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दुनिया की आर्थिक ताकत और विकास के लिहाज से टॉप अमीर शहरों की सूची हमेशा चर्चा का विषय रही है। हाल ही में जारी हुई रिपोर्ट में यह सामने आया है कि जीडीपी के हिसाब से दुनिया के टॉप 20 शहरों में भारत का कोई शहर शामिल नहीं है। इस सूची में अमेरिका के 11 शहरों को शामिल किया गया है, जबकि चीन और जापान के दो-दो शहरों को स्थान मिला है। ब्रिटेन, फ्रांस, ब्राजील, दक्षिण कोरिया और जर्मनी के एक-एक शहरों को भी टॉप 20 में जगह दी गई है। लेकिन भारत के लिए इस सूची में कोई प्रतिनिधित्व नहीं है, जिससे यह बात स्पष्ट हो जाती है कि वैश्विक आर्थिक प्रतिस्पर्धा में भारत के शहर अभी शीर्ष पर नहीं पहुँच पाए हैं।
FRED Economic Data के आंकड़ों के अनुसार, अमेरिका के न्यूयॉर्क शहर ने 2.3 ट्रिलियन डॉलर की जीडीपी के साथ सबसे ऊपर का स्थान प्राप्त किया है। न्यूयॉर्क न केवल आर्थिक दृष्टि से शक्तिशाली है बल्कि यह शहर दुनिया के सबसे ज्यादा अरबपतियों का घर भी है। इस शहर की अर्थव्यवस्था इतनी विशाल है कि यह कई देशों की GDP से भी बड़ी मानी जाती है।
न्यूयॉर्क के बाद जापान की राजधानी टोक्यो दूसरे स्थान पर है। टोक्यो की GDP लगभग 2.1 ट्रिलियन डॉलर है। यह शहर तकनीकी, विनिर्माण और वित्तीय उद्योगों का प्रमुख केंद्र है। इसके अलावा टोक्यो दुनिया के सबसे बड़े मेट्रोपॉलिटन क्षेत्रों में से एक माना जाता है, जो वैश्विक आर्थिक गतिविधियों का एक केंद्र भी है।
तीसरे स्थान पर अमेरिका का लॉस एंजेलिस है, जिसकी GDP 1.29 ट्रिलियन डॉलर आंकी गई है। हॉलीवुड का घर होने के अलावा यह शहर वैश्विक व्यापार, मनोरंजन और मीडिया उद्योग के लिए भी जाना जाता है। चौथे स्थान पर फ्रांस की राजधानी पेरिस है, जिसकी GDP 1.27 ट्रिलियन डॉलर है। पेरिस यूरोप का वित्तीय और सांस्कृतिक केंद्र होने के साथ ही व्यापार और पर्यटन में भी प्रमुख भूमिका निभाता है।
पाँचवें स्थान पर ब्रिटेन की राजधानी लंदन है, जिसकी GDP 1.17 ट्रिलियन डॉलर के आसपास है। लंदन विश्व बैंकिंग और वित्तीय सेवा उद्योग का केंद्र माना जाता है और यह यूरोप के सबसे महत्वपूर्ण आर्थिक शहरों में से एक है।
सूची में ब्राजील का साओ पाउलो, दक्षिण कोरिया का सियोल और जर्मनी का फ्रैंकफर्ट जैसे शहर भी शामिल हैं, जो अपने-अपने क्षेत्र की आर्थिक गतिविधियों और उद्योगों के लिए महत्वपूर्ण हैं। इसके अलावा चीन के शंघाई और बीजिंग शहर भी टॉप 20 में शामिल हैं, जो देश की आर्थिक शक्ति को दर्शाते हैं।
हालांकि, भारत की बात करें तो मुंबई, दिल्ली, बेंगलुरु जैसे शहर आर्थिक दृष्टि से मजबूत और तेजी से विकसित हो रहे हैं, लेकिन अभी भी वैश्विक टॉप अमीर शहरों की सूची में इन्हें स्थान नहीं मिला। यह दर्शाता है कि भारत को अपनी आर्थिक संरचना, उद्योगों के विस्तार और वैश्विक प्रतिस्पर्धा में अपनी स्थिति को और मजबूत करने की जरूरत है।
विशेषज्ञों का कहना है कि भारत के शहरों का वैश्विक सूची में जगह न बन पाना केवल आंकड़ों का विषय नहीं है, बल्कि यह आर्थिक नीति, इंफ्रास्ट्रक्चर, निवेश और वैश्विक व्यापार में प्रतिस्पर्धा की क्षमता से जुड़ा हुआ है। मुंबई और बेंगलुरु जैसे शहर तकनीकी और वित्तीय केंद्र बनते जा रहे हैं, लेकिन वैश्विक मानकों के हिसाब से अभी उन्हें अधिक निवेश और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान की जरूरत है।
दुनिया के टॉप अमीर शहरों की इस सूची ने यह स्पष्ट कर दिया है कि अमेरिका और एशियाई देशों के शहर वैश्विक अर्थव्यवस्था में कैसे दबदबा बनाए हुए हैं। भारत के शहरों के लिए यह चुनौती और अवसर दोनों है। विशेषज्ञों का सुझाव है कि भारत के शहरों को तकनीकी, निवेश, औद्योगिक और वित्तीय क्षेत्रों में और तेजी लानी होगी ताकि भविष्य में वैश्विक स्तर पर उनकी पहचान मजबूत हो सके।
अंततः, यह सूची केवल आर्थिक ताकत का पैमाना नहीं है, बल्कि यह वैश्विक आर्थिक प्रतिस्पर्धा और शहरों की रणनीतिक योजना की दिशा में संकेत भी देती है। भारत के शहरों को अब अपने विकास और वैश्विक पहचान के लिए नई योजनाएं बनानी होंगी ताकि भविष्य में वे इस टॉप अमीर शहरों की सूची में जगह बना सकें।








