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  • विधान परिषद चुनाव के बाद ओमराजे निंबाळकर पर बड़े आरोप, शिंदे गुट में शामिल होने से पहले ही महायुति को समर्थन देने का दावा

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    महाराष्ट्र विधान परिषद चुनाव के नतीजों के बाद राज्य की राजनीति में नई चर्चा शुरू हो गई है। विशेष रूप से धाराशिव-लातूर-बीड विधान परिषद सीट के परिणामों ने शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के पूर्व सांसद ओमराजे निंबाळकर की राजनीतिक भूमिका को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।

    हाल ही में ओमराजे निंबाळकर ने मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना में शामिल होने की घोषणा की थी। हालांकि, अब चुनावी आंकड़ों के आधार पर विपक्षी दलों का दावा है कि उन्होंने यह राजनीतिक फैसला सार्वजनिक घोषणा से पहले ही ले लिया था और उसका असर विधान परिषद चुनाव के मतदान में भी दिखाई दिया।

    मतदान के आंकड़ों ने बढ़ाई सियासी हलचल

    धाराशिव-लातूर-बीड विधान परिषद सीट से भाजपा उम्मीदवार बसवराज पाटिल ने जीत दर्ज की, जबकि महाविकास आघाड़ी समर्थित कांग्रेस उम्मीदवार महेश देशमुख को हार का सामना करना पड़ा।

    चुनाव परिणाम आने के बाद सामने आए मतदान के आंकड़ों को लेकर दावा किया जा रहा है कि महाविकास आघाड़ी के वोटों में बड़ी सेंध लगी। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि स्थानीय जनप्रतिनिधियों के कुछ वोट महायुति उम्मीदवार के पक्ष में चले गए, जिससे भाजपा को सीधा लाभ मिला।

    घोषणा बाद में, फैसला पहले?

    विधान परिषद चुनाव के लिए मतदान 18 जून को हुआ था, जबकि ओमराजे निंबाळकर ने इसके बाद सार्वजनिक रूप से एकनाथ शिंदे की शिवसेना में शामिल होने की घोषणा की।

    विपक्ष का आरोप है कि राजनीतिक निर्णय पहले ही लिया जा चुका था और मतदान के दौरान उसी रणनीति के तहत महायुति को समर्थन मिला।

    ठाकरे गुट को लगा एक और झटका

    लोकसभा के बाद ठाकरे गुट के छह सांसदों द्वारा अलग रुख अपनाने से पार्टी पहले ही दबाव में थी। ऐसे में ओमराजे निंबाळकर का शिंदे गुट में जाना उद्धव ठाकरे के लिए एक और बड़ा राजनीतिक झटका माना जा रहा है।

    पार्टी ने बागी सांसदों को कारण बताओ नोटिस जारी किए हैं और संगठन स्तर पर भी लगातार बैठकों का दौर जारी है।

    संजय राऊत ने साधा निशाना

    शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के वरिष्ठ नेता संजय राऊत ने ओमराजे निंबाळकर के फैसले पर तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने आरोप लगाया कि महाविकास आघाड़ी के वोटों में फूट डालकर महायुति को फायदा पहुंचाया गया।

    राऊत ने इसे पार्टी के साथ विश्वासघात बताते हुए कहा कि इससे विपक्षी गठबंधन को नुकसान हुआ है।

    कार्यकर्ताओं के साथ पहले ही शुरू कर दी थी तैयारी

    शिंदे गुट में शामिल होने की घोषणा से पहले ओमराजे निंबाळकर ने धाराशिव जिले के विभिन्न तालुकों में कार्यकर्ताओं की बैठकें की थीं। इन बैठकों में उन्होंने अपनी आगे की राजनीतिक दिशा को लेकर चर्चा की और बाद में शिवसेना (शिंदे गुट) में शामिल होने का निर्णय सार्वजनिक किया।

    राजनीतिक गलियारों में तेज हुई चर्चा

    धाराशिव-लातूर-बीड सीट के नतीजों के बाद अब महाविकास आघाड़ी के वोटों में कथित सेंध, स्थानीय नेताओं की भूमिका और ओमराजे निंबाळकर के राजनीतिक फैसले की टाइमिंग को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है।

    हालांकि, इन आरोपों पर ओमराजे निंबाळकर की ओर से अब तक कोई विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। वहीं, विधान परिषद चुनाव के परिणामों के बाद महाराष्ट्र की बदलती राजनीतिक तस्वीर पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।

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