महाराष्ट्र की राजनीति में तेजी से बदलते घटनाक्रम के बीच शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) को छोड़कर एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना में शामिल हुए विधान परिषद सदस्य सचिन अहिर को बड़ी जिम्मेदारी मिल गई है। शिंदे गुट में शामिल होने के महज एक दिन बाद सचिन अहिर महाराष्ट्र विधान परिषद के उपसभापति निर्विरोध निर्वाचित हो गए।
उनकी यह नियुक्ति राज्य की बदलती राजनीतिक परिस्थितियों और महायुति की मजबूत रणनीति का अहम संकेत मानी जा रही है।
निर्विरोध हुआ चुनाव
विधान परिषद के उपसभापति पद के लिए महायुति की ओर से शिवसेना (शिंदे गुट) के विधायक सचिन अहिर ने नामांकन दाखिल किया था। वहीं महाविकास आघाड़ी की ओर से शिवसेना (उद्धव गुट) के जगन्नाथ अभ्यंकर ने उम्मीदवार के रूप में नामांकन किया था।
हालांकि सदन में महायुति के स्पष्ट बहुमत को देखते हुए मुकाबला एकतरफा माना जा रहा था। इसी बीच भाजपा के वरिष्ठ नेता एवं मंत्री चंद्रकांत पाटिल ने महाविकास आघाड़ी से चुनाव सर्वसम्मति से कराने की अपील की।
इसके बाद शिवसेना (उद्धव गुट) के नेता अनिल परब ने सदन में घोषणा करते हुए कहा कि लोकतांत्रिक परंपराओं का सम्मान करते हुए उनकी ओर से उम्मीदवार जगन्नाथ अभ्यंकर का नामांकन वापस लिया जा रहा है।
इसके साथ ही सचिन अहिर महाराष्ट्र विधान परिषद के उपसभापति निर्विरोध निर्वाचित घोषित कर दिए गए।
मुख्यमंत्री फडणवीस ने दी बधाई
निर्वाचन के बाद मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने विधान भवन में सचिन अहिर को बधाई दी। महायुति के नेताओं ने इसे सरकार की एक बड़ी राजनीतिक सफलता बताया।
शिवसेना (शिंदे गुट) के नेताओं का कहना है कि सचिन अहिर के अनुभव का लाभ अब विधान परिषद के संचालन में भी मिलेगा।
शिंदे गुट में शामिल होते ही मिला बड़ा पद
सचिन अहिर ने हाल ही में उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना छोड़कर एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना का दामन थामा था। उनके इस राजनीतिक फैसले के तुरंत बाद उन्हें उपसभापति पद का उम्मीदवार बनाया गया और अब निर्विरोध निर्वाचन के बाद उन्हें सदन की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी भी मिल गई है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह घटनाक्रम केवल एक संवैधानिक नियुक्ति नहीं बल्कि शिंदे गुट द्वारा संगठनात्मक मजबूती और राजनीतिक संदेश देने की रणनीति का हिस्सा भी है।
कौन हैं सचिन अहिर?
सचिन अहिर महाराष्ट्र की राजनीति का जाना-पहचाना चेहरा हैं। उन्होंने अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) से की थी और लंबे समय तक पार्टी के प्रमुख नेताओं में शामिल रहे। बाद में उन्होंने शिवसेना का दामन थामा और उद्धव ठाकरे के नेतृत्व में सक्रिय भूमिका निभाई।
हाल के राजनीतिक घटनाक्रम में उन्होंने उद्धव गुट छोड़कर एकनाथ शिंदे की शिवसेना में प्रवेश किया। अब उपसभापति पद पर उनकी नियुक्ति के साथ उन्हें विधान परिषद में एक महत्वपूर्ण संवैधानिक जिम्मेदारी भी मिल गई है।
राजनीतिक मायने
सचिन अहिर का शिंदे गुट में जाना और उसके तुरंत बाद उपसभापति पद मिलना महाराष्ट्र की राजनीति में महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा रहा है।
एक ओर इससे विधान परिषद में शिंदे गुट की स्थिति और मजबूत हुई है, वहीं दूसरी ओर उद्धव ठाकरे गुट को एक अनुभवी नेता के पार्टी छोड़ने का राजनीतिक नुकसान भी झेलना पड़ा है।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि आने वाले समय में महाराष्ट्र की राजनीति में इस बदलाव के दूरगामी प्रभाव देखने को मिल सकते हैं।








