ट हो गई। प्रारंभिक अनुमान के अनुसार इस दुर्घटना में लाखों रुपये का नुकसान हुआ है, हालांकि रेलवे प्रशासन ने अभी आधिकारिक रूप से नुकसान के आंकड़े साझा नहीं किए हैं।
आग लगते ही स्टेशन पर तैनात रेलकर्मी, अधिकारी और सुरक्षा कर्मी मौके पर पहुंच गए। शुरुआती प्रयासों में ही आग की भयावहता ने स्थिति को और चुनौतीपूर्ण बना दिया। सीमित संसाधनों और प्रारंभिक उपकरणों से आग पर काबू पाना बेहद कठिन साबित हुआ। रेलकर्मियों ने पानी की पाइपलाइन, अग्निशामक यंत्र और अन्य उपलब्ध साधनों का उपयोग करते हुए आग बुझाने की भरसक कोशिश की, लेकिन आग इतनी तेजी से फैल चुकी थी कि उस पर तुरंत नियंत्रण नहीं पाया जा सका। कई रेलकर्मियों ने बताया कि धुआं और गर्मी इतनी अधिक थी कि अंदर पहुंचना लगभग असंभव हो गया था।
घटना की सूचना फौरन अग्निशमन विभाग को दी गई, जिसके बाद फायर ब्रिगेड की टीम मौके पर पहुंची। दमकलकर्मियों ने कई घंटों की कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया। आग पूरी तरह बुझने के बाद जब कार्यालय के अंदर निरीक्षण किया गया, तो वहां जले हुए फर्नीचर, राख में बदल चुके पार्सल और बर्बाद दस्तावेजों के अलावा कुछ भी नहीं बचा था। इस घटना के बाद रेलवे प्रशासन ने तुरंत सभी रिकॉर्ड का बैकअप सत्यापित करने, क्षति का सर्वेक्षण कराने और सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा करने का आदेश दिया है।
आग लगने के कारणों को लेकर अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है, लेकिन प्रारंभिक अनुमान यह है कि शॉर्ट सर्किट की वजह से आग लगी हो सकती है। हालांकि, इस संभावना की पुष्टि के लिए रेलवे की तकनीकी टीम जांच कर रही है। RMS ऑफिस में विद्युत उपकरण, कंप्यूटर सिस्टम और पार्सल पैकिंग यूनिट मौजूद रहती है, ऐसे में शॉर्ट सर्किट की आशंका से इंकार नहीं किया जा सकता। रेलवे सूत्रों का कहना है कि कार्यालय में रखे पुराने विद्युत कनेक्शन और भीड़भाड़ वाली वायरिंग व्यवस्था भी इस घटना के पीछे जिम्मेदार हो सकती है।
इस हादसे के बाद स्टेशन पर कामकाज कुछ समय के लिए बाधित रहा, हालांकि रेल यातायात पूरी तरह प्रभावित नहीं हुआ। RMS कार्यालय रेल डाक सेवा का महत्वपूर्ण केंद्र होता है, जहां प्रतिदिन भारी मात्रा में डाक सामग्री की छंटाई और प्रेषण का कार्य होता है। ऐसे में आग लगने से डाक सेवाओं पर भी बड़ा असर पड़ सकता है। लखीसराय और आसपास के क्षेत्रों में भेजी जाने वाली कई डाक सामग्री जलकर नष्ट हो जाने की संभावना है, जिसकी पुष्टि जांच के बाद ही हो पाएगी।
रेलवे प्रशासन ने आगजनी की इस घटना को गंभीरता से लेते हुए विस्तृत जांच के आदेश दिए हैं। अधिकारियों ने बताया कि नुकसान की भरपाई, दस्तावेजों की पुनर्प्राप्ति और क्षतिग्रस्त इन्फ्रास्ट्रक्चर के पुनर्निर्माण का काम जल्द शुरू किया जाएगा। साथ ही सुरक्षा प्रोटोकॉल को मजबूत करने और RMS ऑफिस में आधुनिक अग्नि सुरक्षा सिस्टम लगाने की योजना भी बनाई जा रही है, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।
किऊल जंक्शन पर लगी इस भीषण आग ने एक बार फिर सवाल खड़े कर दिए हैं कि महत्वपूर्ण सरकारी कार्यालयों में सुरक्षा प्रबंधन कितना मजबूत है और किन खामियों की वजह से ऐसी घटनाएं बार-बार सामने आ रही हैं। स्थानीय लोगों और यात्रियों का कहना है कि स्टेशन पर आग बुझाने के पर्याप्त संसाधन उपलब्ध नहीं थे, जिसके चलते नुकसान और अधिक बढ़ गया। फिलहाल जांच जारी है और पूरा मामला सामने आने के बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि आग का असली कारण क्या था और इस हादसे के लिए कौन जिम्मेदार है।








