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  • 90% दिव्यांगता को मात देकर रेशमा केवट ने रचा इतिहास, 12वीं में 89.75% अंक लाकर रायपुर में हुईं सम्मानित

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    अवास कैवर्त | छत्तीसगढ़ | समाचार वाणी न्यूज़
    कहा जाता है कि यदि हौसले बुलंद हों तो कोई भी मुश्किल मंजिल की राह नहीं रोक सकती। इस कहावत को सच साबित किया है छत्तीसगढ़ की मेधावी छात्रा रेशमा केवट ने। लगभग 90 प्रतिशत दिव्यांगता जैसी गंभीर चुनौती के बावजूद उन्होंने छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मंडल की 12वीं बोर्ड परीक्षा 2026 में 89.75 प्रतिशत अंक प्राप्त कर न केवल अपने परिवार बल्कि पूरे केवट समाज का नाम रोशन किया है।

    उनकी इस प्रेरणादायी उपलब्धि के लिए रायपुर स्थित आरोहण वेलफेयर फाउंडेशन द्वारा आयोजित भव्य सम्मान समारोह में उन्हें सम्मानित किया गया।

    रायपुर में हुआ भव्य सम्मान

    सम्मान समारोह में फाउंडेशन के पदाधिकारियों, समाज के वरिष्ठजनों एवं गणमान्य नागरिकों की उपस्थिति में रेशमा केवट को सम्मान-पत्र, स्मृति-चिह्न और पुष्पगुच्छ भेंट कर सम्मानित किया गया।

    कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने रेशमा की उपलब्धि को संघर्ष, आत्मविश्वास और दृढ़ इच्छाशक्ति का उत्कृष्ट उदाहरण बताया।

    90 प्रतिशत दिव्यांगता के बावजूद नहीं छोड़ा हौसला

    रेशमा केवट भारतीय जनता युवा मोर्चा, जिला गौरेला-पेंड्रा-मरवाही के जिला उपाध्यक्ष एकलव्य केवट की भतीजी हैं।

    शारीरिक रूप से लगभग 90 प्रतिशत दिव्यांग होने के बावजूद उन्होंने कभी अपनी परिस्थितियों को अपनी पढ़ाई के आड़े नहीं आने दिया। कठिन मेहनत, अनुशासन और आत्मविश्वास के बल पर उन्होंने 12वीं बोर्ड परीक्षा में 89.75 प्रतिशत अंक हासिल कर एक नई मिसाल कायम की।

    पूरे समाज के लिए बनीं प्रेरणा

    कार्यक्रम को संबोधित करते हुए अतिथियों ने कहा कि रेशमा की सफलता केवल व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं है, बल्कि पूरे केवट समाज के लिए गर्व का विषय है।

    उन्होंने कहा कि रेशमा ने यह साबित कर दिया है कि यदि संकल्प मजबूत हो तो कोई भी शारीरिक चुनौती सफलता की राह में बाधा नहीं बन सकती।

    वक्ताओं ने युवाओं से रेशमा के संघर्ष और समर्पण से प्रेरणा लेने का आह्वान किया।

    उज्ज्वल भविष्य की दी शुभकामनाएं

    सम्मान समारोह में उपस्थित सभी अतिथियों ने रेशमा के उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए विश्वास जताया कि वह आगे भी शिक्षा और जीवन के हर क्षेत्र में नई उपलब्धियां हासिल करेंगी।

    आरोहण वेलफेयर फाउंडेशन ने उनके प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को सम्मानित करना समाज की जिम्मेदारी है, ताकि अन्य युवाओं को भी आगे बढ़ने की प्रेरणा मिल सके।

    संघर्ष और आत्मविश्वास की मिसाल

    रेशमा केवट की सफलता यह संदेश देती है कि दिव्यांगता कभी भी प्रतिभा, मेहनत और सपनों के बीच दीवार नहीं बन सकती। यदि लक्ष्य स्पष्ट हो और आत्मविश्वास मजबूत हो तो हर कठिनाई को सफलता में बदला जा सकता है।

    आज रेशमा केवल एक मेधावी छात्रा नहीं, बल्कि संघर्ष, साहस और आत्मविश्वास की ऐसी मिसाल बन चुकी हैं, जिनकी कहानी आने वाली पीढ़ियों को निरंतर प्रेरित करती रहेगी।

  • Awas Kaiwart

    Special Reporter in Samachar Vani News

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