मुंबई के पास स्थित वसई–विरार क्षेत्र में नवंबर की शुरुआत के साथ ठंड अपने चरम की ओर बढ़ रही है, लेकिन इसी ठंड ने एक और चिंताजनक स्थिति पैदा कर दी है। शहर और ग्रामीण इलाकों में घोणस (रसेल वाइपर) सांपों की गतिविधि अचानक बढ़ गई है। पिछले तीन दिनों में गिरिज, वसलाई, मांडले और मर्सिस जैसी बस्तियों में कुल पांच खतरनाक विषैले घोणस सांप पकड़े गए हैं। इन सांपों की लंबाई तीन से पांच फीट के बीच पाई गई, जो कि इस प्रजाति के औसत आकार के अनुरूप है।
स्थानीय सांप मित्र हेमंत पवार के अनुसार, नवंबर से शुरू होने वाली ठंडी हवाओं के कारण घोणस सांप तेजी से गर्म स्थानों की तलाश में निकल आते हैं। इसी कारण वे मानव बस्तियों के आसपास ज्यादा दिखाई दे रहे हैं। पिछले कुछ दिनों से तापमान में अचानक आई गिरावट ने इन सांपों को अपने प्राकृतिक आवास से बाहर निकलने पर मजबूर कर दिया है। सितंबर–अक्टूबर में हुई बेमौसम बारिश के बाद मौसम और ठंडा हो गया, जिससे इन सांपों की हलचल बढ़ गई है।
विशेषज्ञों का कहना है कि सर्दियां घोणस की ब्रीडिंग सीजन मानी जाती हैं। इस मौसम में यह प्रजाति अधिक सक्रिय रहती है और रात के समय अपने बिल से बाहर निकलकर गर्म जगहों में प्रवेश करने का प्रयास करती है। यही वजह है कि वे घरों, गोदामों, खेतों और निर्माण स्थलों के आसपास तेजी से देखे जा रहे हैं।
घोणस सांप भारत के चार सबसे जहरीले सांपों में से एक है। इसे रसेल वाइपर के नाम से भी जाना जाता है। यह सांप दमदार जहर, तेज हमले और खतरनाक एक्टिविटी के लिए बदनाम है। इसकी शरीर रचना मोटी, मजबूत और सिर तिकोना होता है, जिस पर गोल काले धब्बे भूरे किनारों के साथ दिखाई देते हैं। इसकी आंखें सीधी पुतलियों वाली होती हैं, जो इसे अन्य प्रजातियों से अलग पहचान देती हैं। महाराष्ट्र के ग्रामीण इलाकों में इसे कई नामों से जाना जाता है, जैसे—सोन्या पारद, कंबला, पारद, ज़ादो, पिरिमिति, माहोल आदि।
घोणस आम तौर पर दलदली जमीन, घास वाले क्षेत्रों और चूहे के बिलों में रहना पसंद करता है। लेकिन सर्दियों की ठंड इसकी गतिविधि को बढ़ा देती है। इसकी अटैक स्पीड इतनी तेज होती है कि यह एक सेकंड से भी कम समय में हमला कर सकता है। सांप विशेषज्ञों ने लोगों को चेताया है कि इस सांप के आसपास गलती से भी न जाएं, क्योंकि इसका जहर खून को जमाने की क्षमता रखता है और इलाज में जरा सी देर जानलेवा साबित हो सकती है।
वसई–विरार में लगातार पांच सांप मिलने के बाद स्थानीय लोगों में चिंता का माहौल है। सांप मित्र हेमंत पवार ने नागरिकों से अपील की है कि यदि किसी क्षेत्र में सांप दिखाई दे, तो तुरंत स्थानीय सांप रेस्क्यू टीम से संपर्क करें और स्वयं उसे पकड़ने का प्रयास न करें। घरों में साफ-सफाई बनाए रखने, कचरा खुले में न डालने, और बच्चों को खुले मैदानों या अंधेरी जगहों में खेलने से रोकने की सलाह भी दी गई है।
सर्दियों के इस मौसम में महाराष्ट्र के कई इलाकों में सांपों की सक्रियता बढ़ जाती है, लेकिन वसई–विरार में घोणस प्रजाति की बढ़ी हुई उपस्थिति चिंताजनक है। प्रशासन और स्थानीय वन विभाग भी मामलों पर नजर बनाए हुए हैं। वहीं, विशेषज्ञों का कहना है कि जागरूकता और सावधानी इस खतरनाक सांप से बचाव का सबसे प्रभावी तरीका है।








