देश में पेट्रोल और डीजल की लगातार बढ़ती कीमतों के बीच उत्तराखंड सरकार ने आम जनता को बड़ी राहत देने वाला फैसला लिया है। राज्य सरकार ने प्राकृतिक गैस पर लगने वाले वैट में भारी कटौती को मंजूरी दे दी है, जिसके बाद सीएनजी के दामों में 15 रुपये प्रति किलो तक और पीएनजी की कीमतों में 7 रुपये प्रति यूनिट तक की कमी आने की संभावना है। इस फैसले से लाखों वाहन चालकों और घरेलू उपभोक्ताओं को सीधा लाभ मिलने वाला है।
उत्तराखंड सरकार का यह निर्णय ऐसे समय पर आया है जब महंगाई आम आदमी की जेब पर भारी पड़ रही है। पेट्रोल और डीजल की कीमतें बीते कुछ वर्षों में रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच चुकी हैं, जिससे परिवहन लागत बढ़ी है और आम जीवन प्रभावित हुआ है। ऐसे में सीएनजी और पीएनजी जैसे वैकल्पिक और स्वच्छ ईंधन पर टैक्स घटाना सरकार का एक दूरदर्शी कदम माना जा रहा है।
राज्य मंत्रिमंडल की बैठक में यह अहम निर्णय लिया गया कि सीएनजी और पीएनजी पर वैट को 20 प्रतिशत से घटाकर केवल 5 प्रतिशत कर दिया जाए। इस टैक्स कटौती का सीधा असर गैस की खुदरा कीमतों पर पड़ेगा और उपभोक्ताओं को राहत मिलेगी। सरकार का मानना है कि इस कदम से लोग पेट्रोल-डीजल की बजाय प्राकृतिक गैस को अपनाने के लिए प्रेरित होंगे।
वर्तमान में उत्तराखंड के विभिन्न शहरों में सीएनजी की कीमत लगभग 99 से 100 रुपये प्रति किलो है, जबकि पीएनजी की दर 40 से 45 रुपये प्रति यूनिट के बीच है। वैट में कटौती के बाद सीएनजी के दाम घटकर करीब 85 रुपये प्रति किलो तक आ सकते हैं, वहीं पीएनजी की कीमतों में भी उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की जाएगी। इससे टैक्सी चालकों, ऑटो ड्राइवरों, निजी वाहन मालिकों और घरेलू उपभोक्ताओं—सभी को राहत मिलेगी।
सरकार के इस फैसले के पीछे केवल आर्थिक ही नहीं, बल्कि पर्यावरणीय कारण भी अहम हैं। पेट्रोल और डीजल से चलने वाले वाहन वायु प्रदूषण का एक बड़ा कारण हैं। हाल के दिनों में उत्तराखंड के कई शहरों में एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) चिंताजनक स्तर पर पहुंच गया है। ऐसे में सरकार ने हरित ईंधन को बढ़ावा देने की दिशा में यह ठोस कदम उठाया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि प्राकृतिक गैस की कीमतें कम होने से परिवहन लागत घटेगी, जिसका असर रोजमर्रा की वस्तुओं की कीमतों पर भी देखने को मिल सकता है। माल ढुलाई सस्ती होने से महंगाई पर भी कुछ हद तक नियंत्रण संभव है। इसके साथ ही घरेलू पीएनजी के सस्ते होने से मध्यम वर्ग और निम्न आय वर्ग के परिवारों का मासिक बजट भी संतुलित होगा।
राज्य सरकार का कहना है कि इस फैसले से उत्तराखंड की अर्थव्यवस्था को भी सकारात्मक बढ़ावा मिलेगा। हरित ईंधन को प्रोत्साहन मिलने से नए निवेश के अवसर पैदा होंगे और गैस आधारित बुनियादी ढांचे का विस्तार होगा। इससे रोजगार के नए अवसर भी सृजित होने की संभावना है।
इस फैसले के बाद अन्य राज्यों में भी इसी तरह की मांग उठने लगी है। महाराष्ट्र, दिल्ली, गुजरात और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में जहां सीएनजी वाहनों की संख्या तेजी से बढ़ रही है, वहां भी उपभोक्ता टैक्स में कटौती की उम्मीद कर रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि अन्य राज्य भी उत्तराखंड मॉडल को अपनाते हैं, तो देशभर में हरित ऊर्जा को बड़ा प्रोत्साहन मिल सकता है।
पर्यावरण विशेषज्ञों और सामाजिक संगठनों ने भी सरकार के इस निर्णय का स्वागत किया है। उनका कहना है कि सीएनजी और पीएनजी पेट्रोल-डीजल की तुलना में कहीं अधिक स्वच्छ ईंधन हैं, जिससे कार्बन उत्सर्जन कम होता है और स्वास्थ्य पर पड़ने वाले दुष्प्रभाव भी घटते हैं।
कुल मिलाकर, उत्तराखंड सरकार द्वारा वैट में की गई यह कटौती न केवल आम नागरिकों को आर्थिक राहत देगी, बल्कि पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास की दिशा में भी एक मजबूत कदम साबित होगी। बढ़ती महंगाई के दौर में यह फैसला निश्चित रूप से जनता के लिए राहत भरा और भविष्य के लिए लाभकारी माना जा रहा है।








