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  • राहुल गांधी के करीबी होने के बावजूद CM नहीं बन पाए केसी वेणुगोपाल, 5 वजहों से बदला पूरा खेल

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    Kerala में मुख्यमंत्री पद को लेकर जारी सस्पेंस आखिरकार खत्म हो गया और कांग्रेस ने VD Satheesan के नाम पर मुहर लगा दी। हालांकि शुरुआत में सीएम पद की दौड़ में KC Venugopal सबसे आगे माने जा रहे थे। दावा किया जा रहा था कि उन्हें करीब 50 विधायकों का समर्थन हासिल है, लेकिन अंतिम समय में पूरा राजनीतिक समीकरण बदल गया।

    आइए जानते हैं वो 5 बड़े कारण जिनकी वजह से वेणुगोपाल मुख्यमंत्री नहीं बन पाए।

    1. सतीशन की मजबूत जमीनी पकड़

    वीडी सतीशन की सबसे बड़ी ताकत उनकी जमीनी छवि रही। पार्टी के भीतर हुए फीडबैक और सर्वे में यह सामने आया कि कार्यकर्ताओं और आम समर्थकों के बीच उनकी लोकप्रियता ज्यादा है। हाईकमान को लगा कि जनता के बीच सतीशन ज्यादा स्वीकार्य चेहरा हैं।

    2. पार्टी में टूट का खतरा

    सूत्रों के मुताबिक, सतीशन ने साफ कर दिया था कि वह वेणुगोपाल के नेतृत्व में काम नहीं करेंगे। उन्होंने मुख्यमंत्री पद से कम किसी समझौते के संकेत नहीं दिए। कांग्रेस नेतृत्व को डर था कि अगर सतीशन नाराज हुए तो पार्टी में बड़ा विभाजन हो सकता है।

    3. राहुल गांधी की करीबी ही बनी कमजोरी

    Rahul Gandhi के करीबी माने जाने वाले वेणुगोपाल को आखिरकार पार्टी हित में पीछे हटना पड़ा। राहुल गांधी ने उनसे मुलाकात कर कहा कि संगठन महासचिव के तौर पर उनकी भूमिका अभी ज्यादा महत्वपूर्ण है और भविष्य में उनके लिए बड़ी जिम्मेदारियां हो सकती हैं। पार्टी को एकजुट रखने के लिए त्याग जरूरी बताया गया।

    4. ए के एंटनी फैक्टर

    कांग्रेस के वरिष्ठ नेता AK Antony की राय भी इस फैसले में अहम मानी जा रही है। उन्होंने नेतृत्व को सुझाव दिया कि ऐसे नेता को मौका मिलना चाहिए जिसकी जनता और कार्यकर्ताओं में मजबूत पकड़ हो। एंटनी ने सतीशन को लेफ्ट सरकार के खिलाफ सबसे आक्रामक चेहरा बताया।

    5. IUML और वायनाड का समीकरण

    Indian Union Muslim League यानी IUML अंदरखाने सतीशन के समर्थन में दिखाई दी। कांग्रेस के लिए IUML का समर्थन बेहद अहम माना जाता है। बताया जा रहा है कि IUML ऐसे नेता के पक्ष में थी जिसकी विधानसभा राजनीति में सक्रिय पकड़ हो। इसका फायदा भी सतीशन को मिला।

    राजनीतिक जानकारों का मानना है कि विधायक समर्थन होने के बावजूद वेणुगोपाल संगठनात्मक और राजनीतिक समीकरणों में पीछे रह गए। वहीं सतीशन ने जमीनी लोकप्रियता, कार्यकर्ताओं का भरोसा और गठबंधन सहयोगियों का समर्थन हासिल कर अंतिम बाजी अपने नाम कर ली।

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