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रणजीत कुमार | जहानाबाद, बिहार | समाचार वाणी न्यूज़
जिले के एक निजी विद्यालय में 5 साल के मासूम बच्चे के साथ हुई दरिंदगी और निर्मम हत्या ने पूरे बिहार को झकझोर कर रख दिया है। इस हृदयविदारक घटना के विरोध में आम जनता का गुस्सा अब सड़कों पर दिखाई देने लगा है। बुधवार की शाम स्थानीय लोगों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं ने पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने के लिए एक विशाल कैंडल मार्च निकाला।
यह कैंडल मार्च गुरुकुल हॉस्टल से शुरू होकर शहर के प्रमुख मार्गों से गुजरता हुआ कारगिल चौक तक पहुंचा। इस दौरान पूरे शहर में ‘न्याय दो’ और ‘दोषियों को फांसी दो’ जैसे नारों की गूंज सुनाई दी। मार्च में समाज के हर वर्ग के लोग शामिल हुए, जिनके हाथों में मोमबत्तियां और न्याय की मांग करती तख्तियां थीं।
प्रदर्शनकारियों का स्पष्ट कहना था कि जब तक इस जघन्य अपराध के दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा नहीं मिलती, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा। उन्होंने सरकार से मांग की कि मामले की निष्पक्ष जांच कर जल्द से जल्द दोषियों को सजा दिलाई जाए। सुरक्षा के मद्देनजर पूरे मार्च के दौरान भारी पुलिस बल तैनात रहा, ताकि किसी प्रकार की अप्रिय घटना न हो।
कैंडल मार्च का नेतृत्व कर रहे जहानाबाद के राजद सांसद सुरेंद्र प्रसाद यादव ने राज्य सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि इस तरह की घटनाएं बिहार में कानून-व्यवस्था की स्थिति पर गंभीर सवाल खड़े करती हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य सरकार अपराध पर नियंत्रण करने में विफल साबित हो रही है।
सांसद ने कहा कि पांच साल के मासूम के साथ हुई इस अमानवीय घटना ने समाज को शर्मसार कर दिया है। उन्होंने सरकार से मांग की कि इस मामले में उच्च स्तरीय जांच कराई जाए और दोषियों को शीघ्र फांसी की सजा दी जाए। उन्होंने यह भी कहा कि अगर जल्द कार्रवाई नहीं हुई, तो यह मुद्दा सड़क से लेकर संसद तक उठाया जाएगा।
स्थानीय लोगों ने भी प्रशासन की कार्यशैली पर नाराजगी जताते हुए कहा कि ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए ठोस कदम उठाए जाने चाहिए। उन्होंने पीड़ित परिवार को आर्थिक सहायता और सुरक्षा प्रदान करने की मांग की।
यह घटना न केवल जहानाबाद बल्कि पूरे राज्य के लिए एक चेतावनी है कि कानून-व्यवस्था को और मजबूत करने की आवश्यकता है। लोगों की मांग है कि इस मामले में तेजी से सुनवाई कर न्याय सुनिश्चित किया जाए, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो सके।








