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  • जैन मुनि निलेशचंद्र की मनसे को चेतावनी, बोले- “जैन समाज ने चूड़ियां नहीं पहनीं, समय आने पर जवाब मिलेगा”

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    मुंबई के दादर और घाटकोपर क्षेत्रों में जैन साधुओं के आवागमन के लिए सड़क पर बनाई गई सफेद पट्टियों को लेकर शुरू हुआ विवाद अब और गहरा गया है। इस मुद्दे पर महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) की आपत्ति के बाद जैन समाज की ओर से भी तीखी प्रतिक्रिया सामने आई है।

    जैन मुनि निलेशचंद्र ने मनसे नेता Sandeep Deshpande के बयान पर पलटवार करते हुए कहा कि जैन समाज शांतिप्रिय जरूर है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि वह कमजोर है। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि “जैन समाज ने चूड़ियां नहीं पहनी हैं, समय आने पर उचित जवाब दिया जाएगा।”

    क्या है पूरा विवाद?

    दादर में जैन धर्मगुरुओं के पैदल चलने के लिए सड़क पर सफेद पट्टियां बनाई गई थीं। मनसे ने इसका विरोध करते हुए इसे “सांस्कृतिक आतंकवाद” बताया था। मनसे नेता संदीप देशपांडे ने इन पट्टियों को हटाने की मांग करते हुए प्रशासन को समयसीमा भी दी थी। बाद में विवाद बढ़ने की आशंका को देखते हुए मुंबई महानगरपालिका ने पट्टियां हटा दीं।

    जैन मुनि ने क्या कहा?

    जैन मुनि निलेशचंद्र ने कहा कि सफेद रंग शांति और अहिंसा का प्रतीक है। जैन साधुओं की सुविधा के लिए बनाई गई पट्टियों को विवाद का विषय बनाना उचित नहीं है।

    उन्होंने कहा कि भारत का संविधान सभी धर्मों और संप्रदायों को अपने धार्मिक रीति-रिवाजों का पालन करने का अधिकार देता है। किसी धर्म का अपमान करना या उसके खिलाफ भड़काऊ बयान देना संविधान और कानून की भावना के खिलाफ है।

    मनसे पर लगाए गंभीर आरोप

    निलेशचंद्र ने आरोप लगाया कि मनसे समाजों के बीच विभाजन पैदा करने का प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा कि ऐसे मुद्दों को उछालकर धार्मिक और सामाजिक तनाव बढ़ाने की कोशिश की जा रही है।

    उन्होंने कहा कि मनसे को जैन समाज से नहीं, बल्कि राज्य और समाज के वास्तविक मुद्दों पर ध्यान देना चाहिए।

    मुस्लिम मुद्दों का भी किया उल्लेख

    जैन मुनि ने अपने बयान में कुछ अन्य सामाजिक मुद्दों का जिक्र करते हुए कहा कि यदि किसी संगठन को समाज सुधार की चिंता है तो उसे सभी समुदायों से जुड़े मुद्दों पर समान रूप से आवाज उठानी चाहिए।

    उन्होंने दावा किया कि डहाणू में आयोजित एक धर्मसभा में बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए थे और वहां कुछ गंभीर सामाजिक विषयों पर चर्चा हुई थी। उन्होंने सवाल किया कि उन मामलों पर मनसे की प्रतिक्रिया क्यों नहीं दिखाई देती।

    बालासाहेब ठाकरे का किया उल्लेख

    निलेशचंद्र ने कहा कि Bal Thackeray के समय महाराष्ट्र में धार्मिक और जातीय सौहार्द अधिक मजबूत था। उन्होंने आरोप लगाया कि वर्तमान राजनीति में धार्मिक मुद्दों का उपयोग राजनीतिक लाभ के लिए किया जा रहा है।

    बढ़ सकती है राजनीतिक गर्मी

    जैन मुनि के इस बयान के बाद राज्य की राजनीति में नई बहस शुरू हो गई है। फिलहाल मनसे की ओर से इस पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन आने वाले दिनों में यह विवाद और तूल पकड़ सकता है।

    इस पूरे घटनाक्रम पर जैन समाज, मनसे और प्रशासन की अगली भूमिका पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।

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