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  • बड़ी राहत: ईरान ने भारतीय जहाजों को दी होर्मुज जलडमरूमध्य से सुरक्षित गुजरने की अनुमति

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    मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच भारत के लिए बड़ी राहत भरी खबर सामने आई है। Iran ने भारतीय जहाजों को रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण Strait of Hormuz से सुरक्षित गुजरने की अनुमति दे दी है। इस फैसले से भारत के तेल और गैस आपूर्ति पर मंडरा रहा खतरा काफी हद तक कम होने की उम्मीद जताई जा रही है।

    दरअसल हाल ही में क्षेत्र में बढ़ते संघर्ष के कारण कई देशों के जहाजों को इस समुद्री मार्ग से गुजरने पर रोक लगा दी गई थी। लेकिन भारत और ईरान के बीच हुई कूटनीतिक बातचीत के बाद भारतीय जहाजों को विशेष अनुमति मिल गई है।

    कूटनीतिक प्रयासों का मिला परिणाम

    सूत्रों के अनुसार भारत के विदेश मंत्री Subrahmanyam Jaishankar और ईरान के विदेश मंत्री Abbas Araghchi के बीच हुई महत्वपूर्ण बातचीत के बाद यह फैसला लिया गया।

    इस बातचीत के बाद दोनों देशों के बीच ऊर्जा आपूर्ति और समुद्री सुरक्षा को लेकर सहमति बनी, जिसके चलते भारतीय जहाजों को सुरक्षित मार्ग उपलब्ध कराया गया।

    भारतीय जहाजों ने शुरू किया सफर

    जानकारी के मुताबिक “पुष्पक” और “परिमल” नाम के दो भारतीय जहाज होर्मुज जलडमरूमध्य पार कर भारत की ओर रवाना हो चुके हैं। उम्मीद है कि ये जहाज जल्द ही मुंबई और गुजरात के बंदरगाहों तक पहुंच जाएंगे।

    इससे पहले सऊदी अरब से कच्चा तेल लेकर आने वाला एक टैंकर भी सुरक्षित रूप से भारत पहुंच चुका है, जिससे ऊर्जा सप्लाई को लेकर भरोसा और मजबूत हुआ है।

    वैश्विक व्यापार के लिए अहम मार्ग

    होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक माना जाता है। वैश्विक तेल व्यापार का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है।

    ऐसे में इस मार्ग पर किसी भी प्रकार का तनाव या अवरोध कई देशों की ऊर्जा आपूर्ति को प्रभावित कर सकता है। भारत के लिए यह मार्ग खुला रहना आर्थिक और रणनीतिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है।

    ऊर्जा आपूर्ति पर पड़ेगा सकारात्मक असर

    हाल के दिनों में इस क्षेत्र में ड्रोन और मिसाइल हमलों की घटनाओं के कारण कई जहाजों की आवाजाही प्रभावित हुई थी। इससे भारत में गैस और कच्चे तेल की सप्लाई को लेकर भी चिंता बढ़ गई थी।

    हालांकि अब ईरान द्वारा भारतीय जहाजों को दी गई अनुमति के बाद उम्मीद है कि ऊर्जा आपूर्ति की श्रृंखला फिर से सामान्य हो जाएगी और भारत में ईंधन संकट की आशंका काफी हद तक टल जाएगी।

    विशेषज्ञों का मानना है कि इस फैसले से भारत और ईरान के बीच मजबूत कूटनीतिक संबंधों की भी झलक मिलती है और भविष्य में ऊर्जा सहयोग और मजबूत हो सकता है।

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