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  • अभिषेक बनर्जी पर जांच एजेंसियों का शिकंजा, कभी CID तो कभी ED की पूछताछ, आज फिर पेशी

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    पश्चिम बंगाल की राजनीति में उथल-पुथल के बीच तृणमूल कांग्रेस (TMC) के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं। एक ओर पार्टी में बगावत और राजनीतिक संकट गहराता जा रहा है, वहीं दूसरी ओर जांच एजेंसियां लगातार उनसे पूछताछ कर रही हैं। कभी सीआईडी (CID) तो कभी प्रवर्तन निदेशालय (ED) उन्हें अलग-अलग मामलों में तलब कर रहा है।

    आज एक बार फिर अभिषेक बनर्जी को CID के समक्ष पेश होना है। इस बार पूछताछ चुनाव प्रचार के दौरान दिए गए कथित भड़काऊ भाषण से जुड़े मामले में की जाएगी।

    चुनावी भाषण मामले में CID की कार्रवाई

    पिछले सप्ताह CID ने अभिषेक बनर्जी को नोटिस जारी कर 16 जून को पूछताछ के लिए बुलाया था। जांच एजेंसी का आरोप है कि चुनाव प्रचार के दौरान दिए गए कुछ भाषणों में भड़काऊ टिप्पणियां की गई थीं, जिनकी जांच की जा रही है।

    CID अधिकारी नोटिस देने के लिए उनके आवास तक पहुंचे थे, लेकिन मुलाकात नहीं होने पर नोटिस उनके कार्यालय में सौंपा गया था।

    भर्ती घोटाले में ED की लंबी पूछताछ

    सोमवार को प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने कथित प्राथमिक शिक्षक भर्ती घोटाले के सिलसिले में अभिषेक बनर्जी से करीब 6 घंटे तक पूछताछ की। सूत्रों के मुताबिक एजेंसी ने दो दर्जन से अधिक सवालों की सूची तैयार की थी।

    पूछताछ की पूरी प्रक्रिया की वीडियोग्राफी की गई है और अब एजेंसी उनके जवाबों का अन्य आरोपियों के बयानों, डिजिटल रिकॉर्ड और वित्तीय दस्तावेजों से मिलान करेगी।

    इससे पहले भी इसी मामले में ED अभिषेक बनर्जी से लगभग 11 घंटे तक पूछताछ कर चुकी है।

    फेक सिग्नेचर केस में 9 घंटे सवाल-जवाब

    रविवार को अभिषेक बनर्जी फेक सिग्नेचर मामले में CID के सामने पेश हुए थे। इस दौरान उनसे लगभग 9 घंटे तक पूछताछ की गई। बाद में टीएमसी नेता और विधायक कुणाल घोष को भी तलब किया गया और दोनों से आमने-सामने बैठाकर सवाल-जवाब किए गए।

    यह मामला पश्चिम बंगाल विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष के चयन से जुड़ा हुआ है।

    क्या है फेक सिग्नेचर विवाद?

    बताया जा रहा है कि 6 मई को टीएमसी विधायकों की बैठक में नेता प्रतिपक्ष के लिए शोभनदेव चट्टोपाध्याय के नाम पर सहमति बनी थी। बाद में विधानसभा सचिवालय को समर्थन पत्र सौंपा गया, जिसमें 70 विधायकों के हस्ताक्षर बताए गए।

    हालांकि जांच के दौरान कुछ हस्ताक्षरों में कथित विसंगतियां सामने आईं। इसके बाद मामला दर्ज हुआ और CID ने जांच शुरू कर दी।

    बढ़ सकती हैं राजनीतिक मुश्किलें

    लगातार चल रही पूछताछ और विभिन्न मामलों में जांच के कारण अभिषेक बनर्जी राजनीतिक और कानूनी दोनों मोर्चों पर दबाव में दिखाई दे रहे हैं। ऐसे समय में जब तृणमूल कांग्रेस खुद आंतरिक चुनौतियों का सामना कर रही है, जांच एजेंसियों की कार्रवाई पार्टी नेतृत्व के लिए नई चिंता बनती जा रही है।

    अब सभी की नजरें आज होने वाली CID की पूछताछ और उसके बाद की कार्रवाई पर टिकी हुई हैं।

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