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आगामी बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) चुनाव 2026 से पहले सियासत और गरमा गई है, जब महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) प्रमुख राज ठाकरे ने एक रैली में पुराना विवादित नारा “Hatao Lungi, Bajao Pungi” (लुंगी हटाओ, पुंगी बजाओ) दोबारा से उछाला, जिसने भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेताओं की तीखी प्रतिक्रिया और आलोचना को जन्म दिया है।
राज ठाकरे ने दादर के शिवतिरथा में आयोजित रैली में **बीजेपी के तमिलनाडु के नेता के. अन्नामलाई को निशाना बनाते हुए कहा कि उन्होंने मुंबई को “केवल महाराष्ट्र का शहर नहीं बल्कि अंतरराष्ट्रीय शहर” बताया, जो महाराष्ट्र की पहचान के खिलाफ है।
ठाकरे ने अन्नामलाई को मज़ाक में ‘रसमलाई’ कहते हुए कहा, “एक रसमलाई तमिलनाडु से आया… आपका यहाँ क्या संबंध है? हटाओ लुंगी, बजाओ पुंगी।” यह नारा मूल रूप से 1960-70 के दशक में शिवसेना के ‘सन्स ऑफ द सॉइल’ आंदोलन का हिस्सा था, जिसमें स्थानीय मराठी लोगों की राजनीतिक पहचान को उभारने के लिए नारेबाजी और ‘आउटसाइडर्स’ के खिलाफ उकसावे वाली राजनीति शामिल थी।
इस बयान के बाद बीजेपी-MNS-शिवसेना के बीच तीखी प्रतिक्रियाओं का दौर चल पड़ा। अन्नामलाई ने पलटवार करते हुए कहा कि वह मुंबई ज़रूर आएँगे, और यदि कोई उन्हें रोकने की कोशिश करे तो उन्हें रोकने वालों को चुनौती दी है। उन्होंने यह भी कहा कि उनके खिलाफ चेतावनियाँ उन्हें डराएँगी नहीं बल्कि गर्व की बात हैं।
राज ठाकरे और शिवसेना (UBT) {उद्धव ठाकरे की शिवसेना} ने मिलकर कहा है कि महाराष्ट्रियों की पहचान और अधिकारों को बचाना उनका लक्ष्य है और आगामी BMC चुनाव “मराठी लोगों के लिए आख़िरी लड़ाई” है।
विश्लेषकों के अनुसार, यह नारा और बयानबाज़ी BMC चुनावों से पहले ‘मराठी मानुष’ के मुद्दे को उभारने की रणनीति का हिस्सा हैं, जबकि बीजेपी अपनी ओर से मुंबई के विविध समुदायों में वोट बैंक बनाने की कोशिश कर रही है।








