भारतरत्न Dr. B. R. Ambedkar की 135वीं जयंती के अवसर पर पूरे महाराष्ट्र में उत्सव और श्रद्धा का अद्भुत संगम देखने को मिला। “जय भीम” के नारों से वातावरण गूंज उठा और लाखों अनुयायी अपने प्रेरणास्रोत को श्रद्धांजलि अर्पित करने के लिए सड़कों पर उतरे।
मुंबई स्थित Chaityabhoomi पर मध्यरात्रि से ही भारी संख्या में भीम अनुयायियों की भीड़ उमड़ पड़ी। देशभर से लोग यहां पहुंचकर बाबासाहेब को नमन कर रहे हैं। वहीं नागपुर की Deekshabhoomi पर भी सुबह से ही हजारों श्रद्धालु एकत्रित होकर उन्हें श्रद्धांजलि दे रहे हैं।
भीम जयंती के अवसर पर पूरे राज्य में कई सामाजिक और शैक्षणिक कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। पुस्तक प्रदर्शन, रक्तदान शिविर, जागरूकता अभियान और विचार गोष्ठियों के माध्यम से बाबासाहेब के विचारों को जन-जन तक पहुंचाने का प्रयास किया गया।
मुंबई महानगरपालिका की ओर से चैत्यभूमि पर बाबासाहेब के जीवन से जुड़ी दुर्लभ तस्वीरों की प्रदर्शनी लगाई गई है, जिसमें उनके ऐतिहासिक दस्तावेज और जीवन की महत्वपूर्ण झलकियां शामिल हैं।
इस अवसर पर कई गणमान्य नेताओं और मंत्रियों ने बाबासाहेब को श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि डॉ. आंबेडकर ने भारत की अर्थव्यवस्था को नई दिशा दी। भारतीय रिजर्व बैंक की स्थापना में उनके विचारों की महत्वपूर्ण भूमिका रही है।
कल्याण में संविधान के 448 अनुच्छेदों के माध्यम से बाबासाहेब की एक भव्य कलाकृति तैयार की गई, जिसने सभी का ध्यान आकर्षित किया। सिंधुदुर्ग में वाळू शिल्प (सैंड आर्ट) के जरिए श्रद्धांजलि दी गई, वहीं नंदुरबार में विद्यार्थियों ने एक पेन पर उनकी सूक्ष्म प्रतिकृति बनाकर अनोखा सम्मान व्यक्त किया।
भुसावल में 135 स्क्वेयर फुट का लाइटिंग स्केच तैयार किया गया, जो दूर से ही आकर्षण का केंद्र बना रहा।
नागपुर में मध्यरात्रि से ही ढोल-ताशों और आतिशबाजी के साथ जयंती मनाई गई। पुणे, सोलापुर, धुले, बीड, सांगली और महाड जैसे शहरों में भी बड़े पैमाने पर कार्यक्रम आयोजित किए गए।
सोलापुर में स्मारक के पास सेल्फी पॉइंट बनाया गया, जबकि बीड में “समता ज्योत रैली” निकाली गई, जिसमें हजारों लोगों ने भाग लिया। सांगली में 14 फीट ऊंची बाबासाहेब की प्रतिमा का लोकार्पण भी किया गया।
भीड़ को देखते हुए राज्यभर में कड़ी सुरक्षा व्यवस्था की गई है। पुलिस बल तैनात किया गया है और यातायात व्यवस्था में भी आवश्यक बदलाव किए गए हैं, ताकि श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो।
डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर की जयंती केवल एक उत्सव नहीं, बल्कि उनके विचारों को आत्मसात करने का अवसर है। समता, न्याय और बंधुत्व के उनके सिद्धांत आज भी समाज को नई दिशा देने का कार्य कर रहे हैं। 135वीं जयंती के अवसर पर उमड़ा जनसैलाब इस बात का प्रमाण है कि बाबासाहेब के विचार आज भी उतने ही प्रासंगिक और प्रेरणादायक हैं।








