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अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी NASA ने अपने पूनः उपयोग किए जाने वाले मानवयुक्त चंद्र मिशन Artemis II के लिए एक महत्वपूर्ण परीक्षण किया है, जिसे “कॉनफिडेंस टेस्ट (Vehicle Confidence Test)” कहा जाता है। यह कदम मून के चारों ओर सर्कल उड़ान और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए मिशन के लॉन्च से पहले लिया गया है।
यह टेस्ट 12 फरवरी, 2026 को किया गया, जिसमें Space Launch System (SLS) रॉकेट के मुख्य हिस्से — कोर स्टेज में लिक्विड हाइड्रोजन का हिस्सा भरा गया और उस हिस्से में नए लगाए गए सील्स की क्षमता का मूल्यांकन किया गया। इससे यह पता चलता है कि रॉकेट के प्रणालियाँ वास्तविक उड़ान की तैयारी के लिए कितनी तैयार हैं।
टेस्ट के दौरान कुछ ग्राउंड सपोर्ट उपकरणों (स्थायी जमीन से जुड़े उपकरण) में समस्या आई, जिससे रॉकेट में हाइड्रोजन का बहाव थोड़ा कम हुआ। फिलहाल NASA के इंजीनियर्स इस डेटा की गहन समीक्षा कर रहे हैं और अगले चरण के लिए दूसरा “वेट ड्रेस रिहर्सल” टेस्ट इस महीने आयोजित करने की योजना बना रहे हैं। मार्च को अब संभावित लॉन्च का पहला समय-सीमा माना जा रहा है।
यह परीक्षण NASA के लिए बेहद महत्वपूर्ण था, क्योंकि यह पहली बार होगा जब मानवयुक्त मिशन Artemis II के लिए जीवन-समर्थन और गहन अंतरिक्ष प्रणालियों के परीक्षण होंगे। पिछले मिशन Artemis I में यह उड़ान बिना मनुष्यों के की गई थी, लेकिन इस बार चार अंतरिक्ष यात्री चंद्रमा के चारों ओर जाकर वापस आने वाले हैं।
NASA के इस मिशन में SLS रॉकेट और Orion अंतरिक्ष यान का उपयोग होगा, जो अब तक का सबसे बड़ा और उन्नत मानवयुक्त अंतरिक्ष वाहन है। यह मिशन NASA के चंद्र सतह पर उतरने और दीर्घकालिक शोध के लक्ष्य की ओर एक बड़ा कदम माना जा रहा है।








