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  • भारत का पहला ऑफशोर एयरपोर्ट महाराष्ट्र में बनेगा, 9 करोड़ यात्रियों की क्षमता; मुंबई महानगर क्षेत्र की अर्थव्यवस्था को मिलेगी नई उड़ान

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    भारत अपने विमानन और बुनियादी ढांचा विकास के क्षेत्र में एक और ऐतिहासिक कदम उठाने जा रहा है। महाराष्ट्र सरकार ने देश के पहले ऑफशोर एयरपोर्ट (समुद्र के भीतर कृत्रिम भूमि पर बनने वाला हवाई अड्डा) के लिए विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) तैयार करने का आदेश दे दिया है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने अधिकारियों को प्रस्तावित एयरपोर्ट तक सीधी पहुंच के लिए उत्तन-विरार सी लिंक को भी विस्तार देने की संभावनाएं तलाशने के निर्देश दिए हैं।

    प्रस्तावित एयरपोर्ट पालघर जिले के कोरे बीच के पास बनाया जाएगा और इसकी सालाना यात्री क्षमता लगभग 9 करोड़ (90 मिलियन) यात्रियों की होगी।

    क्या होता है ऑफशोर एयरपोर्ट?

    ऑफशोर एयरपोर्ट वह हवाई अड्डा होता है जिसे समुद्र में कृत्रिम रूप से तैयार की गई भूमि या रिक्लेमेशन के जरिए विकसित किया जाता है। इसका उद्देश्य उन शहरों में विमानन सुविधाओं का विस्तार करना है जहां जमीन की उपलब्धता सीमित हो।

    दुनिया के कई देशों जैसे जापान, हांगकांग और दक्षिण कोरिया में इस मॉडल को सफलतापूर्वक अपनाया जा चुका है। अब भारत भी इसी दिशा में कदम बढ़ा रहा है।

    महाराष्ट्र की अर्थव्यवस्था को मिलेगा बड़ा फायदा

    यह परियोजना केवल एक नया एयरपोर्ट बनाने तक सीमित नहीं है। इसे वधावन पोर्ट, हाई-स्पीड रेल, नई सड़क परियोजनाओं और अन्य मेगा इंफ्रास्ट्रक्चर योजनाओं के साथ विकसित किया जाएगा।

    विशेषज्ञों का मानना है कि इससे मुंबई महानगर क्षेत्र (MMR) के उत्तर हिस्से में एक नया आर्थिक कॉरिडोर विकसित होगा, जिससे पालघर और आसपास के इलाकों में निवेश, उद्योग, रोजगार और रियल एस्टेट को बड़ा बढ़ावा मिलेगा।

    हर साल संभालेगा 9 करोड़ यात्री

    प्रस्तावित एयरपोर्ट को भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए डिजाइन किया जा रहा है। अनुमान है कि यह हर वर्ष लगभग 90 मिलियन यात्रियों की आवाजाही संभाल सकेगा।

    इस परियोजना के साथ-साथ वधावन पोर्ट और अन्य परिवहन नेटवर्क विकसित होने से मुंबई पर बढ़ता दबाव भी कम होगा।

    निवेशकों के लिए नया अवसर

    रियल एस्टेट विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट की घोषणा और उसके निर्माण के बीच का समय निवेश के लिहाज से सबसे अहम होता है।

    नावानी ग्रुप के निदेशक श्रवण नावानी का कहना है कि पालघर क्षेत्र में अब विकास की संभावनाएं और मजबूत हो गई हैं। उनके मुताबिक तीन बड़ी सरकारी एजेंसियां—CIDCO, MMRDA और महाराष्ट्र सरकार—एक ही क्षेत्र में बड़े पैमाने पर विकास योजनाओं पर काम कर रही हैं।

    उनका कहना है कि यह संयोग नहीं बल्कि इस क्षेत्र की भविष्य की आर्थिक क्षमता का संकेत है।

    वधावन पोर्ट से बनेंगे लाखों रोजगार

    वधावन पोर्ट परियोजना को भारत के सबसे बड़े बंदरगाहों में से एक माना जा रहा है। अनुमान है कि इसके जरिए करीब 10 लाख रोजगार पैदा होंगे।

    इतने बड़े रोजगार सृजन के साथ क्षेत्र में आवास, व्यावसायिक परिसरों, होटल, रिटेल और अन्य शहरी सुविधाओं की मांग भी तेजी से बढ़ेगी। विशेषज्ञों के अनुसार वसई-विरार और पालघर इस मांग को पूरा करने के लिए सबसे उपयुक्त क्षेत्र बन सकते हैं।

    पहले भी एयरपोर्ट परियोजनाओं ने बदली तस्वीर

    मुंबई में नवी मुंबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट इसका बड़ा उदाहरण माना जाता है। एयरपोर्ट के संचालन से पहले ही उलवे, पनवेल और खारघर जैसे इलाकों में जमीन और संपत्तियों की कीमतों में उल्लेखनीय वृद्धि देखने को मिली थी।

    विशेषज्ञों का मानना है कि पालघर में प्रस्तावित ऑफशोर एयरपोर्ट भी भविष्य में इसी तरह आर्थिक गतिविधियों और निवेश को नई दिशा दे सकता है।

    नए विकास कॉरिडोर की तैयारी

    इस परियोजना की सबसे बड़ी खासियत इसका स्थान माना जा रहा है। पहले वधावन पोर्ट से जुड़े एयरपोर्ट की चर्चा दहानू क्षेत्र के आसपास होती थी, लेकिन अब इसका प्रस्ताव कोरे बीच के पास रखा गया है, जो विरार के काफी करीब है।

    यदि इसे प्रस्तावित उत्तन-विरार सी लिंक, मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन और अन्य परिवहन परियोजनाओं से जोड़ा जाता है, तो मुंबई महानगर क्षेत्र के उत्तर हिस्से में एक नया औद्योगिक और शहरी विकास कॉरिडोर तैयार हो सकता है।

    हालांकि फिलहाल यह परियोजना डीपीआर चरण में है और कई प्रशासनिक व पर्यावरणीय मंजूरियां अभी बाकी हैं, लेकिन इसकी घोषणा ने महाराष्ट्र के बुनियादी ढांचा विकास और निवेश संभावनाओं को लेकर नई उम्मीदें जगा दी हैं।

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