इस खबर को सुनने के लिये प्ले बटन को दबाएं।

ऐसे समय में जब भारतीय कृषि बढ़ती उत्पादन लागत, मिट्टी की सेहत में गिरावट और किसानों की घटती आय जैसी गंभीर चुनौतियों से जूझ रही है, महाराष्ट्र की ग्रामतेज किसान उत्पादक कंपनी लिमिटेड (FPC) सामूहिक प्रयास, नवाचार और किसान-केंद्रित नेतृत्व के बल पर सतत परिवर्तन की एक प्रेरक मिसाल बनकर उभरी है।
वर्ष 2023 में स्थापित ग्रामतेज एफपीसी आज जैविक और प्राकृतिक खेती के क्षेत्र में किसानों को आर्थिक और पारिस्थितिक विकास के केंद्र में रखते हुए कृषि के भविष्य को नई दिशा दे रही है।
चिंता और संकल्प से जन्मी एक दूरदृष्टि
ग्रामतेज एफपीसी की नींव संदीप राव सुभाषराव लाजुरकर, संजय रामकृष्ण आसरे और शीतलसिंह आर. ठाकुर ने रखी। तीनों संस्थापकों को कृषि और ग्रामीण आजीविका की बिगड़ती स्थिति की गहरी चिंता थी, लेकिन साथ ही उनके पास समाधान की स्पष्ट दृष्टि और मजबूत संकल्प भी था।
हालांकि उनका लक्ष्य एक बहुराष्ट्रीय स्तर का संगठन खड़ा करना है, लेकिन उन्होंने स्पष्ट किया कि किसान, मिट्टी की सेहत, मानव स्वास्थ्य और आर्थिक स्थिरता से कभी समझौता नहीं किया जाएगा।
10 किसानों से शुरू हुई यह पहल आज 2,000 से अधिक किसानों के मजबूत नेटवर्क में बदल चुकी है, जो कम लागत वाली जैविक और प्राकृतिक खेती को अपना रहे हैं।
विविध अनुभवों से सशक्त नेतृत्व
ग्रामतेज एफपीसी की सबसे बड़ी ताकत इसकी नेतृत्व टीम है, जिसमें प्रबंधन, जैविक खेती, तकनीक और विपणन का गहन अनुभव शामिल है।
-
शीतलसिंह आर. ठाकुर, वाणिज्य स्नातक और कंपनी प्रबंधन व जैविक खेती प्रशिक्षण का अनुभव रखने वाले, संगठन की दस्तावेज़ीकरण, ऑडिट और प्रशासनिक व्यवस्थाओं को संभालते हैं।
-
संजय रामकृष्ण आसरे, जिन्हें जैविक खेती, ग्रामीण विकास और बायो-इनपुट कंपनियों में दो दशकों से अधिक का अनुभव है, खरीद, बिक्री, एपीएमसी संचालन और किसान सहायता प्रणालियों का नेतृत्व करते हैं।
-
संदीप राव सुभाषराव लाजुरकर, कंप्यूटर इंजीनियर और ब्रिटेन में बहुराष्ट्रीय कंपनियों के साथ कार्य कर चुके, परियोजना विकास, रणनीतिक योजना और क्रियान्वयन की जिम्मेदारी संभालते हैं।
कम लागत वाली प्राकृतिक खेती को बढ़ावा
ग्रामतेज एफपीसी की प्रमुख उपलब्धियों में किसानों को रासायनिक आदानों पर निर्भरता से मुक्त कर कम लागत वाली जैविक खेती की ओर ले जाना शामिल है।
प्रशिक्षण, खेत स्तर पर मार्गदर्शन और जैविक आदानों की उपलब्धता के माध्यम से कंपनी किसानों को:
-
उत्पादन लागत घटाने
-
लाभप्रदता बढ़ाने
-
मिट्टी की उर्वरता बहाल करने
-
सुरक्षित और पौष्टिक खाद्यान्न उत्पादन
में सहयोग कर रही है।
खेती से आगे: ग्रामीण उद्यमिता का निर्माण
ग्रामतेज एफपीसी केवल खेती तक सीमित नहीं है। यह संगठन कृषि आधारित और सहायक व्यवसायों को बढ़ावा देने, महिला स्वयं सहायता समूहों और किसान समूहों को समर्थन देने तथा ग्रामीण क्षेत्रों में उद्यमिता को प्रोत्साहित करने के लिए सक्रिय रूप से कार्य कर रहा है।
साथ ही, किसानों को सरकारी योजनाओं और लाभों से जोड़ने, नई कृषि पहलों और अभियानों को लागू करने में भी ग्रामतेज की अहम भूमिका है। इससे किसान केवल उत्पादक नहीं, बल्कि सफल कृषि उद्यमी बन रहे हैं।
भारत के कृषि भविष्य के लिए एक आदर्श मॉडल
तेज़ निर्णय प्रक्रिया, नवाचारी प्रबंधन शैली और किसानों की मजबूत भागीदारी के बल पर ग्रामतेज एफपीसी एक ऐसा मॉडल विकसित कर रही है जो स्थानीय जरूरतों से जुड़ा होने के साथ-साथ राष्ट्रीय और वैश्विक स्तर पर अपनाने योग्य है।
जैसे-जैसे संगठन अपने कार्यक्षेत्र का विस्तार कर रहा है और नई परियोजनाएं शुरू कर रहा है, ग्रामतेज किसान उत्पादक कंपनी लिमिटेड सामूहिक शक्ति, नैतिक खेती और ग्रामीण सशक्तिकरण की एक प्रेरणादायक सफलता कहानी बनती जा रही है—यह साबित करते हुए कि किसान-नेतृत्व वाले संगठन लाभदायक भी हो सकते हैं और उद्देश्यपूर्ण भी।
उनकी उपलब्धियों और समर्पण को सम्मानित करते हुए शीतलसिंह आर. ठाकुर, संजय रामकृष्ण आसरे और संदीप राव सुभाषराव लाजुरकर को
“महाराष्ट्र बिज़नेस आइकन 2025 / महाराष्ट्र स्टाइल आइकन 2025 / महाराष्ट्र फैशन आइकन 2025” पुरस्कारों के लिए चुना गया है। यह सम्मान Reseal.in और India Fashion Icon Magazine द्वारा प्रदान किया जा रहा है।
फिल्मी सितारों की गरिमामयी उपस्थिति
भव्य पुरस्कार समारोह में प्रसिद्ध फिल्म हस्तियाँ शिरकत करेंगी, जिनमें शामिल हैं:
-
सुश्री वर्षा उसगांवकर (बॉलीवुड अभिनेत्री)
-
सुश्री सोनाली कुलकर्णी (भारतीय अभिनेत्री)
-
सुश्री प्रार्थना बेहेरे (भारतीय अभिनेत्री)
यह चयन न केवल संस्थापकों के लिए, बल्कि पूरे क्षेत्र के लिए गर्व का विषय है।
विशेष नेतृत्व में आयोजन
यह आयोजन Reseal.in (Sure Me Multipurpose Pvt. Ltd.) के संस्थापक और CEO श्री सुधीर कुमार पठाडे के नेतृत्व में आयोजित किया जा रहा है, जो महाराष्ट्र के उभरते उद्यमियों, डिज़ाइनर्स और क्रिएटिव टैलेंट को राष्ट्रीय पहचान दिलाने के लिए निरंतर कार्यरत हैं।








