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  • अयोध्या में द्रविड़ शैली का विश्व स्तरीय मंदिर संग्रहालय बनेगा, टाटा सन्स CSR सहयोग से परियोजना शुरू

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    अयोध्या राम मंदिर के निर्माण के बाद अब उत्तर प्रदेश सरकार और भारत सरकार ने शहर को विश्वस्तरीय सांस्कृतिक और आध्यात्मिक केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा में एक और बड़ा कदम उठाया है। राज्य कैबिनेट ने टाटा सन्स प्राइवेट लिमिटेड कंपनी के सहयोग से अयोध्या में आधुनिक सुविधाओं से लैस विश्व स्तरीय ‘मंदिर संग्रहालय’ बनाने की मंजूरी दे दी है। यह संग्रहालय द्रविड़ शैली में बनाया जाएगा और इसके डिज़ाइन में आधुनिक तकनीकी और सुविधा संपन्न तत्व शामिल होंगे, ताकि आगंतुकों को आध्यात्मिक और सांस्कृतिक अनुभव का उच्चतम स्तर प्राप्त हो सके।

    सरकारी सूत्रों के अनुसार, यह परियोजना अयोध्या को विश्वस्तरीय सांस्कृतिक और पर्यटन स्थल बनाने के बड़े प्रयास का हिस्सा है। टाटा सन्स ने अपने CSR (कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी) फंड से इस परियोजना को विकसित करने और उसके संचालन की जिम्मेदारी ली है। संग्रहालय का क्षेत्रफल लगभग 52 एकड़ होगा और इसमें धार्मिक, सांस्कृतिक और ऐतिहासिक कलाकृतियों को आधुनिक संग्रह प्रणाली के साथ प्रदर्शित किया जाएगा।

    इस संग्रहालय के निर्माण के लिए कंपनी एक्ट 2013 की धारा 8 के तहत एक गैर-लाभकारी विशेष उद्देश्य वाहन (SPV) बनाया जाएगा, जिसमें भारत सरकार और उत्तर प्रदेश सरकार के प्रतिनिधि भी शामिल होंगे। सरकारी अधिकारियों ने बताया कि यह SPV परियोजना की पारदर्शिता, संचालन और दीर्घकालिक प्रबंधन सुनिश्चित करने के लिए बनाया गया है।

    भू-आवंटन और अन्य प्रारंभिक प्रक्रियाओं के लिए भारत सरकार, उत्तर प्रदेश सरकार और टाटा सन्स के बीच त्रिपक्षीय एमओयू 3 सितंबर 2024 को हस्ताक्षरित हो चुका है। एमओयू के तहत सभी पक्ष परियोजना के नियमन, वित्तीय योगदान और दीर्घकालिक संचालन के नियमों को मानेंगे।

    संग्रहालय में धार्मिक और सांस्कृतिक कलाकृतियों के साथ ही भारतीय वास्तुकला और द्रविड़ शैली के शिल्पकला के उत्कृष्ट उदाहरण प्रदर्शित किए जाएंगे। इसके अलावा, डिजिटल गैलरी, इंटरैक्टिव डिस्प्ले और अन्य आधुनिक सुविधाएं भी आगंतुकों के अनुभव को समृद्ध बनाएंगी। यह संग्रहालय न केवल धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देगा, बल्कि अयोध्या को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सांस्कृतिक पर्यटन स्थल के रूप में स्थापित करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

    विशेषज्ञों का कहना है कि यह संग्रहालय परियोजना अयोध्या में पर्यटन, रोजगार और स्थानीय अर्थव्यवस्था के विकास में सहायक होगी। इससे क्षेत्रीय कला, संस्कृति और परंपराओं को संरक्षित करने में भी मदद मिलेगी। टाटा सन्स की इस पहल से निजी क्षेत्र और सरकार के सहयोग का उदाहरण भी स्थापित होगा, जिससे भविष्य में इसी तरह की अन्य सांस्कृतिक परियोजनाओं के लिए मार्ग प्रशस्त होगा।

    इस संग्रहालय की योजना के साथ अयोध्या अब धार्मिक, सांस्कृतिक और ऐतिहासिक दृष्टि से एक आकर्षक केंद्र बनता दिखाई दे रहा है। यह परियोजना न केवल स्थानीय जनता के लिए गर्व का विषय होगी, बल्कि देश और दुनिया भर के पर्यटकों को आकर्षित करेगी। जल्द ही निर्माण कार्य शुरू होने के बाद अयोध्या का यह नया पहलू जनता के समक्ष खुलेगा और शहर के पर्यटन और सांस्कृतिक विकास को नई ऊँचाई देगा।

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