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भारत का संघीय बजट 2026‑27 जलवायु परिवर्तन और हरित विकास को ध्यान में रखते हुए पेश किया गया, लेकिन आलोचकों का कहना है कि इरादा भले ही महत्त्वाकांक्षी दिखता हो, पर वास्तविक परिणाम और वित्तीय समर्थन अपेक्षानुसार नहीं है।
विश्लेषकों के अनुसार, इस बजट ने कार्बन उत्सर्जन को कम करने, साफ़ ऊर्जा परियोजनाओं का विस्तार, और डीकार्बोनाइजेशन प्रौद्योगिकियों में निवेश जैसे क्षेत्रों को रेखांकित किया है। प्रमुख निवेशों में कार्बन कैप्चर, उपयोग तथा भंडारण (CCUS) के लिए अगले पाँच वर्षों में ₹20,000 करोड़ का आवंटन शामिल है — जो विशेष रूप से ऊर्जाशील औद्योगिक क्षेत्रों में उत्सर्जन घटाने का लक्ष्य रखता है।
बजट ने PM सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना के आवंटन को भी बढ़ाया है, जिससे सौर ऊर्जा के स्थानीय उत्पादन और वितरण को बढ़ावा मिलेगा, जबकि कुछ मौजूदा योजनाओं के लिए राशि को बनाए रखा गया है। हालांकि, संपादकीय में यह भी कहा गया है कि न्यूक्लियर ऊर्जा और ग्रीन हाइड्रोजन जैसी पहलों के लिए दी गई बजटीय सहायता अपेक्षित स्तर पर पूर्ण रूप से खर्च नहीं हो सकती, जिससे नीति और क्रियान्वयन के बीच का अंतर स्पष्ट होता है।
कुल मिलाकर, भारत का 2026‑27 का जलवायु बजट “इरादे में बड़ा, परिणाम में चुनौतीपूर्ण” स्थिति का संकेत देता है — जहाँ नीति की दिशा तो स्पष्ट है, पर उसका प्रभावी क्रियान्वयन और पर्याप्त वित्तीय समर्थन अभी भी मुख्य प्रश्न बने हुए हैं।








