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भारतीय सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने ऑपरेशन सिंदूर और भारत-पाक सीमा हालात पर आज एक महत्वपूर्ण बयान दिया है। वार्षिक प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने कहा कि ऑपरेशन अब भी जारी है और किसी भी उकसावे वाली हरकत का तीव्र और निर्णायक जवाब दिया जाएगा।
सेना प्रमुख ने सीमा पर सुरक्षा स्थिति पर विस्तार से जानकारी देते हुए बताया कि जम्मू-कश्मीर और पश्चिमी मोर्चे पर हालात संवेदनशील लेकिन नियंत्रण में हैं। उन्होंने बताया कि सीज़फायर के बावजूद स्थिति पूरी तरह खत्म नहीं हुई है, और अब भी सीमा के उस पार लगातार सक्रिय आतंकवादी नेटवर्क मौजूद हैं।
आतंकवादी कैंपों पर सतर्क नजर
जनरल द्विवेदी ने कहा कि सीमाअंतर्गत 8 आतंकी ट्रेनिंग कैंप सक्रिय हैं और भारतीय सेना उन पर लगातार नजर रखे हुए है। अगर इन कैंपों से कोई भी उकसावे या हमला करने की कोशिश की गई, तो भारत तेज़ और सख्त कार्रवाई करेगा।
ऑपरेशन सिंदूर का महत्त्व
उन्होंने स्पष्ट किया कि ऑपरेशन सिंदूर सिर्फ एक रणनीति नहीं था, बल्कि भारत की सुरक्षा नीति का विश्वसनीय और निर्णायक जवाब था, जिसमें सेना ने आतंकवादी ढांचे को निशाना बनाते हुए आतंकवाद को समर्थन देने वाले संरचनाओं पर कार्रवाई की थी। ऑपरेशन के दौरान भारतीय सेनाओं की संयुक्त क्षमता – थलसेना, वायुसेना और नौसेना – ने आतंकवादी ठिकानों पर प्रभावी ढंग से कार्रवाई की।
भारत की सजगता और तैयारी
आर्मी चीफ ने यह भी कहा कि भारतीय सेना हर परिस्थिति से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार है। उन्होंने पाकिस्तानी पक्ष को चेतावनी देते हुए कहा कि यदि कोई “गलती” या उकसावे वाली हरकत हुई, तो उसे “कड़ा और निर्णायक” जवाब मिलेगा।
सीमा पर दशा पर निगरानी जारी
जनरल द्विवेदी ने कहा कि भारत-चीन सीमा पर हालात स्थिर हैं, लेकिन सतर्कता बनाए रखना आवश्यक है। वहीं जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद पर नियंत्रण बना हुआ है और पिछले साल में दर्ज आतंकवादी गतिविधियों में कमी आई है।
पृष्ठभूमि: ऑपरेशन सिंदूर को मई 2025 में पहल्गाम आतंकवादी हमला का जवाब देने के लिए शुरू किया गया था, जिसमें आतंकियों और आतंक संरचना पर सटीक हमले शामिल थे। यह भारत की आतंकवाद विरोधी राजनीति और सीमापार सुरक्षा के प्रति उसके रुख को दर्शाता है।








