पश्चिम एशिया में जारी तनाव और कच्चे तेल की आपूर्ति पर पड़े असर के बीच राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार गुट) के प्रमुख शरद पवार ने देश की मौजूदा परिस्थितियों को गंभीर बताते हुए प्रधानमंत्री Narendra Modi से सर्वदलीय बैठक बुलाने की मांग की है। उन्होंने कहा कि देश के सामने उभर रही चुनौतियों को देखते हुए सभी राजनीतिक दलों को साथ लेकर आगे बढ़ना जरूरी है।
पुणे में आयोजित एक पत्रकार परिषद में शरद पवार ने कहा कि अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव का असर पूरी दुनिया पर दिखाई दे रहा है। होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों पर हमलों और तेल आपूर्ति में रुकावट के कारण भारत में भी ईंधन संकट गहराने की आशंका बढ़ गई है। उन्होंने कहा कि ऐसी स्थिति में केंद्र सरकार द्वारा जारी किए गए संदेश और अपील को गंभीरता से लेना चाहिए।
शरद पवार ने प्रधानमंत्री मोदी द्वारा हाल ही में किए गए ईंधन बचत के आह्वान का समर्थन करते हुए कहा कि देश पहले भी इस तरह की चुनौतियों का सामना कर चुका है। उन्होंने कहा कि अगर आने वाले समय में देश को किसी बड़े संकट से बचाना है तो नागरिकों और जनप्रतिनिधियों दोनों को जिम्मेदारी निभानी होगी।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री द्वारा पेट्रोल-डीजल की बचत, खाद्य तेल के सीमित उपयोग, अनावश्यक विदेशी यात्राओं से बचने और स्वदेशी उत्पादों को बढ़ावा देने की जो अपील की गई है, वह मौजूदा परिस्थितियों में बेहद महत्वपूर्ण है। पवार ने कहा कि लोगों को इसे सिर्फ राजनीतिक बयान न मानकर राष्ट्रीय आवश्यकता के रूप में देखना चाहिए।
महाराष्ट्र सरकार द्वारा मंत्रियों के काफिले कम करने, हेलिकॉप्टर और विशेष विमानों के उपयोग पर नियंत्रण लगाने तथा सार्वजनिक परिवहन के इस्तेमाल को बढ़ावा देने जैसे फैसलों पर भी शरद पवार ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि जनप्रतिनिधियों को केवल दिखावे के लिए नहीं बल्कि लगातार अनुशासन और सादगी के साथ ऐसे कदम उठाने चाहिए। उन्होंने जोर देकर कहा कि जनता तभी प्रेरित होगी जब नेता खुद उदाहरण पेश करेंगे।
शरद पवार ने केंद्र सरकार से मांग की कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जल्द से जल्द सभी दलों की बैठक बुलाएं और देश के सामने मौजूद आर्थिक तथा ऊर्जा संकट की स्थिति पर खुलकर चर्चा करें। उन्होंने कहा कि इस बैठक में सभी राज्यों और राजनीतिक दलों की राय लेना जरूरी है ताकि राष्ट्रीय स्तर पर एक साझा रणनीति बनाई जा सके।
उन्होंने यह भी कहा कि मौजूदा वैश्विक हालात को देखते हुए भारत को आत्मनिर्भरता की दिशा में तेजी से काम करना होगा। ऊर्जा बचत, वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों का उपयोग और संसाधनों का संतुलित इस्तेमाल आने वाले समय की सबसे बड़ी जरूरत बनने जा रहा है।








