अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत को गाज़ा के लिए प्रस्तावित “बोर्ड ऑफ पीस” (Board of Peace) में भाग लेने के लिए औपचारिक रूप से आमंत्रित किया है। यह पहल गाज़ा में युद्ध के बाद शासन, पुनर्निर्माण और स्थायी शांति स्थापित करने के लिए बनाई गई एक अंतरराष्ट्रीय संस्था का हिस्सा है।
क्या है “बोर्ड ऑफ पीस”?
ट्रंप प्रशासन ने इसे गाज़ा संघर्ष समाधान और भविष्य में वैश्विक संघर्षों को शांत करने के लिए एक नई तरह की अंतरराष्ट्रीय निकाय के रूप में पेश किया है। इसका उद्देश्य युद्ध की विभीषिका से उबर रहे गाज़ा में शासन व्यवस्था, सुरक्षा बल तैनात करना, हमास का विमूलन और पुनर्निर्माण को सुचारू रूप से लागू करना बताया जा रहा है।
क्या कहा गया अमेरिका के पत्र में
व्हाइट हाउस द्वारा भेजे गए निमंत्रण में राष्ट्रपति ट्रंप ने लिखा है कि भारत को इस ऐतिहासिक प्रयास का हिस्सा बनने के लिए आमंत्रित करना “उनके लिए अत्यंत सम्मान की बात” है। उन्होंने इसे मध्य पूर्व में शांति को मजबूती देने और वैश्विक संघर्षों के समाधान के लिए एक साहसी दृष्टिकोण बताया है।
वैश्विक प्रतिक्रिया
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इस बोर्ड का गठन 20-बिंदु शांति योजना का हिस्सा है, जिसे ट्रंप ने गाज़ा संघर्ष को समाप्त करने के लिए पेश किया था।
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लगभग 60 देशों को आमंत्रण भेजा गया है, जिनमें भारत सहित ऑस्ट्रेलिया, जॉर्डन, ग्रीस, साइप्रस और पाकिस्तान भी शामिल हैं। कुछ देशों ने इसे स्वीकार कर लिया है जबकि कई देशों ने अभी तक प्रतिक्रिया नहीं दी है।
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हालांकि, इज़राइल ने इस बोर्ड की संरचना और कुछ देशों के शामिल होने पर आलोचना भी की है, क्योंकि कुछ हिस्सों को उसने अपनी नीति के विपरीत बताया है।
भारत की भूमिका
भारत को इस तरह के शांति प्रयास में शामिल करना, प्रचारित रूप से उसकी वैश्विक कूटनीतिक भूमिका और दोनों पक्षों (इज़राइल और फिलिस्तीन) के साथ लंबे समय से संतुलित संबंधों की वजह से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। भारत ने पहले ही गाज़ा में मानवीय सहायता भेजी है और संघर्ष समाधान तथा क्षेत्रीय स्थिरता के समर्थन में अपनी पहलें जारी रखी हैं।
अभी यह तय नहीं हुआ है कि भारत इस प्रस्ताव को स्वीकार करेगा या नहीं, क्योंकि विदेश मंत्रालय ने इस बारे में कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं की है।








