दिल्ली के लाल किला धमाके के बाद देशभर की सुरक्षा एजेंसियां सतर्क हो गई हैं। जांच के दायरे में अब फरीदाबाद की अल-फलाह यूनिवर्सिटी भी आ गई है। जांच एजेंसियों का संदेह है कि आतंकी गतिविधियों में शामिल संभावित हैंडलर यहीं मौजूद हो सकता है। फिदायीन हमलावर उमर नबी को इस यूनिवर्सिटी में विशेष ट्रेनिंग और मदद मिलती थी। इस वजह से अब यूनिवर्सिटी के 200 से ज्यादा डॉक्टर और स्टाफ रडार पर आ गए हैं।
10 नवंबर को लाल किला के पास हुए कार बम धमाके ने न केवल दिल्ली बल्कि आसपास के क्षेत्रों की सुरक्षा व्यवस्था को चौकस कर दिया है। एनआईए और अन्य जांच एजेंसियां इस घटना की तह तक जाने के लिए पूरी तरह जुटी हुई हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, उमर नबी की यूनिवर्सिटी में प्रोफेसर के रूप में नियुक्ति और वहां का रहन-सहन जांच का मुख्य केंद्र बन गया है। अधिकारियों का मानना है कि धमाके से जुड़े किसी भी संभावित नेटवर्क को समझने के लिए यूनिवर्सिटी की हर गतिविधि पर नजर रखी जा रही है।
अल-फलाह यूनिवर्सिटी में स्टूडेंट और स्टाफ में हड़कंप का माहौल है। यूनिवर्सिटी के कई कर्मचारी बुधवार को अपने घरों की ओर जाते देखे गए। सूत्रों के अनुसार, ये कर्मचारी अपने परिवार के साथ रहने और सुरक्षा कारणों से अचानक छुट्टियों पर चले गए हैं। यूनिवर्सिटी में मौजूद सुरक्षा और प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि जांच टीम लगातार यूनिवर्सिटी के परिसर में छानबीन कर रही है और किसी भी संदिग्ध गतिविधि पर पैनी नजर रखी जा रही है।
जांच एजेंसियों का कहना है कि धमाके में शामिल फिदायीन हमलावर उमर नबी के नेटवर्क का पता लगाने के लिए सभी संभावनाओं पर ध्यान दिया जा रहा है। उन्होंने बताया कि यूनिवर्सिटी के कुछ स्टाफ और डॉक्टरों की गतिविधियां संदिग्ध मानी जा रही हैं और उनकी पृष्ठभूमि की जांच की जा रही है। यह सुनिश्चित करने के लिए कि भविष्य में कोई आतंकी गतिविधि न हो, सुरक्षा एजेंसियां अत्यधिक सतर्क हैं।
एनआईए के एक अधिकारी ने बताया कि उमर नबी और उसके सहयोगियों द्वारा यूनिवर्सिटी में संभावित प्रशिक्षण और गतिविधियों के पैटर्न को समझना जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा है। अधिकारी के अनुसार, यूनिवर्सिटी में मौजूद स्टाफ और डॉक्टरों की पहचान, उनके रोजमर्रा के कामकाज और किसी भी तरह की संदिग्ध बातचीत पर नजर रखी जा रही है।
वहीं यूनिवर्सिटी प्रशासन ने अपने बयान में कहा कि वे जांच में पूरी तरह सहयोग कर रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि स्टाफ द्वारा छुट्टी लेने का निर्णय व्यक्तिगत सुरक्षा और मानसिक स्थिति के कारण लिया गया है। यूनिवर्सिटी की स्थिति फिलहाल तनावपूर्ण है और छात्रों और कर्मचारियों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है।
विशेषज्ञों का कहना है कि लाल किला धमाके के बाद जांच का यह विस्तार सुरक्षा एजेंसियों की सतर्कता और आतंकवाद विरोधी रणनीति को दिखाता है। ऐसे मामलों में संदिग्ध नेटवर्क को भांपने और किसी भी संभावित खतरे को रोकने के लिए तेजी से कार्रवाई जरूरी है। इसके साथ ही यूनिवर्सिटी में कर्मचारियों और छात्रों की सुरक्षा को ध्यान में रखना भी अहम है।
इस पूरी घटना ने स्पष्ट कर दिया है कि आतंकी घटनाओं के बाद सुरक्षा एजेंसियों की सक्रियता और तत्परता ही देश की सुरक्षा की नींव है। जांच अभी जारी है और अधिकारी किसी भी नई जानकारी के आधार पर कार्रवाई करने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। यूनिवर्सिटी स्टाफ और डॉक्टरों की भूमिका और गतिविधियों की पूरी जांच होने तक सतर्कता और सुरक्षा उपाय जारी रहेंगे।








