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भारत और कनाडा ने आज ऊर्जा क्षेत्र में द्विपक्षीय सहयोग को फिर से सक्रिय करने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है, जिसमें दोनों देश तेल, गैस और पेट्रोलियम उत्पादों के व्यापार को बढ़ाने का संकल्प ले रहे हैं। यह घोषणा India Energy Week के मौके पर हुई, जहाँ दोनों देशों के ऊर्जा मंत्री — कनाडा के Tim Hodgson और भारत के Petroleum & Natural Gas Minister हरदीप सिंह पुरी — ने ऊर्जा सहयोग संवाद को पुनर्जीवित करने पर सहमति जताई।
इस नए समझौते के तहत:
🔹 कनाडा भारत को क्रूड तेल (कच्चा तेल), तरलीकृत प्राकृतिक गैस (LNG) और LPG जैसे ऊर्जा स्रोत की निर्यात क्षमता बढ़ाने का प्रयास करेगा।
🔹 भारत कनाडा को अधिक परिष्कृत पेट्रोलियम उत्पाद भेजने में सहयोग करेगा।
यह कदम दोनों देशों के बीच पिछली कुछ समय की राजनयिक खटास के बाद संबंधों को फिर से मजबूत करने की दिशा में अहम माना जा रहा है। इसी बातचीत के दौरान दोनों मंत्रियों ने वैश्विक ऊर्जा मांग और निवेश को साझा करने के विकल्पों पर भी चर्चा की, जिसमें हाइड्रोजन, बायोफ्यूल, बैटरी स्टोरेज, महत्वपूर्ण खनिज (critical minerals) और ऊर्जा उद्योग में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) जैसे क्षेत्र शामिल हैं।
पक्षों ने यह भी कहा कि “मिनिस्टरियल एनर्जी डायलॉग” — जो पहले दोनों देशों में ऊर्जा सहयोग का मुख्य मंच था — को गोगा (Goa) में आयोजित India Energy Week के दौरान पुनर्जीवित किया जाएगा, ताकि दीर्घकालिक ऊर्जा साझेदारी को प्रभावी रूप से चलाया जा सके।
कनाडा के प्रधानमंत्री Mark Carney की भारत यात्रा की भी संभावना जताई जा रही है, जिसमें ऊर्जा के अलावा यूरेनियम, खनिज, प्रौद्योगिकी और व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौतों पर बातचीत होने की उम्मीद है।
विश्लेषकों के मुताबिक यह पहल उस समय में आई है जब कनाडा अपनी ऊर्जा निर्यात आधारित अर्थव्यवस्था को विविध बनाना चाहता है, खासकर यूएस के साथ बढ़ते व्यापार तनाव के बीच। वहीं भारत की बढ़ती ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए साझेदारों का विस्तार करना भी रणनीतिक प्राथमिकता है।








