महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) प्रमुख राज ठाकरे ने नागपुर के नवनियुक्त पुलिस आयुक्त और वरिष्ठ IPS अधिकारी विश्वास नांगरे पाटिल पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की सार्वजनिक मंच से प्रशंसा करने को लेकर नांगरे पाटिल की निष्पक्षता पर सवाल उठाए और कहा कि यदि किसी संगठन के प्रति इतनी ही निष्ठा है तो उन्हें पुलिस सेवा छोड़कर RSS या भारतीय जनता पार्टी (BJP) में शामिल हो जाना चाहिए।
राज ठाकरे की यह प्रतिक्रिया उस वीडियो के वायरल होने के बाद आई है, जिसमें 1997 बैच के IPS अधिकारी विश्वास नांगरे पाटिल एक क्षेत्रीय हिंदू सम्मेलन में RSS और उसके संस्थापक डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार की खुलकर प्रशंसा करते दिखाई दे रहे हैं।
“पुलिस अधिकारी की निष्ठा केवल वर्दी के प्रति होनी चाहिए”
राज ठाकरे ने सोशल मीडिया पर जारी अपने बयान में कहा कि किसी भी पुलिस अधिकारी की निष्ठा केवल उसके संवैधानिक दायित्वों और पुलिस विभाग के प्रति होनी चाहिए।
उन्होंने कहा, “हम सभी समझते थे कि नांगरे पाटिल की खाकी वर्दी पुलिस की पहचान है, लेकिन अब ऐसा लगता है कि उनकी खाकी संघ की पुरानी वर्दी से मेल खाती है।”
उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि यदि RSS के प्रति इतना प्रेम है तो उसे सार्वजनिक रूप से व्यक्त करने से पहले उन्हें अपने पद से इस्तीफा देकर राजनीति में आ जाना चाहिए।
“इस्तीफा देकर RSS या BJP में शामिल हो जाइए”
राज ठाकरे ने कहा कि यदि विश्वास नांगरे पाटिल किसी वैचारिक संगठन के प्रति सार्वजनिक रूप से समर्थन जताना चाहते हैं तो उन्हें पहले IPS सेवा छोड़नी चाहिए।
उन्होंने व्यंग्य करते हुए कहा कि वर्षों से “पसंदीदा अधिकारियों के पुनर्वास” की व्यवस्था चल रही है, इसलिए उनके लिए भी राजनीति में जगह मिल जाएगी।
सरकार की चुप्पी पर भी उठाए सवाल
मनसे प्रमुख ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और राज्य के गृह विभाग से भी सवाल पूछा कि क्या सरकार एक कार्यरत वरिष्ठ पुलिस अधिकारी द्वारा किसी राजनीतिक या वैचारिक संगठन की खुली प्रशंसा को स्वीकार करती है।
उन्होंने कहा कि यदि सरकार इस पर कार्रवाई नहीं करती है तो यह प्रशासनिक निष्पक्षता के लिए खतरनाक उदाहरण बन सकता है।
2012 की घटना का दिया उदाहरण
राज ठाकरे ने अपने आरोपों को मजबूती देने के लिए वर्ष 2012 की एक घटना का भी उल्लेख किया।
उन्होंने कहा कि उस समय मनसे के एक आंदोलन के दौरान एक पुलिस कांस्टेबल ने प्रदर्शनकारियों के समर्थन में सार्वजनिक रूप से अपनी राय रखी थी, जिसके बाद तत्कालीन सरकार ने उसे अनिवार्य अवकाश पर भेज दिया था।
राज ठाकरे ने सवाल किया कि क्या वर्तमान सरकार विश्वास नांगरे पाटिल के मामले में भी वैसी ही कार्रवाई करेगी या नियम केवल चुनिंदा लोगों पर ही लागू होते हैं।
कांग्रेस भी उठा चुकी है सवाल
राज ठाकरे से पहले महाराष्ट्र कांग्रेस भी विश्वास नांगरे पाटिल के बयान को लेकर सरकार पर निशाना साध चुकी है।
कांग्रेस का आरोप है कि यह केवल एक अधिकारी का मामला नहीं बल्कि प्रशासनिक निष्पक्षता और संवैधानिक मूल्यों से जुड़ा मुद्दा है। पार्टी ने मुख्यमंत्री से स्पष्ट करने की मांग की है कि क्या सरकार कार्यरत पुलिस अधिकारियों द्वारा वैचारिक संगठनों के समर्थन को उचित मानती है।
“अच्छे अधिकारी हैं, लेकिन संस्थागत मर्यादा बनाए रखें”
राज ठाकरे ने यह भी कहा कि विश्वास नांगरे पाटिल एक सक्षम और कुशल अधिकारी माने जाते हैं, लेकिन उन्हें राजनीतिक दलों और वैचारिक संगठनों के प्रभाव से दूर रहकर अपनी संस्थागत मर्यादा बनाए रखनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि यदि वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी भी निष्पक्षता खो देंगे तो आम जनता का सरकारी संस्थाओं पर भरोसा कमजोर हो जाएगा।








