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  • भारत ने G7 क्रिटिकल मिनरल वार्ता में हिस्सा लिया, चीन पर निर्भरता कम करने की रणनीति पर चर्चा

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    भारत ने वॉशिंगटन में अमेरिका द्वारा आयोजित उच्च‑स्तरीय वार्ता में हिस्सा लिया, जहाँ क्रिटिकल मिनरल (महत्वपूर्ण खनिज) आपूर्ति शृंखलाओं को अधिक सुरक्षित और विविध बनाने पर चर्चा हुई — एक पहल जिसमें G7 देशों के साथ‑साथ भारत और ऑस्ट्रेलिया को भी आमंत्रित किया गया है। बैठक का लक्ष्य चीन के संसाधन नियंत्रण पर निर्भरता कम करना और साझा रणनीतियाँ विकसित करना था।

    भारतीय प्रतिनिधि के रूप में रेल, सूचना‑प्रसारण, इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बैठक में भाग लिया और कहा कि सुरक्षित और विविध क्रिटिकल मिनरल सप्लाई चेन भारत के Viksit Bharat के लक्ष्यों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। उनका मानना है कि यह सहयोग भारत की निर्माण क्षमता, इलेक्ट्रॉनिक्स और उन्नत तकनीकी उद्योगों को अधिक लचीला और आत्मनिर्भर बनाएगा।

    वार्ता का पृष्ठभूमि और उद्देश्य
    यह बैठक G7 (ग्रुप ऑफ़ सेवन) — जिसमें अमेरिका, ब्रिटेन, जापान, फ्रांस, जर्मनी, इटली, कनाडा और यूरोपीय संघ शामिल हैं — के वित्त मंत्रियों की बैठक के साथ आयोजित हुई। भारत और ऑस्ट्रेलिया को भी आमंत्रित करके अमेरिका ने इन चर्चाओं को महत्वपूर्ण खनिजों की आपूर्ति शृंखलाओं को चीन से व्यापक रूप से स्वतंत्र और सुरक्षित बनाने की दिशा में विस्तारित किया है।

    चीन का प्रभुत्व और चिंता
    अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी के आंकड़ों के अनुसार, चीन दुनिया भर के महत्वपूर्ण खनिजों के लगभग 70% प्रसंस्करण क्षमता पर नियंत्रण रखता है — जिनमें ताम्बा, लिथियम, निकल, कोबाल्ट, ग्रेफाइट और दुर्लभ पृथ्वी तत्व शामिल हैं — जो उच्च‑प्रযুক্তियों, बैटरियों, रिन्यूएबल ऊर्जा और रक्षा उत्पादन में उपयोग होते हैं। इस एकाग्रता ने आपूर्ति शृंखलाओं को रणनीतिक रूप से संवेदनशील बना दिया है।

    इस पहल के माध्यम से अमेरिका अन्य प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं और भागीदारों के साथ मिलकर विविध, सुरक्षित और भरोसेमंद खनिज आपूर्ति शृंखलाएँ विकसित करने की कोशिश कर रहा है, ताकि भविष्य में वैश्विक तकनीक, ऊर्जा संक्रमण और रक्षा आवश्यकताओं को स्थिर आपूर्ति सुनिश्चित हो सके।

    भारत की भूमिका और आगे की राह
    भारत की भागीदारी न सिर्फ आपूर्ति शृंखला के जोखिमों को कम करने की दिशा में एक कदम है, बल्कि इससे भारत‑अमेरिका तकनीकी और आर्थिक सहयोग को और मजबूती मिलने की संभावना है। भारत अगले महीनों में और वार्ताओं में भी सक्रिय रूप से शामिल रहेगा, जैसे कि Artificial Intelligence Impact Summit से पहले और US‑spearheaded चर्चाओं में।

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