भारतीय क्रिकेट इतिहास के महानतम खिलाड़ियों में गिने जाने वाले Sachin Tendulkar के संन्यास को लेकर एक बड़ा खुलासा सामने आया है। पूर्व चयन समिति अध्यक्ष Sandeep Patil ने बताया कि एक समय बीसीसीआई चयन समिति ने सचिन से साफ शब्दों में कहा था कि अब टीम को उनके विकल्प के बारे में भी सोचना होगा।
पाटिल के अनुसार यह बातचीत साल 2012 के आसपास हुई थी, जब सचिन तेंदुलकर अपने करियर के आखिरी दौर में थे और उनका प्रदर्शन पहले जैसा नहीं रहा था।
2011 में भारत को विश्व कप जिताने के बाद सचिन का प्रदर्शन धीरे-धीरे गिरने लगा था। इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलिया के दौरों पर भारतीय टीम को 0-4 से हार का सामना करना पड़ा और सचिन भी अपेक्षित प्रदर्शन नहीं कर पाए।
इसके बाद घरेलू सीरीज में भी उनका बल्ला ज्यादा नहीं चला। ऐसे में चयनकर्ताओं के सामने टीम में नए खिलाड़ियों को मौका देने का सवाल उठने लगा।
संदीप पाटिल ने बताया कि इंग्लैंड के खिलाफ नागपुर टेस्ट के बाद उन्होंने सचिन से मुलाकात की थी। उस समय वह बीसीसीआई की चयन समिति के अध्यक्ष थे और टीम के भविष्य को लेकर स्पष्ट चर्चा करना चाहते थे।
उन्होंने सचिन से सीधे पूछा कि उनके आगे के करियर की क्या योजना है। पाटिल ने कहा कि चयन समिति को लग रहा था कि अब टीम को अगले विकल्प की भी तलाश करनी चाहिए।
पाटिल के मुताबिक जब उन्होंने यह बात सचिन से कही तो वह काफी हैरान रह गए थे। सचिन ने उनसे पूछा, “क्यों?”
पाटिल ने जवाब दिया कि चयन समिति का मानना है कि अब उनके विकल्प के बारे में भी सोचना जरूरी है। इस पर सचिन ने दोबारा फोन कर पूछा, “क्या आप सच में यह कह रहे हैं?”
पाटिल ने बताया कि उस समय सचिन ने कहा था कि वह अभी खेलना जारी रखना चाहते हैं। लेकिन बातचीत के कुछ ही दिनों बाद उन्होंने वनडे क्रिकेट से संन्यास लेने का फैसला कर लिया।
हालांकि उन्होंने टेस्ट क्रिकेट खेलना जारी रखा और 2013 तक भारतीय टीम का हिस्सा रहे।
2013 में सचिन तेंदुलकर ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से पूरी तरह संन्यास ले लिया। उन्होंने अपने करियर का आखिरी टेस्ट मैच वेस्टइंडीज के खिलाफ मुंबई में खेला।
सचिन ने अपने 24 साल लंबे अंतरराष्ट्रीय करियर में 34,000 से अधिक रन बनाए और टेस्ट क्रिकेट में 200 मैच खेलने वाले दुनिया के पहले खिलाड़ी बने।
संदीप पाटिल ने यह भी बताया कि सचिन के बाद टीम में नए खिलाड़ियों को मौका मिला, जिनमें Ajinkya Rahane जैसे खिलाड़ी शामिल थे।
विशेषज्ञों के अनुसार सचिन तेंदुलकर का करियर भारतीय क्रिकेट के इतिहास का सबसे स्वर्णिम अध्याय माना जाता है और आज भी उन्हें “क्रिकेट का भगवान” कहा जाता है।








