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महाराष्ट्र में स्वास्थ्य मोर्चे पर गंभीर चिंता का विषय सामने आया है। राज्य में चल रहे बड़े स्क्रीनिंग अभियान के दौरान पिछले कुछ दिनों में कई जिलों में नई लीपरोसी (कुष्ठ रोग) की पुष्टि हुई है। 2025 में मिली रिपोर्ट के अनुसार, यह रोग अब भी राज्य के विभिन्न हिस्सों में पाया जा रहा है और इसका समय पर पता लगाना और उपचार करना अत्यंत आवश्यक है।
स्वास्थ्य विभाग ने बताया कि अभियान के तहत ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में व्यापक जांच की गई। इस अभियान का उद्देश्य जनता में रोग के प्रति जागरूकता बढ़ाना और शुरुआती चरण में मामलों की पहचान कर उन्हें समय पर उपचार देना है। विभाग ने कहा कि शुरुआती पहचान और दवा लेने से लीपरोसी पूरी तरह ठीक की जा सकती है, और इससे रोग के फैलाव को भी रोका जा सकता है।
विशेषज्ञों ने बताया कि लीपरोसी संक्रमण मुख्य रूप से लंबे समय तक बिना इलाज के रहने वाले मामलों में देखा जाता है। हालांकि यह रोग अत्यधिक संक्रामक नहीं है, लेकिन इसे नजरअंदाज करने पर व्यक्ति के स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है। राज्य सरकार ने ग्रामीण स्वास्थ्य केंद्रों और जिला अस्पतालों में रोगियों के इलाज और फॉलो‑अप को मजबूत किया है।
आधुनिक चिकित्सा तकनीक और मुफ्त दवाइयों के उपलब्ध होने के बावजूद, जागरूकता की कमी और समय पर जांच न कराने के कारण कुछ जिलों में नए मामले सामने आ रहे हैं। स्वास्थ्य अधिकारी लगातार लोगों को नियमित जांच और शुरुआती लक्षणों पर ध्यान देने की सलाह दे रहे हैं। लक्षणों में त्वचा पर दाने, झुर्रियां या संवेदनशीलता में बदलाव शामिल हैं।
इस स्क्रीनिंग अभियान के दौरान स्वास्थ्य कर्मियों ने कहा कि सबसे अधिक नए मामले उन क्षेत्रों में देखे गए हैं जहां स्वास्थ्य सुविधाओं की पहुंच सीमित है। राज्य सरकार ने इस पर विशेष ध्यान देने और निगरानी बढ़ाने का निर्णय लिया है। साथ ही, स्थानीय प्रशासन और NGOs के सहयोग से लोगों में बीमारी के प्रति जागरूकता फैलाने के प्रयास किए जा रहे हैं।
निष्कर्षतः, 2025 में महाराष्ट्र के विभिन्न जिलों में लीपरोसी के नए मामलों की पुष्टि स्वास्थ्य अधिकारियों के लिए सतर्कता का संकेत है। यह अभियान न केवल रोग की पहचान और उपचार को बढ़ावा देता है, बल्कि जनता में जागरूकता और स्वास्थ्य संबंधी जिम्मेदारी भी सुनिश्चित करता है। विशेषज्ञों ने सभी नागरिकों से आग्रह किया है कि वे समय पर स्वास्थ्य जांच कराएँ और बीमारी के शुरुआती लक्षण नजर आते ही चिकित्सक से संपर्क करें।








