श्रीलंका की राजधानी कोलंबो में भारत और पाकिस्तान के पूर्व सैन्य अधिकारियों, राजनयिकों और राजनीतिक हस्तियों के बीच एक अनौपचारिक Track-II संवाद आयोजित किया गया। हालांकि भारत सरकार ने इस बैठक को लेकर साफ कर दिया है कि इसे किसी भी तरह की आधिकारिक वार्ता नहीं माना जाना चाहिए और ऐसे आयोजनों का सरकार के लिए कोई विशेष महत्व नहीं है।
यह बैठक इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट फॉर स्ट्रैटेजिक स्टडीज (IISS) के क्षेत्रीय सुरक्षा सम्मेलन के दौरान आयोजित की गई, जिसमें भारत, पाकिस्तान, श्रीलंका, मालदीव, ब्रिटेन सहित कई देशों के प्रतिनिधि शामिल हुए।
क्या होता है Track-II संवाद?
Track-II Diplomacy ऐसी अनौपचारिक कूटनीतिक प्रक्रिया होती है, जिसमें सरकार के मौजूदा प्रतिनिधियों के बजाय पूर्व अधिकारी, शिक्षाविद, रक्षा विशेषज्ञ और सिविल सोसायटी के सदस्य भाग लेते हैं।
इसका उद्देश्य बिना आधिकारिक राजनीतिक दबाव के विभिन्न मुद्दों पर विचार-विमर्श करना और संभावित समाधान तलाशना होता है।
भारत और पाकिस्तान से कौन-कौन शामिल हुआ?
सूत्रों के अनुसार, भारत की ओर से बैठक में शामिल हुए—
- पूर्व सेना प्रमुख जनरल एम.एम. नरवणे
- इंडिया फाउंडेशन के अध्यक्ष राम माधव
- पूर्व राजनयिक रुचि घनश्याम
वहीं पाकिस्तान की ओर से प्रतिनिधिमंडल में शामिल थे—
- विदेश मंत्रालय के डायरेक्टर जनरल (दक्षिण एशिया एवं सार्क) सज्जाद हैदर खान
- अमेरिका में पाकिस्तान की पूर्व राजदूत शैरी रहमान
- सेवानिवृत्त मेजर जनरल इस्फंदियार अली खान पटौदी
बैठक कोलंबो के एक होटल में लगभग दो दिनों तक अलग-अलग सत्रों में चली।
किन मुद्दों पर हुई चर्चा?
सूत्रों के मुताबिक बैठक में कई संवेदनशील विषयों पर बातचीत हुई, जिनमें शामिल थे—
- सीमा पार आतंकवाद
- जल बंटवारा
- तनाव के दौरान सैन्य संचार बेहतर बनाने के उपाय
- भविष्य में सैन्य टकराव की आशंका कम करने के विकल्प
हालांकि इन चर्चाओं से कोई ठोस या औपचारिक सहमति सामने नहीं आई।
ऑपरेशन सिंदूर के बाद पहली बड़ी पहल
यह संवाद भारत और पाकिस्तान के बीच मई 2025 में हुए सैन्य तनाव के बाद आयोजित अनौपचारिक बैठकों की श्रृंखला का हिस्सा माना जा रहा है।
भारत ने पहलगाम आतंकी हमले के बाद ऑपरेशन सिंदूर चलाकर पाकिस्तान स्थित आतंकी ठिकानों को निशाना बनाया था। इसके बाद दोनों देशों के बीच आधिकारिक संबंध लगभग पूरी तरह ठप हैं।
भारत सरकार ने क्या कहा?
सरकारी सूत्रों ने दोहराया कि इस बैठक को किसी भी तरह की आधिकारिक बातचीत नहीं समझा जाना चाहिए।
उन्होंने स्पष्ट कहा कि भारत की नीति पहले जैसी ही है—
“आतंकवाद और बातचीत साथ-साथ नहीं चल सकते।”
सरकार ने यह भी कहा कि भारत की ओर से बैठक में कोई वर्तमान सरकारी अधिकारी शामिल नहीं था, इसलिए इसे Track-1.5 या आधिकारिक संवाद नहीं कहा जा सकता।
विदेश सचिव विक्रम मिस्री का बयान
विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने भी इस बैठक को लेकर सरकार का रुख स्पष्ट किया।
उन्होंने कहा कि दुनिया भर में इस तरह के निजी आयोजन नियमित रूप से होते रहते हैं और भारत सरकार इन्हें आधिकारिक महत्व नहीं देती।
उन्होंने कहा,
“ये निजी संस्थाओं द्वारा आयोजित कार्यक्रम हैं। इनमें भारत सरकार की कोई आधिकारिक भागीदारी, समर्थन या भूमिका नहीं है।”
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि ऐसे आयोजनों में शामिल पूर्व अधिकारी और सैन्य विशेषज्ञ केवल अपने व्यक्तिगत विचार रखते हैं, वे भारत सरकार का प्रतिनिधित्व नहीं करते।
मिस्री ने कहा कि सरकार ऐसे कार्यक्रमों को लेकर “कोई विशेष संज्ञान नहीं लेती” और इनके परिणामों को आधिकारिक नीति का हिस्सा नहीं माना जाता।
संवाद की वकालत भी हो चुकी है
हाल के सप्ताहों में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के वरिष्ठ नेता दत्तात्रेय होसबाले ने कहा था कि भारत को अपनी सुरक्षा से समझौता किए बिना संवाद के रास्ते खुले रखने चाहिए।
पूर्व सेना प्रमुख जनरल एम.एम. नरवणे भी पहले कई बार कह चुके हैं कि Track-II कूटनीति और लोगों के बीच संपर्क भविष्य में रिश्तों को बेहतर बनाने का माध्यम बन सकते हैं।
हालांकि केंद्र सरकार ने एक बार फिर स्पष्ट कर दिया है कि पाकिस्तान के साथ किसी भी आधिकारिक वार्ता का प्रश्न तब तक नहीं उठता, जब तक सीमा पार आतंकवाद पूरी तरह समाप्त नहीं होता।








