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  • शीतकालीन सत्र 2025 का पहला दिन: SIR विवाद में संसद में हंगामा, लोकसभा और राज्यसभा स्थगित

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    संसद का शीतकालीन सत्र 2025 सोमवार, 2 दिसंबर को शुरू हुआ और पहले ही दिन हंगामे में बदल गया। सत्र की शुरुआत होते ही विपक्षी दलों ने मतदाता सूची पुनरीक्षण (Special Intensive Revision – SIR) को लेकर तीव्र विरोध जताना शुरू कर दिया। विपक्ष का कहना था कि SIR प्रक्रिया में गड़बड़ी और चुनावी धोखाधड़ी की संभावनाएँ हैं, और इसे लेकर सदन में तत्काल चर्चा होनी चाहिए।

    लोकसभा में जैसे ही बैठक शुरू हुई, विपक्षी सांसदों ने नारेबाजी शुरू कर दी। उन्होंने SIR के मुद्दे पर स्पष्ट बहस की मांग की, जिससे सदन का कामकाज बाधित हुआ। हंगामे के बीच कई बार स्थगन हुआ और दोपहर तक लोकसभा की कार्यवाही पूरी तरह प्रभावित रही। स्थिति इतनी गंभीर हो गई कि अंततः सभापति को लोकसभा की कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी।

    राज्यसभा में भी माहौल समान रहा। विपक्षी सांसदों ने सदन में विरोध प्रदर्शन करते हुए walk-out किया, जिससे राज्यसभा की कार्यवाही भी बाधित हो गई। पहले दिन का एजेंडा लगभग निष्प्रभावी रहा और कोई भी प्रमुख कानून या बिल पारित नहीं हो पाया।

    इस दौरान सरकार ने कहा कि मतदाता सूची पुनरीक्षण लोकतांत्रिक प्रक्रिया का हिस्सा है और इसमें सुधार आवश्यक हैं। उन्होंने विपक्ष को आश्वस्त किया कि इस प्रक्रिया में पारदर्शिता और नागरिक अधिकारों का पूरा ध्यान रखा जा रहा है। इसके बावजूद विपक्ष ने कहा कि वे SIR को लेकर चर्चा किए बिना किसी भी विधायी कार्रवाई का समर्थन नहीं करेंगे।

    विशेषज्ञों का कहना है कि सत्र के पहले दिन का हंगामा आगामी दिनों में सरकार और विपक्ष के बीच सहमति बनाने की जटिलताओं को दर्शाता है। शीतकालीन सत्र का उद्देश्य कानून निर्माण और जनहित के मुद्दों पर चर्चा करना होता है, लेकिन इस बार पहला दिन विवाद और विरोध प्रदर्शन के कारण व्यर्थ साबित हुआ।

    राजनीतिक विश्लेषक यह मानते हैं कि SIR विवाद आगामी दिनों में भी संसद में मुख्य बहस का विषय रहेगा। विपक्षी दल लगातार इस मुद्दे पर चर्चा के लिए दबाव डाल रहे हैं, जबकि सरकार इसे सुधार और लोकतांत्रिक प्रक्रिया का हिस्सा बताकर आगे बढ़ना चाहती है। ऐसे में शीतकालीन सत्र के दौरान संसद में होने वाली कार्यवाही और हंगामा दोनों ही राजनीति की दिशा तय करेंगे।

    पहले दिन के अनुभव से स्पष्ट हो गया है कि मतदाता सूची पुनरीक्षण और चुनावी सुधारों के मुद्दे संसद में गंभीर बहस और संघर्ष का कारण बन सकते हैं। आने वाले दिनों में यह देखने वाली बात होगी कि क्या सरकार और विपक्ष के बीच किसी समझौते के जरिए सत्र का सामान्य संचालन संभव हो पाएगा, या फिर हंगामे और स्थगन की स्थिति जारी रहेगी।

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