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बॉलीवुड की बहुप्रतीक्षित फिल्म ‘धुरंधर’ एक बार फिर सुर्खियों में है, और इस बार वजह है इसकी असाधारण लंबी रनटाइम। फिल्म को अब आधिकारिक रूप से 214 मिनट, यानी लगभग 3 घंटे 34 मिनट, की अवधि के साथ रिलीज़ के लिए तैयार किया गया है। यह इसे पिछले 17 सालों में बनी सबसे लंबी हिंदी फिल्मों की सूची में शामिल कर देता है। आज के समय में, जब अधिकांश फिल्में 2 से 2.5 घंटे के फॉर्मेट में बनाई जा रही हैं, ‘धुरंधर’ का यह साहसिक कदम दर्शकों में उत्सुकता भी बढ़ा रहा है और चर्चा भी।
फिल्म उद्योग के जानकारों का मानना है कि इतनी लंबी अवधि का निर्णय फिल्म की कहानी, पात्रों और भावनात्मक गहराई के अनुरूप ही लिया गया होगा। ‘धुरंधर’ को शुरुआत से ही एक मल्टी-लेयर नैरेटिव, जटिल किरदारों और बड़े पैमाने के एक्शन सीक्वेन्स वाली फिल्म बताया जा रहा है। लंबे समय से फैला अनुमान भी यही रहा है कि फिल्म को अपने सभी पहलुओं को पूरा न्याय देने के लिए अधिक समय की आवश्यकता है, और अब यह आधिकारिक पुष्टि भी सामने आ चुकी है।
इतिहास में देखा जाए तो ऐसे बहुत कम अवसर आए हैं जब किसी हिंदी फिल्म ने इतनी लंबी रनटाइम के साथ दर्शकों का सामना किया हो। ‘धुरंधर’ इससे पहले की कुछ क्लासिक लंबी फिल्मों जैसे ‘मेरा नाम जोकर’ (255 मिनट), ‘लगान’ (224 मिनट) और ‘स्वदेस’ (210 मिनट) की श्रेणी में आ खड़ी होती है। हालांकि आधुनिक दौर में, जहां ओटीटी कंटेंट और तेज-गति वाली कहानियों का चलन है, इतनी लंबी फिल्म रिलीज करना निर्माताओं की एक साहसिक रणनीति के रूप में देखा जा रहा है।
‘धुरंधर’ की लंबी रनटाइम को लेकर दर्शकों में भी अलग-अलग प्रतिक्रियाएँ देखने को मिल रही हैं। कुछ दर्शक मानते हैं कि अगर फिल्म की कहानी दमदार है और निर्देशन मजबूत है, तो फिल्म की अवधि उसका असर कम नहीं करेगी। वहीं, एक वर्ग यह भी सोचता है कि इतनी लंबी फिल्म के लिए सिनेमाघरों में लगातार बैठना दर्शकों की सहनशक्ति के लिए चुनौती हो सकता है। लेकिन बॉलीवुड फिल्मों का इतिहास यह भी बताता है कि अच्छी कहानी कभी भी लंबी नहीं लगती — चाहे उसकी अवधि 3 घंटों से ऊपर ही क्यों न हो।
फिल्म से जुड़े सूत्रों के अनुसार, ‘धुरंधर’ का पैमाना बेहद भव्य है और यह एक बड़े कैनवास पर तैयार की गई कहानी है। इसमें ऐतिहासिक, भावनात्मक और एक्शन-प्रधान तत्वों का ऐसा संगम है, जिसके लिए छोटे फॉर्मेट में कटौती करना उचित नहीं माना गया। निर्माता भी मानते हैं कि फिल्म की आत्मा उसके विस्तृत नैरेटिव में है, इसलिए इसे पूर्ण रूप से प्रस्तुत करना आवश्यक था।
बॉक्स ऑफिस विशेषज्ञों का कहना है कि इतनी लंबी रनटाइम का एक व्यावसायिक प्रभाव भी होता है। शो की संख्या थोड़ी कम हो सकती है, क्योंकि सिनेमाघरों को प्रतिदिन कम स्क्रीनिंग्स मिल पाती हैं। हालांकि, अगर फिल्म दर्शकों को भावनात्मक रूप से जोड़ने में सफल होती है, तो इसकी लंबाई बॉक्स ऑफिस पर बाधा नहीं बनती। कई सुपरहिट फिल्मों ने पहले भी यह साबित किया है कि कंटेंट अच्छा हो तो रनटाइम मायने नहीं रखता।
‘धुरंधर’ की रिलीज़ को लेकर दर्शकों में उत्साह पहले से ही चरम पर है, और रनटाइम के इस खुलासे ने फिल्म को एक नई पहचान दे दी है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि इतने बड़े पैमाने पर बनी यह फिल्म दर्शकों की उम्मीदों पर कितनी खरी उतरती है। फिल्म समीक्षकों और दर्शकों की नजरें अब ‘धुरंधर’ की रिलीज़ डेट पर टिकी हैं, जो आने वाले दिनों में बॉक्स ऑफिस पर नई चर्चा छेड़ सकती है।








