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  • नाशिक में NGT की जांच: तपोवन और अन्य स्थलों पर पेड़ों की सुरक्षा जाँच

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    नाशिक में नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT), पुणे बेंच के निर्देश पर गठित एक तीन सदस्यीय जांच समिति ने शुक्रवार को तपोवन सहित शहर के कई स्थानों पर उन पेड़ों का निरीक्षण किया, जिन्हें संभावित रूप से कटाई या स्थानांतरण के लिए चिन्हित किया गया है। भारत के पर्यावरण संरक्षण से जुड़े इस कदम का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि पेड़ों की कटाई कानून के अनुरूप ही हो और आसपास के पर्यावरण पर अनावश्यक दुष्प्रभाव नहीं पड़े।

    जांच का उद्देश्य और पृष्ठभूमि

    यह निरीक्षण उस दिशा-निर्देश के तहत किया गया, जो डीसेंबर 12, 2025 की सुनवाई में NGT ने जारी किया था। इसमें आदेश दिया गया था कि 15 जनवरी 2026 तक बिना वैध अनुमति के कहीं भी किसी भी पेड़ की कटाई नहीं की जाएगी। यह कार्रवाई एक ऐसे मामले से जोड़ी गई है, जिसमें नाशिक नगर निगम (NMC) के तपोवन और आसपास के इलाके में कुछ पेड़ों को हटाने या स्थानांतरित करने के प्रस्ताव को चुनौती दी गई थी।

    जांच टीम में शामिल थे:
    नाशिक नगर निगम के डिप्टी कमिश्नर (गोदावरी सेल)नितिन पवार
    फॉरेस्ट असिस्टेंट कंजरवेटर (नाशिक वेस्ट)प्रशांत खैरनार
    सीनियर MPCB अधिकारीप्रशांत गायकवाड़
    इस दौरान पर्यावरण सक्रियता से जुड़े पेटीशनर श्रीराम पिंगले, पर्यावरणवादियों के साथ कई अन्य लोग भी टीम के साथ मौजूद रहे।

    तपोवन और परियोजनाओं पर निरीक्षण

    समिति ने सबसे पहले तपोवन क्षेत्र का दौरा किया, जहां नाशिक नगर निगम ने साधुग्राम नामक परियोजना के लिए कुछ पेड़ों को हटाने का प्रस्ताव प्रस्तुत किया है। यह परियोजना आगामी सिम्हस्थ कुम्भ मेले 2027 के दौरान साधुओं के ठहरने के लिए जरूरी स्थान तैयार करने की दिशा में है। इसी संदर्भ में पेड़ों पर प्रस्तावित कटाई से स्थानीय पर्यावरण के संतुलन को लेकर विरोध जारी है।

    इसके अलावा, टीम ने उन क्षेत्रों का भी निरीक्षण किया जहां NMC ने दावा किया है कि लगभग 2,500 से अधिक पेड़ लगाए गए हैं — यह प्रयास संभावित पेड़ कटाई का प्रतिशोधात्मक अभियान के तौर पर किया जा रहा है। समिति ने इन नए वृक्षारोपण स्थलों का भी बारीकी से अवलोकन किया।

    आगे का कदम: रिपोर्ट और सुनवाई

    जांच के दौरान समिति के सदस्यों ने करीब दो घंटे विभिन्न स्थलों का दौरा कर विस्तृत जानकारी एकत्र की। अब टीम कुछ दिनों में अपनी निरीक्षण रिपोर्ट तैयार करेगी, जिसे NGT के समक्ष 15 जनवरी 2026 को होने वाली अगली सुनवाई से पहले प्रस्तुत किया जाएगा। यह रिपोर्ट आगे के फैसलों के लिए महत्वपूर्ण आधार प्रदान करेगी।

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