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भारत और यूरोपीय संघ (EU) ने 27 जनवरी 2026 को एक बड़ा मुक्त व्यापार समझौता (Free Trade Agreement – FTA) घोषित किया, जिसे EU कमिशन की प्रमुख Ursula von der Leyen ने “Mother of All Deals” यानी सबसे बड़े व्यापारिक समझौते के रूप में बताया। यह घोषणा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और EU के शीर्ष अधिकारियों की उपस्थिति में हुई।
Ursula von der Leyen ने कहा कि यह समझौता दो विशाल आर्थिक क्षेत्रों — भारत और EU के बीच विन-विन साझेदारी का नया अध्याय है। उनके अनुसार यह व्यापारिक समझौता लगभग 4 अरब यूरो के आयात शुल्क को कम या समाप्त करेगा, जिससे दोनों तरफ के व्यवसायों को बड़ा लाभ मिलेगा और आपूर्ति श्रृंखलाएँ और मजबूत होंगी।
प्रधानमंत्री मोदी ने इस समझौते को भारत के इतिहास का सबसे बड़ा फ्री ट्रेड एग्रीमेंट बताया और कहा कि यह साझा समृद्धि के लिए एक नई रूपरेखा प्रस्तुत करता है। उन्होंने जोर देकर कहा कि यह “सिर्फ एक व्यापार समझौता नहीं बल्कि दोनों साझेदारों के लिए विकास और निवेश के नए अवसर खोलने वाला मंच” है।
समझौते के प्रमुख फ़ायदे
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लगभग 99% भारतीय निर्यात मूल्य वाले माल EU में बिना कस्टम ड्यूटी के प्रवेश करेंगे, जिससे भारत के वस्त्र, चमड़ा, समुद्री उत्पाद और रत्न-गहने जैसे श्रेणियों को विशेष लाभ मिलेगा।
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EU पक्ष भी अपने उत्पादों के लिए भारत में टैरिफ कम या समाप्त करेगा, जिससे मशीनरी, रसायन तथा औद्योगिक सामान की प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी।
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भारत और EU के बीच व्यापार का दायरा लगभग 2 अरब लोगों और विश्व GDP के करीब 25% पर पहुँच जाएगा।
आगे की प्रक्रिया
यह समझौता फिलहाल घोषणा-स्तर पर हुआ है। दोनों पक्षों के कानूनी परीक्षण और अनुमोदन (नीतिगत वैधता जांच) के बाद यह औपचारिक रूप से सही होने में लगभग 5–6 महीने और लग सकते हैं। इसके बाद यह 2027 तक अमल में आ सकता है।
विश्लेषकों का मानना है कि यह समझौता न सिर्फ भारत-EU आर्थिक साझेदारी को गहरा करेगा, बल्कि वैश्विक व्यापार व्यवस्था में नई गतिशीलता भी लाएगा, खासकर ऐसे समय में जब दुनिया भर में व्यापारिक रुकावटें और संरक्षणवादी कदम उठाये जा रहे हैं।








