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राज्य में प्राथमिक शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाने के उद्देश्य से ‘निपुण महाराष्ट्र’ अभियान को नाशिक में प्रभावी रूप से लागू किया जा रहा है। इस अभियान के तहत दुसरी से पांचवीं कक्षा के विद्यार्थियों में वाचन, लेखन, संख्याज्ञान और संख्याओं पर कार्य जैसी मूलभूत अध्ययन क्षमताओं को विकसित करने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
जिल्हा परिषद द्वारा उन छात्रों पर विशेष नजर रखी जा रही है जिनकी अध्ययन प्रगति अपेक्षित स्तर से पीछे है, ताकि हर विद्यार्थी को निपुण बनने में मदद मिल सके। इसके लिए प्रभावी क्रियाकलापों का आयोजन किया जा रहा है और प्रत्येक तालुक्यातील प्रमुख शाळाओं में छात्रों की प्रगति प्रत्यक्ष रूप से आंका जा रहा है।
सीधी बातचीत और मूल्यांकन प्रक्रिया
अभियान की शुरुआत शिक्षण मंत्री दादा भुसे ने नाशिक के गायदरा और वडगाव प्राथमिक शाळाओं में जाकर प्रत्यक्ष संवाद के साथ की। उन्होंने विद्यार्थियों को वाचन, लेखन और सरल गणितीय प्रश्नों के माध्यम से अभ्यास करते देखा और उनकी क्षमताओं का आकलन किया।
इस दौरान जिल्हा परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी ओमकार पवार, उपशिक्षणाधिकारी भास्कर कनोज और सहायक प्रशासन अधिकारी महेंद्र पवार भी मौजूद रहे। शिक्षा अधिकारियों ने बताया कि मूलभूत कौशलों में कमियों के कारण छात्रों की आगे की शिक्षा प्रभावित होती है, इसलिए अभियान के जरिये सुधार पर ध्यान केंद्रित किया जा रहा है।
शिक्षक-पालक-प्रशासन की साझेदारी
अभियान के तहत यह भी कहा गया है कि कठिनाइयों से जूझ रहे छात्रों को पीछे नहीं छोड़ा जायेगा और शिक्षक, अभिभावक तथा प्रशासन को मिलकर समन्वित प्रयास करना आवश्यक है। प्रत्येक विद्यार्थी की क्षमता के अनुसार शिक्षण पद्धति अपनाई जाएगी और उपलब्ध शैक्षणिक संसाधनों का प्रभावी उपयोग सुनिश्चित किया जायेगा।
उद्देश्य और उम्मीदें
‘निपुण महाराष्ट्र’ अभियान का मूल लक्ष्य है कि प्राथमिक स्तर पर ही छात्रों को पाठन-पाठन के मूलभूत कौशल में दक्ष बनाया जाये, ताकि वे आगे की पढ़ाई के लिए मजबूत आधार तैयार कर सकें। यह कदम शैक्षणिक विकास और गुणवत्ता शिक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण प्रयास माना जा रहा है।








