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  • सरसकट कर्जमाफी की मांग पर Rohit Pawar का अन्नत्याग आंदोलन दूसरे दिन भी जारी, सरकार को दिया अल्टीमेटम का संकेत

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    सरसकट कर्जमाफी की मांग को लेकर राष्ट्रवादी कांग्रेस के विधायक Rohit Pawar का अन्नत्याग आंदोलन दूसरे दिन भी जारी है। पंढरपुर के छत्रपति शिवाजी महाराज चौक में चल रहे इस आंदोलन ने राज्य की राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है।

    रोहित पवार ने स्पष्ट कहा कि सरकार ने कर्जमाफी में जो जाचक शर्तें लगाई हैं, उन्हें वापस लिए बिना आंदोलन समाप्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने बताया कि डॉक्टरों ने उनकी शुगर कम होने की बात कही है, लेकिन उनका रक्तचाप सामान्य है और वे आंदोलन जारी रखने के लिए प्रतिबद्ध हैं।

    कृषि मंत्री के निमंत्रण के बावजूद पीछे हटने से इनकार

    राज्य के कृषि मंत्री Dattatray Bharane ने चर्चा के लिए निमंत्रण दिया है, लेकिन रोहित पवार ने कहा कि केवल बातचीत से बात नहीं बनेगी; सरकार को मांगों पर ठोस निर्णय लेना होगा।

    कर्जमाफी योजना पर तीखा हमला

    रोहित पवार ने आरोप लगाया कि वर्तमान कर्जमाफी योजना शेतकऱ्यांची फसवणूक (किसानों के साथ धोखा) है। उनका कहना है कि 2019 की कर्जमाफी का लाभ लेने वाले किसानों के लिए बाद में लागू की गई सीमित राहत वास्तविक समाधान नहीं है। उन्होंने Ajit Pawar का उल्लेख करते हुए कहा कि यदि आज “अजित दादा” सत्ता में होते तो ऐसा शासन निर्णय जारी ही नहीं होता।

    जयकुमार गोरे पर पलटवार

    राज्य मंत्री Jaykumar Gore ने आंदोलन को “नौटंकी” कहा था। इस पर रोहित पवार ने पलटवार करते हुए कहा कि किसानों के मुद्दों को गंभीरता से न लेने वाले मंत्रियों से संवाद का प्रश्न ही नहीं उठता। उन्होंने तंज कसते हुए पूछा कि संबंधित मंत्री ने सरकार का जीआर (शासन निर्णय) पढ़ा भी है या नहीं।

    सरकार को ‘कल’ अल्टीमेटम देने की चेतावनी

    रोहित पवार ने कहा कि वे आज औपचारिक अल्टीमेटम नहीं देंगे, लेकिन सरकार को कल स्पष्ट चेतावनी दी जाएगी। उन्होंने सरकार की कर्जमाफी को “बीमार” बताते हुए कहा कि यह योजना किसानों को वास्तविक राहत देने में असफल रही है।

    मांगें और आगे की दिशा

    आंदोलन का केंद्रबिंदु राज्य के सभी पात्र किसानों के लिए सरसकट कर्जमाफी (संपूर्ण ऋणमाफी) और सातबारा कोरा (ऋण-मुक्त रिकॉर्ड) की मांग है। रोहित पवार ने दोहराया कि जब तक सरकार इस दिशा में ठोस कदम नहीं उठाती, तब तक अन्नत्याग आंदोलन जारी रहेगा।

    अब राज्य सरकार इस आंदोलन पर क्या प्रतिक्रिया देती है और बातचीत से कोई समाधान निकलता है या नहीं, इस पर किसानों और राजनीतिक पर्यवेक्षकों की नजरें टिकी हुई हैं।

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