वर्धा की प्रसिद्ध नृत्य शिक्षिका और स्पंदन इन्स्टिट्यूट ऑफ़ परफॉर्मिंग आर्ट्स की संस्थापक ने अपने जीवन और संघर्ष की कहानी साझा की, जो प्रेरणा और साहस की जीवंत मिसाल है।
उनकी ज़िन्दगी के चार पंक्तियों में उनकी जिद, आत्मविश्वास और न थकने की वृत्ति का पूरा सार समाहित है:
“उड़त्या पाखरांना परतीची तमा नसावी,
नजरेत सदैव नवी दिशा असावी,
घरट्याचे काय आहे हो, बांधता येईल केव्हाही,
पण क्षितिजापलीकडे झेप घेण्याची जिद्द असावी।”
बचपन से ही उनका नृत्य के प्रति आकर्षण बेहद गहरा था। मात्र पांच वर्ष की उम्र में ही उन्होंने दूरदर्शन पर बज रहे गानों पर सहज नृत्य करना शुरू कर दिया। संगीत सुनते ही उनका शरीर अपने आप झूम उठता—नृत्य उनके लिए जीवन की प्राकृतिक अभिव्यक्ति बन गया।
इयत्ता नवमी में उन्होंने अपने खुद के नृत्य क्लास का खाका तैयार किया और ठान लिया कि नृत्य ही उनका करियर बनेगा। अठारह वर्ष की उम्र में नागपुर में कथ्थक नृत्य में औपचारिक प्रशिक्षण लिया और ‘कथ्थक विशारद’ की डिग्री प्राप्त की।
सन 2007 में उन्होंने स्पंदन इन्स्टिट्यूट ऑफ़ परफॉर्मिंग आर्ट्स की स्थापना की, जहां शुरू में प्रति छात्र केवल डेढ़ सौ रुपये शुल्क था। सीमित संसाधनों के बावजूद उन्होंने अपने सपनों को जीवंत किया। 2015 में अपने आत्मविश्वास और समर्पण के बल पर उन्होंने इसे भव्य नृत्य और फिटनेस स्टूडियो में बदल दिया।
अपने स्टूडियो के माध्यम से उन्होंने महिलाओं को न केवल नृत्य सिखाया, बल्कि उन्हें तनाव और थकान से मुक्त होकर जीवन का आनंद लेने का अवसर भी दिया। वे झुंबा इंस्ट्रक्टर भी बनीं और इंटरनेशनल योगा लेवल 1 और 2 की डिग्री भी हासिल की।
उनके प्रशिक्षण ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी पहचान दिलाई। अमेरिका, यूके और स्विट्ज़रलैंड में उन्होंने ऑनलाइन कक्षाओं के माध्यम से छात्रों तक अपनी कला का विस्तार किया। उनके स्टूडियो में कथ्थक के साथ-साथ वेस्टर्न डांस, फैशन शो, मॉडलिंग, डांस वर्कशॉप्स और गरबा इवेंट्स भी आयोजित किए जाते हैं।
उनके प्रयासों को लोकमत सखी मंच और ‘वर्धा बेस्ट कोरियोग्राफर अवार्ड’ जैसे पुरस्कारों से सम्मानित किया गया। उनकी प्रेरणा और संघर्ष की कहानी इसलिए और भी प्रेरक है क्योंकि पांच वर्ष की उम्र में उन्होंने ओपन हार्ट सर्जरी का सामना किया, बावजूद इसके कभी पीछे नहीं हटी।
आज उनका स्टूडियो लाखों विद्यार्थियों के लिए एक मंच बन गया है। उनका संदेश है कि हर महिला को अपनी जिद और आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ना चाहिए, क्योंकि थम जाना जीवन का अंत नहीं, बल्कि संघर्ष जारी रखने से ही सफलता मिलती है।
“थांबला तो संपला, धावत्याला शक्ती येते आणि रस्ता आपोआप सापडतो।”
स्पंदन इन्स्टिट्यूट की संस्थापक ने यह साबित किया कि संघर्ष, मेहनत और आत्मविश्वास से कोई भी सपना वास्तविकता बन सकता है।
सम्मान और पहचान
माधवी पवार की इस शानदार उपलब्धि को “Maharashtra Business Icon 2025 / Maharashtra Style Icon 2025 / Maharashtra Fashion Icon 2025” जैसे प्रतिष्ठित पुरस्कारों के लिए चुना गया है। यह सम्मान Reseal.in और India Fashion Icon Magazine द्वारा उन उभरते उद्यमियों और रचनात्मक प्रतिभाओं को प्रोत्साहित करने के लिए दिया जाता है, जिन्होंने अपने क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान दिया है।
भव्य पुरस्कार समारोह
इस पुरस्कार समारोह में कई प्रसिद्ध फिल्मी हस्तियाँ शामिल होंगी:
⭐ वर्षा उसगांवकर – बॉलीवुड अभिनेत्री
⭐ सोनाली कुलकर्णी – भारतीय अभिनेत्री
⭐ प्रार्थना बेहेरे – भारतीय अभिनेत्री
यह आयोजन श्री सुधीर कुमार पठाडे, Founder & CEO, Sure Me Multipurpose Pvt. Ltd. (Reseal.in) के नेतृत्व में आयोजित किया जाएगा, जो महाराष्ट्र के उद्यमियों और प्रतिभाओं को राष्ट्रीय मंच देने के लिए कार्यरत हैं










