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अमेरिका ने Group of Seven (G7) की आगामी वित्त मंत्रियों की बैठक में भारत को भी क्रिटिकल मिनरल्स (महत्त्वपूर्ण खनिजों) पर चर्चा के लिए सरकारी आमंत्रण भेजा है। यह बैठक 12 जनवरी, 2026 को वाशिंगटन में आयोजित होने वाली है और इसका मुख्य उद्देश्य वैश्विक सप्लाई चेन सुरक्षा और China पर निर्भरता को कम करना है।
यूएस के वित्त सचिव स्कॉट बेसेन्ट ने कहा कि G7 देशों के साथ ऑस्ट्रेलिया, भारत समेत कई अन्य देशों को भी बैठक में भाग लेने के लिए आमंत्रित किया गया है, ताकि रेयर अर्थ एलिमेंट्स, लिथियम, कॉबाल्ट, ग्रेफाइट जैसे महत्वपूर्ण खनिजों की आपूर्ति को सुरक्षित करने पर सामूहिक रूप से रणनीति बनाई जा सके।
क्रिटिकल मिनरल्स सिरेमिक, बैटरियों, सेमीकंडक्टर, रक्षा तकनीकों और नवीकरणीय ऊर्जा में इस्तेमाल होने वाली अत्याधुनिक तकनीकों के विकास में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। G7 के अधिकांश सदस्य देशों की आपूर्ति अभी चीन पर भारी रूप से निर्भर है, जो इन खनिजों के परिष्करण में दुनिया में अग्रणी है।
बेसेन्ट ने यह भी बताया कि पिछले वर्चुअल मीटिंग के बाद इस मुद्दे को और गहराई से समझने तथा समाधान खोजने के लिए यह विचाराधीन बैठक बुलाई जा रही है। हालांकि उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि भारत ने इस आमंत्रण को स्वीकार कर लिया है या नहीं।
विशेषज्ञों के अनुसार, भारत की भागीदारी से न केवल आपूर्ति‑श्रृंखला की सुरक्षा को बल मिलेगा बल्कि वैश्विक रणनीतिक सहयोग और औद्योगिक वृद्धि के अवसर भी बढ़ेंगे। इस पहल से भारत‑US और G7 देशों के बीच आर्थिक तथा तकनीकी साझेदारी को और सुदृढ़ करने की उम्मीद जताई जा रही है।








