नाशिक जिला प्रशासन बाल विवाह जैसे गंभीर सामाजिक अपराध को रोकने के लिए अब पूरी तरह अलर्ट मोड पर आ गया है। जिला कलेक्टर की ओर से पूरे जिले में उन इलाकों को चिन्हित कर सख्त कार्रवाई करने के निर्देश जारी किए गए हैं, जहां बाल विवाह की घटनाएं बार-बार सामने आती रही हैं। प्रशासन ने इन क्षेत्रों को ‘चाइल्ड मैरिज हॉटस्पॉट्स’ घोषित करते हुए पुलिस, चाइल्ड वेलफेयर कमेटी, महिला एवं बाल विकास विभाग और ग्रामस्तर के अधिकारियों को संयुक्त अभियान तेज करने का आदेश दिया है।
कलेक्टर ने सभी तहसीलदारों, बीडीओ अधिकारियों और थानों को निर्देशित किया है कि वे इन हॉटस्पॉट क्षेत्रों में सूचीबद्ध परिवारों और समुदायों पर कड़ी नजर रखें, जहां आर्थिक, सामाजिक या पारंपरिक कारणों से नाबालिग लड़कियों की शादी कराई जाने की घटनाएं अधिक होती हैं। जिला प्रशासन का मानना है कि बाल विवाह न सिर्फ कानून के खिलाफ है, बल्कि समाज की प्रगति में बड़ी बाधा भी है, इसलिए इस पर तत्काल रोक लगाने की आवश्यकता है।
निर्देशों के अनुसार, सभी सरकारी विभागों की संयुक्त टीमों को संभावित विवाह स्थलों, गेस्ट हाउस, सामुदायिक भवनों और ग्रामीण क्षेत्रों में अचानक निरीक्षण करने को कहा गया है। कलेक्टर ने प्रशासन को यह भी आदेश दिया है कि suspicious गतिविधियों की सूचना मिलते ही तुरंत मौके पर पहुंचकर विवाह रोकने और संबंधित लोगों पर कानूनी कार्रवाई शुरू की जाए। बाल विवाह निषेध अधिनियम के तहत दोषियों पर कड़ी सज़ा और जुर्माने का प्रावधान है, जिसे जिले भर में सख्ती से लागू करने पर जोर दिया गया है।
कलेक्टर ने यह भी स्पष्ट किया है कि बाल विवाह रोकने में ग्राम पंचायतों, आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं, आशा स्वयंसेविकाओं और स्कूल शिक्षकों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है। उन्हें ऐसे मामलों की तुरंत रिपोर्ट करने के निर्देश दिए गए हैं। इसके साथ ही जिलाधिकारी ने स्कूलों से कहा है कि वे उन छात्रों की निगरानी रखें जो लंबे समय से अनुपस्थित हैं, क्योंकि कई बार ऐसी अनुपस्थिति बाल विवाह के संकेत हो सकते हैं।
जिला प्रशासन ने इसकी रोकथाम के लिए जागरूकता अभियान भी शुरू किया है। ग्रामीण इलाकों में जनजागरण कार्यक्रम, किशोरियों के लिए सुरक्षा एवं अधिकारों पर सत्र और माता-पिता को बाल विवाह के दुष्परिणाम बताने के लिए विशेष बैठकों का आयोजन किया जाएगा। अधिकारी यह सुनिश्चित करेंगे कि प्रत्येक पंचायत में इस विषय पर नियमित चर्चा हो और बाल विवाह के खिलाफ स्थानीय स्तर पर भी प्रण लिए जाएं।
बाल संरक्षण विभाग की रिपोर्ट के अनुसार, नाशिक जिले में कुछ आदिवासी और ग्रामीण इलाकों में बाल विवाह के प्रयासों की शिकायतें मिली हैं, जिन्हें समय रहते रोका गया। यही कारण है कि प्रशासन अब इन क्षेत्रों को लेकर और अधिक सतर्क हो गया है। कलेक्टर ने कहा कि यदि किसी भी अधिकारी की लापरवाही पाई गई, तो उसके खिलाफ विभागीय कार्रवाई तय है।
इसके साथ ही, प्रशासन ने हेल्पलाइन नंबर भी सक्रिय कर दिए हैं ताकि आम नागरिक किसी भी संदिग्ध बाल विवाह की जानकारी तुरंत दे सकें। पुलिस और चाइल्डलाइन टीमें 24 घंटे अलर्ट रहेंगी, ताकि कोई भी घटना समय रहते रोकी जा सके।
नाशिक जिला प्रशासन का यह कदम एक बड़े सामाजिक सुधार की दिशा में उठाया गया महत्वपूर्ण प्रयास माना जा रहा है। जहां बाल विवाह अभी भी कई परिवारों में पारंपरिक सोच के कारण होता है, वहीं अब प्रशासनिक सख्ती से ऐसे प्रयासों पर निर्णायक रोक लगने की उम्मीद है। कलेक्टर की इस पहल को सामाजिक संगठनों और बाल अधिकार कार्यकर्ताओं ने सराहनीय कदम बताया है।
नाशिक में बाल विवाह को रोकने की यह मुहिम न सिर्फ कानून लागू करने का मामला है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों को बेहतर, सुरक्षित और शिक्षित माहौल देने की दिशा में उठाया गया महत्वपूर्ण कदम है। प्रशासन को विश्वास है कि सामुदायिक सहयोग और कड़ी निगरानी के जरिए जिले को बाल विवाह मुक्त बनाने का लक्ष्य जल्द ही हासिल किया जा सकेगा।








