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  • भारतीय निशानेबाजी को बड़ा झटका: एशियन गेम्स और कॉमनवेल्थ के स्वर्णिम सितारे जसपाल राणा का निधन, खेल जगत में शोक की लहर

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    भारतीय खेल जगत के लिए शुक्रवार की सुबह बेहद दुखद खबर लेकर आई। देश के दिग्गज निशानेबाज, एशियन गेम्स स्वर्ण पदक विजेता और भारतीय शूटिंग टीम के पूर्व कोच जसपाल राणा का 49 वर्ष की आयु में निधन हो गया। उनके आकस्मिक निधन से खेल जगत में शोक की लहर दौड़ गई है।

    प्राप्त जानकारी के अनुसार जसपाल राणा हाल ही में जर्मनी में आयोजित शूटिंग वर्ल्ड कप से भारत लौटे थे। वापसी के दौरान उन्हें सीने में दर्द की शिकायत हुई, जिसके बाद उन्हें नई दिल्ली के साकेत स्थित मैक्स सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल में भर्ती कराया गया। चिकित्सकों ने उनकी सर्जरी भी की और स्टेंट लगाया गया, लेकिन तमाम प्रयासों के बावजूद उन्हें बचाया नहीं जा सका। गुरुवार देर रात उन्होंने अंतिम सांस ली।

    वर्ल्ड कप से लौटते समय बिगड़ी थी तबीयत

    बताया जा रहा है कि पिछले महीने के अंत में जसपाल राणा जर्मनी के म्यूनिख में आयोजित शूटिंग वर्ल्ड कप में भारतीय टीम के साथ मौजूद थे। वहां भी उन्हें लगातार सीने में दर्द की शिकायत थी, जिसे उन्होंने सामान्य स्वास्थ्य समस्या समझकर नजरअंदाज कर दिया था।

    31 मई को भारत लौटते समय उनकी तबीयत और बिगड़ गई। दिल्ली पहुंचने के कुछ घंटों बाद हालत गंभीर होने पर उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां वे पिछले कई दिनों से उपचाराधीन थे।

    एशियन गेम्स और कॉमनवेल्थ में भारत का गौरव बढ़ाया

    उत्तराखंड के उत्तरकाशी में जन्मे जसपाल राणा ने 1990 के दशक में भारतीय निशानेबाजी को नई पहचान दिलाई। उन्होंने वर्ष 1994 के हिरोशिमा एशियन गेम्स में 25 मीटर सेंटर फायर पिस्टल स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीतकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का नाम रोशन किया।

    इसके बाद 2006 दोहा एशियन गेम्स में उन्होंने तीन स्वर्ण पदक जीतकर इतिहास रच दिया। एशियन गेम्स में उनके नाम कुल 4 स्वर्ण, 2 रजत और 2 कांस्य पदक दर्ज हैं।

    कॉमनवेल्थ गेम्स में भी उनका प्रदर्शन असाधारण रहा। उन्होंने 1994, 1998, 2002 और 2006 के खेलों में शानदार प्रदर्शन करते हुए कुल 9 स्वर्ण, 4 रजत और 2 कांस्य पदक भारत की झोली में डाले। यह उपलब्धि भारतीय निशानेबाजी इतिहास में आज भी एक महत्वपूर्ण रिकॉर्ड मानी जाती है।

    कोच के रूप में भी दी नई पीढ़ी को दिशा

    खिलाड़ी के रूप में सफलता हासिल करने के बाद जसपाल राणा ने कोचिंग की जिम्मेदारी संभाली और भारतीय शूटिंग को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

    उनके मार्गदर्शन में मनु भाकर, सौरभ चौधरी, ईशा सिंह जैसे कई युवा निशानेबाजों ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सफलता हासिल की। विशेष रूप से पेरिस ओलंपिक में मनु भाकर की ऐतिहासिक उपलब्धि के पीछे जसपाल राणा के प्रशिक्षण और अनुभव की अहम भूमिका मानी जाती है।

    देश के सर्वोच्च खेल सम्मानों से हुए सम्मानित

    भारतीय खेलों में उनके असाधारण योगदान को देखते हुए उन्हें कई प्रतिष्ठित पुरस्कारों से सम्मानित किया गया। उन्हें वर्ष 1994 में अर्जुन पुरस्कार, 1997 में पद्मश्री तथा 2020 में द्रोणाचार्य पुरस्कार प्रदान किया गया था।

    खेल जगत ने दी श्रद्धांजलि

    जसपाल राणा के निधन की खबर सामने आते ही खेल जगत, पूर्व खिलाड़ियों, कोचों और खेल प्रेमियों ने गहरा शोक व्यक्त किया। उन्हें भारतीय निशानेबाजी के स्वर्णिम युग का प्रमुख चेहरा माना जाता है, जिन्होंने खिलाड़ी और कोच दोनों भूमिकाओं में देश का गौरव बढ़ाया।

    उनका निधन भारतीय खेल जगत के लिए अपूरणीय क्षति माना जा रहा है। उनकी उपलब्धियां, अनुशासन और समर्पण आने वाली पीढ़ियों के खिलाड़ियों को हमेशा प्रेरित करते रहेंगे।

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