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  • रूसी तेल खरीद पर अमेरिका का नरम रुख, ट्रंप के संकेत के बाद यूएस दूत सर्जियो गोर बोले– भारत वैश्विक तेल कीमत स्थिर रखने में अहम साझेदार

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    अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार और वैश्विक राजनीति के बीच भारत की तेल खरीद नीति को लेकर अमेरिका का रुख अब कुछ नरम दिखाई दे रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump के संकेतों के बाद भारत में अमेरिकी राजदूत Sergio Gor ने कहा है कि अमेरिका भारत द्वारा रूस से तेल खरीद को समझता है और इसे वैश्विक तेल कीमतों को स्थिर रखने के प्रयास का हिस्सा मानता है।

    हाल ही में दिए गए एक बयान में सर्जियो गोर ने भारत को “वैश्विक तेल बाजार में स्थिरता बनाए रखने वाला महत्वपूर्ण साझेदार” बताया। उन्होंने कहा कि दुनिया के ऊर्जा बाजार में अस्थिरता के दौर में भारत की भूमिका काफी अहम है और उसकी ऊर्जा जरूरतों को ध्यान में रखते हुए यह नीति समझी जा सकती है।

    सर्जियो गोर ने स्पष्ट रूप से कहा कि अमेरिका इस बात को स्वीकार करता है कि भारत द्वारा रूसी तेल की खरीद वैश्विक बाजार में तेल की आपूर्ति बनाए रखने में योगदान देती है। उनका कहना था कि ऊर्जा बाजार में संतुलन बनाए रखने के लिए कई देशों को व्यावहारिक निर्णय लेने पड़ते हैं और भारत ने भी वही किया है।

    उन्होंने यह भी कहा कि भारत जैसे बड़े ऊर्जा उपभोक्ता देश की नीतियां केवल घरेलू जरूरतों तक सीमित नहीं होतीं, बल्कि उनका असर वैश्विक तेल बाजार पर भी पड़ता है।

    यह बयान ऐसे समय आया है जब पश्चिम एशिया में तनाव और युद्ध जैसी परिस्थितियों के कारण वैश्विक तेल आपूर्ति प्रभावित हो रही है। इस स्थिति में अमेरिका ने भारत को सीमित अवधि के लिए रूसी तेल खरीदने की अनुमति भी दी है, ताकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की उपलब्धता बनी रहे और कीमतों में अत्यधिक उछाल न आए।

    रिपोर्ट्स के अनुसार अमेरिका ने भारत को लगभग 30 दिनों की अस्थायी छूट दी है, जिससे पहले से समुद्र में मौजूद रूसी तेल की खेप खरीदी जा सके। इसका उद्देश्य वैश्विक ऊर्जा संकट को कुछ हद तक कम करना है।

    पिछले कुछ समय से अमेरिका और भारत के बीच रूसी तेल खरीद को लेकर मतभेद भी देखने को मिले थे। अमेरिका ने रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद कई देशों से रूसी ऊर्जा से दूरी बनाने की अपील की थी।

    हालांकि वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों को देखते हुए अमेरिका अब अधिक व्यावहारिक रुख अपनाता दिखाई दे रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि दुनिया में तेल आपूर्ति में किसी भी बड़े व्यवधान से वैश्विक अर्थव्यवस्था प्रभावित हो सकती है, इसलिए बड़े उपभोक्ता देशों की भूमिका महत्वपूर्ण हो जाती है।

    भारत लंबे समय से यह स्पष्ट करता आया है कि उसकी ऊर्जा नीति पूरी तरह राष्ट्रीय हितों पर आधारित है। देश की बढ़ती ऊर्जा जरूरतों को देखते हुए भारत विभिन्न देशों से तेल आयात करता है और बाजार की परिस्थितियों के अनुसार खरीद का निर्णय लिया जाता है।

    विशेषज्ञों के अनुसार भारत ने सस्ते रूसी तेल का आयात कर अपने ईंधन खर्च को संतुलित रखने में सफलता हासिल की है। साथ ही इससे वैश्विक तेल बाजार में भी आपूर्ति बनी रही, जिससे कीमतों में अत्यधिक बढ़ोतरी को रोका जा सका।

    ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि भारत अब वैश्विक ऊर्जा बाजार में एक महत्वपूर्ण खिलाड़ी बन चुका है। दुनिया के बड़े तेल आयातक देशों में शामिल होने के कारण भारत के फैसलों का असर अंतरराष्ट्रीय बाजार पर पड़ता है।

    अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर का यह बयान भी इसी दिशा में संकेत देता है कि अमेरिका भारत को ऊर्जा सुरक्षा और वैश्विक बाजार स्थिरता के लिए एक अहम साझेदार के रूप में देखता है।

    ऐसे में आने वाले समय में भारत-अमेरिका के बीच ऊर्जा सहयोग और रणनीतिक साझेदारी और मजबूत होने की संभावना जताई जा रही है।

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