महाराष्ट्र से एक बड़ी खबर सामने आई है। शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) का प्रश्नपत्र लीक होने की आशंका के बाद 28 जून को आयोजित होने वाली परीक्षा रद्द कर दी गई है। इस फैसले से राज्यभर के लगभग 2 लाख 26 हजार अभ्यर्थियों पर सीधा असर पड़ा है।
महाराष्ट्र राज्य परीक्षा परिषद द्वारा आयोजित की जाने वाली इस परीक्षा को लेकर पेपर लीक की सूचना सामने आने के बाद प्रशासन ने तत्काल कार्रवाई करते हुए परीक्षा स्थगित करने का निर्णय लिया। अब परिषद जल्द ही नई परीक्षा तिथि की घोषणा करेगी।
ठाणे से सामने आई पेपर लीक की जानकारी
जानकारी के अनुसार, रविवार को होने वाली शिक्षक पात्रता परीक्षा का प्रश्नपत्र लीक होने की आशंका सामने आई है। इस सूचना के बाद शिक्षा विभाग और परीक्षा परिषद में हड़कंप मच गया।
मामले की गंभीरता को देखते हुए संबंधित अधिकारियों ने परीक्षा रद्द करने का फैसला लिया ताकि परीक्षा की निष्पक्षता और पारदर्शिता बनी रहे।
2.26 लाख अभ्यर्थियों को लगा झटका
इस परीक्षा के लिए पूरे महाराष्ट्र से करीब 2 लाख 26 हजार उम्मीदवारों ने आवेदन किया था। अधिकांश अभ्यर्थी परीक्षा की तैयारी पूरी कर चुके थे और परीक्षा केंद्रों पर पहुंचने की तैयारी में थे।
ऐसे समय में परीक्षा रद्द होने से अभ्यर्थियों में निराशा और नाराजगी दोनों देखने को मिल रही है।
जल्द जारी होगी नई परीक्षा तिथि
महाराष्ट्र राज्य परीक्षा परिषद ने संकेत दिए हैं कि जल्द ही आधिकारिक परिपत्र जारी कर नई परीक्षा तिथि घोषित की जाएगी।
परिषद ने अभ्यर्थियों से अपील की है कि वे किसी भी अफवाह पर विश्वास न करें और केवल आधिकारिक वेबसाइट एवं अधिसूचनाओं पर ही भरोसा करें।
पेपर लीक मामले की होगी जांच
पेपर लीक की आशंका सामने आने के बाद अब इस पूरे मामले की जांच की संभावना है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने का प्रयास करेंगी कि प्रश्नपत्र कैसे बाहर आया और इसके पीछे किन लोगों की भूमिका हो सकती है।
यदि पेपर लीक की पुष्टि होती है तो दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जा सकती है।
परीक्षा प्रणाली पर फिर उठे सवाल
हाल के समय में विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक की घटनाओं को लेकर पहले ही चिंता जताई जा रही थी। अब TET परीक्षा पर भी पेपर लीक की आशंका सामने आने से परीक्षा प्रणाली की सुरक्षा और गोपनीयता पर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं।
शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसी घटनाओं से लाखों युवाओं का भविष्य प्रभावित होता है और परीक्षा व्यवस्था में विश्वास बनाए रखने के लिए दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई जरूरी है।








