भारतीय फिल्म इंडस्ट्री में कलाकारों की रॉयल्टी को लेकर एक बार फिर बहस तेज हो गई है। वरिष्ठ अभिनेता राकेश बेदी, जिन्होंने हाल ही में फिल्म ‘धुरंधर 2’ में जमील जमाली के किरदार से दर्शकों का दिल जीता, ने बॉलीवुड में कलाकारों को रॉयल्टी न मिलने की व्यवस्था पर खुलकर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि अगर उन्होंने अपने लंबे करियर का यही काम हॉलीवुड में किया होता, तो आज वे आर्थिक रूप से कहीं अधिक संपन्न होते।
हॉलीवुड में कलाकारों को मिलती है उम्रभर रॉयल्टी
एक बातचीत के दौरान राकेश बेदी ने कहा कि हॉलीवुड में कलाकारों को सिर्फ फिल्म की फीस नहीं मिलती, बल्कि फिल्म के दोबारा प्रसारण, ओटीटी रिलीज़, डिजिटल स्ट्रीमिंग और अन्य माध्यमों से होने वाली कमाई का हिस्सा भी रॉयल्टी के रूप में मिलता रहता है।
उन्होंने कहा कि कलाकारों को हर महीने रॉयल्टी का चेक मिलता है, जबकि भारत में एक बार फीस मिलने के बाद फिल्म चाहे कितनी भी बड़ी हिट क्यों न हो जाए, कलाकार को दोबारा कोई आर्थिक लाभ नहीं मिलता।
“बॉलीवुड ने जानबूझकर ये सिस्टम नहीं अपनाया”
राकेश बेदी का मानना है कि भारतीय फिल्म इंडस्ट्री ने हॉलीवुड से आधुनिक कैमरे, नई तकनीक और फिल्म निर्माण के कई तरीके तो अपना लिए, लेकिन कलाकारों के हित से जुड़ी सबसे अहम व्यवस्था यानी रॉयल्टी सिस्टम को कभी लागू नहीं किया।
उन्होंने कहा कि यही वजह है कि दशकों तक काम करने वाले कई कलाकार अपनी फिल्मों की लगातार होने वाली कमाई से पूरी तरह वंचित रह जाते हैं।
भारतीय कलाकारों को नहीं मिलता फिल्मों की कमाई में हिस्सा
राकेश बेदी ने कहा कि जिन भारतीय कलाकारों ने हॉलीवुड की फिल्मों में काम किया है, उन्हें आज भी नियमित रूप से रॉयल्टी मिलती है। वहीं भारतीय कलाकारों को टीवी प्रसारण, ओटीटी प्लेटफॉर्म, डिजिटल स्ट्रीमिंग या सोशल मीडिया से होने वाली कमाई में कोई हिस्सा नहीं दिया जाता।
उनके मुताबिक, फिल्मों की कमाई अब सिर्फ सिनेमाघरों तक सीमित नहीं रह गई है, लेकिन कलाकारों की आय आज भी केवल शुरुआती मेहनताने तक ही सीमित है।
रणवीर सिंह की तारीफ का भी किया जिक्र
बातचीत के दौरान राकेश बेदी ने अभिनेता रणवीर सिंह के उस बयान का भी जिक्र किया, जिसमें उन्होंने मजाकिया अंदाज़ में कहा था कि अगर ‘धुरंधर 2’ ने हजार करोड़ रुपये कमाए हैं, तो उसमें 500 करोड़ रुपये का योगदान राकेश बेदी के अभिनय का है।
इस पर राकेश बेदी ने कहा कि यह रणवीर सिंह की उदारता और सम्मान व्यक्त करने का तरीका था। हालांकि वास्तविकता यह है कि कलाकारों को उनकी फिल्मों की दीर्घकालिक कमाई से कोई आर्थिक लाभ नहीं मिलता।
रॉयल्टी सिस्टम लागू करने की उठाई मांग
राकेश बेदी ने कहा कि आज फिल्मों से वर्षों तक कमाई होती रहती है। सिनेमाघरों के बाद ओटीटी, सैटेलाइट राइट्स, डिजिटल प्लेटफॉर्म और अन्य माध्यमों से फिल्में लगातार राजस्व अर्जित करती हैं। ऐसे में कलाकारों को भी उस कमाई में उचित हिस्सा मिलना चाहिए।
उनका मानना है कि यदि भविष्य में बॉलीवुड में भी हॉलीवुड की तर्ज पर पारदर्शी रॉयल्टी सिस्टम लागू किया जाता है, तो यह कलाकारों के हित में एक ऐतिहासिक और सकारात्मक बदलाव साबित होगा।








