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नाशिक-पुणे हाई-स्पीड रेल प्रोजेक्ट के मार्ग को शिर्डी की ओर मोड़ने के निर्णय के विरोध में सिन्नर (तालुका) के निवासियों और रेल्वे क्रिया समिति ने जोरदार विरोध तेज कर दिया है। इस आंदोलन को सांसद सत्यजित तांबे ने खुलकर समर्थन देने का ऐलान किया है, जिससे स्थानीय लोगों को बड़ी राजनीतिक ताकत का साथ मिला है।
रेलवे क्रिया समिति का कहना है कि प्रस्तावित नया मार्ग पुणे-अहिल्यानगर-पुणतांबा-शिर्डी-नाशिक के बजाय मूल और सीधा नाशिक-सिन्नर-अकोले-संगमनेर-नारायणगाव-राजगुरुनगर-चाकण मार्ग पर ही होना चाहिए। इसी के समर्थन में उन्होंने 31 जनवरी को समृद्धी और नाशिक-पुणे राजमार्ग पर रास्ता रोको आंदोलन का इशारा भी दिया है।
सत्यजित तांबे ने समिति से मिलकर आंदोलन में अपने समर्थकों के साथ शामिल होने का आश्वासन दिया है और लोगों से भी जनहाड़ आन्दोलन में भाग लेने का आग्रह किया है। समिति के सदस्यों का कहना है कि यह रेल मार्ग किसानों, व्यापारियों, छात्रों तथा रोज़मर्रा के यात्रियों के लिये बेहद महत्वपूर्ण है, इसलिए इस बदलाव को वापस लिया जाना चाहिए।
समिति ने कई गांवों में जाकर जनता को जागरूक किया है। इसमें विधानसभा क्षेत्र के कई हिस्सों के ग्रामीणों, छात्रों और व्यापारियों ने समर्थन भी जताया है। उनके अनुसार, मूल मार्ग से रेल लाइन से यातायात आसान, रोजगार और सेवाओं तक पहुंच बढ़ेगी, जबकि शिर्डी मार्ग चुनने से दूरी बढ़ने और सुविधा कम होने जैसी समस्याएँ सामने आ सकती हैं।
आंदोलन के लिये वावी पुलिस थाने में आवेदन भी दिया गया है। समिति का विश्वास है कि इस आंदोलन में 10,000 से अधिक लोग भाग लेंगे और यह मुद्दा सरकार तक पहुंचेगा। स्थानीय नेताओं और नागरिकों ने बिहार रास्ता रोको आंदोलन के लिए तैयारियां तेज कर दी हैं।








