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कोसा सिल्क साड़ियों की कालातीत सुंदरता और पारंपरिक शिल्प को नई पहचान देने वाले खेमचंद रामकृष्ण सोनकुसरे आज महाराष्ट्र के प्रतिष्ठित उद्यमियों में गिने जाते हैं। Swarnhansa Kosa Emporium के माध्यम से उन्होंने कोसा साड़ियों को न केवल विदर्भ बल्कि पूरे देश और अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुँचाया है। इस सफलता के पीछे परिवार का अटूट सहयोग, ग्राहकों का विश्वास और खेमचंद सोनकुसरे की अथक मेहनत
प्रमुख आधार रहे हैं।
Ramkrishna Udyog Bhandar की इकाई Swarnhansa Kosa Emporium को Maharashtra Business Icon Awards 2026 से सम्मानित किया गया है। यह भव्य आयोजन 27–28 जनवरी को नासिक में Resil Dot In द्वारा आयोजित किया गया, जिसमें फैशन, रिटेल, मैन्युफैक्चरिंग और सर्विस सेक्टर के चुनिंदा उद्यमियों को सम्मानित किया गया।
कोसा साड़ी उद्योग में उनके असाधारण योगदान के लिए खेमचंद सोनकुसरे को यह विशेष सम्मान प्रदान किया गया, जिससे वे राज्य के शीर्ष व्यवसायिक उपलब्धि प्राप्त करने वालों में शामिल हो गए हैं।
Swarnhansa Kosa Emporium की नींव वर्ष 1992 में एक छोटे से हथकरघा यूनिट के रूप में रखी गई थी। वर्ष 2002 में भंडारा जिले के अंधलगांव में औपचारिक यूनिट की स्थापना की गई। शुरुआती दौर में खेमचंद सोनकुसरे और उनका परिवार स्वयं गांव-गांव जाकर कोसा साड़ियों का प्रचार-प्रसार करता था।
कठिनाइयों और संघर्षों को पार करते हुए व्यवसाय ने अंधलगांव, मोहाडी, पवनी और उमरेड जैसे ग्रामीण बाजारों में अपनी मजबूत पहचान बनाई।
समय के साथ यह यात्रा नागपुर के सीताबर्डी, झांसी रानी चौक स्थित भव्य शोरूम तक पहुँची, जहाँ से आज Swarnhansa Kosa Emporium की साड़ियाँ महाराष्ट्र सहित देश के विभिन्न राज्यों में भेजी जाती हैं
Swarnhansa Kosa Emporium ने अपनी पहुँच बढ़ाने के लिए विभिन्न राष्ट्रीय प्रदर्शनियों में भाग लिया। कोसा साड़ियों के विशेष डिज़ाइन हेतु कच्चा माल और तैयार साड़ियाँ विभिन्न राज्यों में भेजी जाती हैं—
• अजरख प्रिंट – गुजरात
• डाबू प्रिंट – राजस्थान
• बैग प्रिंट – धार (मध्य प्रदेश)
इन साड़ियों की नागपुर सहित अन्य शहरों में भारी मांग है। कोसा सिल्क की लोकप्रियता में Emporium की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण रही है।
खेमचंद सोनकुसरे अपने पिता रामकृष्ण सोनकुसरे को इस व्यवसाय का मार्गदर्शक मानते हैं। करौती बॉर्डर और टसर सिल्क वाली कोसा साड़ियाँ विदर्भ की महिलाओं, राजनेताओं और प्रशासनिक अधिकारियों में विशेष रूप से लोकप्रिय हैं।
हाल ही में प्राप्त GI टैग के बाद दिल्ली, मुंबई, कोलकाता और चेन्नई जैसे महानगरों में भी इनकी मांग तेजी से बढ़ी है।
Swarnhansa Kosa Emporium में 10–12 प्रकार की कोसा साड़ियाँ उपलब्ध हैं। इनमें प्रिंटेड साड़ियाँ सबसे अधिक लोकप्रिय हैं। साथ ही,
• कलमकारी हैंड पेंटेड साड़ियाँ
• शांतिनिकेतन (पश्चिम बंगाल) की कांथा हैंडवर्क साड़ियाँ
कीमत ₹5,000 से ₹25,000 तक होती है। केवल NADT Convocation के लिए ही प्रतिवर्ष 50 से अधिक साड़ियाँ तैयार की जाती हैं, जो शहरी महिलाओं में इसकी लोकप्रियता दर्शाता है।
Emporium टसर सिल्क किसानों से उचित मूल्य पर रेशम खरीदता है और समय पर भुगतान सुनिश्चित करता है। इससे आदिवासी समुदायों की आजीविका सशक्त होती है। वन क्षेत्रों में रेशम उत्पादन के दौरान वन एवं रेशम विभाग के सहयोग से पर्यावरण संरक्षण भी सुनिश्चित किया जाता है।
रेशम धागा प्रसंस्करण से लेकर करौती कोसा साड़ी निर्माण तक, Swarnhansa Kosa Emporium ने अनेक परिवारों को रोज़गार उपलब्ध कराया है। परंपरागत शिल्प को जीवित रखते हुए यह ब्रांड आज महिलाओं की पहली पसंद बना हुआ है—देश और विदेश दोनों में।
खेमचंद रामकृष्ण सोनकुसरे का चयन
“Maharashtra Business Icon 2025 / Maharashtra Style Icon 2025 / Maharashtra Fashion Icon 2025”
पुरस्कारों के लिए किया गया है।
यह सम्मान Reseal.in एवं India Fashion Icon Magazine द्वारा महाराष्ट्र के उभरते उद्यमियों और कलाकारों को प्रोत्साहित करने हेतु प्रदान किया जा रहा है। यह उपलब्धि पूरे क्षेत्र के लिए गर्व का विषय है।
इस भव्य पुरस्कार समारोह में विशेष अतिथि के रूप में उपस्थित रहेंगी—
⭐ वर्षा उसगांवकर – बॉलीवुड अभिनेत्री
⭐ सोनाली कुलकर्णी – भारतीय अभिनेत्री
⭐ प्रार्थना बेहेरे – भारतीय अभिनेत्री
इस आयोजन का नेतृत्व कर रहे हैं—
श्री सुधीर कुमार पठाडे
Founder & CEO, Sure Me Multipurpose Pvt. Ltd. (Reseal.in)
जो महाराष्ट्र की उभरती प्रतिभाओं को राष्ट्रीय मंच प्रदान करने के लिए सतत प्रयासरत हैं।






