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केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय राजमार्गों (National Highways) और राष्ट्रीय एक्सप्रेसवे पर टोल (यात्री शुल्क) के नियमों में बदलाव किया है, जो 15 फ़रवरी 2026 से लागू हो रहा है। इसके ज़रिये टोल दरों में राहत मिलने की उम्मीद है और यात्रियों के लिए सफर सस्ता और आसान होगा।
क्या बदलाव हुआ है?
🔹 पहले यदि कोई राष्ट्रीय एक्सप्रेसवे पूरा नहीं खुला था, तब भी यात्रियों को उस हिस्से के लिए 25% अधिक (प्रिमियम) टोल देना पड़ता था।
🔹 अब नए नियम के तहत, अगर एक्सप्रेसवे पूरी तरह operational (पूरी तरह खुला) नहीं है, तो यात्रियों को केवल उस हिस्से के लिए टोल देना होगा जो तैयार और चालू है, और वो भी साधारण राष्ट्रीय राजमार्ग (NH) के टोल दर पर, न कि एक्सप्रेसवे के ऊँचे दर पर।
कब तक लागू रहेगा बदलाव?
– यह नया नियम एक साल तक या तब तक लागू रहेगा जब तक एक्सप्रेसवे पूरी तरह operational नहीं हो जाता, जो भी पहले हो।
क्यों किया गया यह बदलाव?
सरकार का कहना है कि इससे यात्रियों और लॉजिस्टिक्स वाहनों को लागत में राहत मिलेगी, और लोग नए खुले एक्सप्रेसवे के चालू हिस्सों का उपयोग ज़्यादा करेंगे। इससे पुराने राष्ट्रीय राजमार्गों पर भीड़ और ट्रैफ़िक जाम कम होगा, जिससे यातायात तेज़, लॉरी-बसों का तेज़ी से मूवमेंट और पर्यावरण में धुंआ-प्रदूषण में कमी आने की उम्मीद है।
यात्रियों के लिए फायदा
✔️ अधूरे एक्सप्रेसवे पर अब कम टोल लगेगा।
✔️ केवल उस हिस्से के लिए शुल्क, जो आशाजनक रूप से तैयार और चालू है।
✔️ ट्रक, बस और कार चालक को यात्रा लागत में राहत मिलेगी और सफर ज़्यादा किफ़ायती होगा।
इस बदलाव से उन लोगों को खास लाभ मिलेगा जो निर्माणाधीन एक्सप्रेसवे के तैयार हिस्सों का उपयोग करते हैं, क्योंकि अब महंगा प्रीमियम टोल नहीं देना होगा जब तक एक्सप्रेसवे पूरी तरह ख़ुला नहीं है।








