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पारंपरिक भारतीय सिल्क और नेक टेक्सटाइल अब ग्लोबल फैशन सीन में मजबूत इम्पैक्ट छोड़ रहे हैं — खासकर नॉर्थईस्टर्न सिल्क और हैंडलूम से जुड़े डिज़ाइनों के माध्यम से, जो अब भारत‑यूरोप फैशन ट्रेंड का हिस्सा बन रहे हैं।
🔹 Eri सिल्क का अंतरराष्ट्रीय मंच पर पहचान — भारत‑EU के बीच हाल ही में हुए मुक्त व्यापार समझौते के तहत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और यूरोपीय कमीशन की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने नॉर्थईस्टर्न Eri सिल्क के स्टोल पहने — यह सिल्क पारंपरिक रूप से अहिंसा सिल्क (जहाँ सिल्क‑कीड़ों को नुकसान नहीं पहुंचाया जाता) के नाम से जाना जाता है और इसे जीआइ टैग के साथ मान्यता मिली है। यह सिल्क पर्यावरण‑संतुलित उत्पादन, कोमलता और टिकाऊ फैशन का प्रतीक भी बन रहा है।
🔹 भारतीय सिल्क के अंतरराष्ट्रीय फैशन प्रभाव — भारतीय सिल्क का प्रभाव अकेले अ̂Eri तक सीमित नहीं रहा; देश की सिल्क व ब्रोकेड परंपरा, जैसे बनारसी ब्रोकेड, यूरोपीय मेज़बानों की स्टाइलिस्टिक पसंद बनते दिख रहे हैं। यूरोपीय नेताओं द्वारा बनारसी सिल्क जैकेट के रूप में पहनी गई पारंपरिक कला ने भी भारत‑यूरोप की सांस्कृतिक संयोजन की बात को फैशन के ज़रिये उजागर किया है।
🔹 नॉर्थ‑ईस्ट की हैंडलूम पहचान — भारत के पूर्वोत्तर क्षेत्र के पारंपरिक सिल्क — जैसे Eri, Muga और Pat सिल्क — का उपयोग सदियों से स्थानीय परंपरा और औपचारिक पहनावे में होता रहा है, और अब ये सिल्क आधुनिक फैशन डिज़ाइनों और ग्लोबल रनवे में भी अपना स्थान बना रहे हैं। उदाहरण के लिए Mekhela Chador जैसे पारंपरिक सिल्क परिधान आज फैशन डिजाइनरों द्वारा नए कट्स, आधुनिक सिल्हूट और अंतरराष्ट्रीय रुझानों के साथ पेश किए जा रहे हैं।
🔹 कापरिवर्तन का सांस्कृतिक संदेश — यह फैशन इम्पैक्ट केवल शैली का नहीं, बल्कि भारत‑यूरोप के सांस्कृतिक और आर्थिक रिश्तों का प्रतीक भी माना जा रहा है, जहाँ वस्त्र कला को कूटनीति और सांस्कृतिक आदान‑प्रदान का हिस्सा बनाया जा रहा है।








