ईरान के पूर्व सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के निधन के लगभग चार महीने बाद उनके अंतिम संस्कार की तैयारियां अंतिम चरण में पहुंच गई हैं। ईरानी सरकार इसे देश के इतिहास के सबसे बड़े राजकीय अंतिम संस्कारों में से एक बता रही है। समारोह ईरान के कई प्रमुख शहरों के साथ-साथ इराक के धार्मिक स्थलों पर भी आयोजित किए जाएंगे, जिनमें लाखों लोगों के शामिल होने की संभावना जताई जा रही है।
सरकारी अधिकारियों के अनुसार, अंतिम संस्कार केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं बल्कि राष्ट्रीय एकता और राजनीतिक संदेश का भी प्रतीक होगा।
अंतिम संस्कार में चार महीने की देरी क्यों हुई?
इस्लामी परंपराओं के अनुसार किसी व्यक्ति का अंतिम संस्कार सामान्यतः मृत्यु के तुरंत बाद कर दिया जाता है। ऐसे में चार महीने की देरी ने कई सवाल खड़े किए और सोशल मीडिया पर विभिन्न तरह की अटकलें भी सामने आईं।
हालांकि ईरानी अधिकारियों ने इन अटकलों को खारिज करते हुए कहा कि देरी का मुख्य कारण अमेरिका और इज़राइल के साथ जारी युद्ध जैसी असाधारण परिस्थितियां थीं। अधिकारियों के अनुसार उस समय सुरक्षा स्थिति अत्यंत संवेदनशील थी और बड़े सार्वजनिक समारोह आयोजित करना संभव नहीं था।
सरकार का कहना है कि युद्ध के दौरान सर्वोच्च सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने और राष्ट्रीय परिस्थितियों को देखते हुए अंतिम संस्कार स्थगित किया गया।
इस दौरान शव कहां रखा गया?
सोशल मीडिया और कुछ अंतरराष्ट्रीय रिपोर्टों में यह दावा किया गया कि खामेनेई के शव को अस्थायी रूप से दफना दिया गया था। हालांकि ईरान सरकार ने ऐसे दावों का खंडन किया है।
अधिकारियों के अनुसार, शव को पूरे समय धार्मिक और कानूनी मानकों के अनुरूप सुरक्षित रखा गया। इस्लाम में रासायनिक एम्बामिंग (शव संरक्षण के लिए रसायनों का प्रयोग) को सामान्यतः स्वीकार नहीं किया जाता। इसलिए विशेषज्ञों का मानना है कि शव को अत्यधिक नियंत्रित तापमान वाले कोल्ड स्टोरेज में संरक्षित रखा गया, ताकि धार्मिक नियमों का पालन भी हो और सुरक्षा भी सुनिश्चित रहे।
तेहरान से मशहद तक निकलेगी अंतिम यात्रा
ईरानी मीडिया के अनुसार खामेनेई के पार्थिव शरीर को सबसे पहले तेहरान के ग्रैंड मोसल्ला में सार्वजनिक श्रद्धांजलि के लिए रखा गया है, जहां हजारों लोग उन्हें अंतिम श्रद्धांजलि अर्पित कर रहे हैं।
इसके बाद अंतिम यात्रा ईरान के प्रमुख धार्मिक शहरों और इराक के पवित्र स्थलों से होकर गुजरेगी। अंततः 9 जुलाई को उनके जन्मस्थान मशहद स्थित इमाम रज़ा दरगाह परिसर में उन्हें सुपुर्द-ए-खाक किया जाएगा।
लाखों लोगों के जुटने की तैयारी
ईरानी सरकार का दावा है कि अंतिम संस्कार में देश-विदेश से करोड़ों लोगों के शामिल होने की संभावना है। प्रशासन ने बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के लिए परिवहन, आवास और भोजन जैसी व्यापक व्यवस्थाएं की हैं।
कई देशों के सरकारी प्रतिनिधियों और विदेशी गणमान्य व्यक्तियों के भी समारोह में शामिल होने की जानकारी दी गई है। सरकार इसे राष्ट्रीय एकजुटता और इस्लामी गणराज्य के प्रति समर्थन के प्रदर्शन के रूप में प्रस्तुत कर रही है।
सरकार के लिए राजनीतिक महत्व भी
विश्लेषकों का मानना है कि यह अंतिम संस्कार केवल धार्मिक आयोजन नहीं बल्कि ईरान की मौजूदा राजनीतिक स्थिति में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
सरकार इसे जनता के समर्थन और राष्ट्रीय एकता के प्रदर्शन के रूप में देख रही है। वहीं कुछ विशेषज्ञों का कहना है कि हाल के वर्षों में आर्थिक संकट, अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों और आंतरिक विरोध प्रदर्शनों के कारण सरकार को जनसमर्थन बनाए रखने की चुनौती का सामना करना पड़ा है। ऐसे में यह आयोजन राजनीतिक रूप से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
सुरक्षा के कड़े इंतजाम
समारोह को देखते हुए ईरान में अभूतपूर्व सुरक्षा व्यवस्था लागू की गई है। राजधानी तेहरान सहित कई शहरों में अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात किए गए हैं। प्रमुख धार्मिक स्थलों और सार्वजनिक कार्यक्रमों पर विशेष निगरानी रखी जा रही है ताकि समारोह शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हो सके।
अयातुल्ला अली खामेनेई के अंतिम संस्कार में हुई चार महीने की देरी असाधारण परिस्थितियों का परिणाम बताई जा रही है। ईरानी सरकार का कहना है कि युद्ध और सुरक्षा कारणों के चलते यह निर्णय लिया गया, जबकि शव को पूरे समय धार्मिक परंपराओं के अनुरूप सुरक्षित रखा गया। अब यह आयोजन केवल एक अंतिम विदाई नहीं बल्कि ईरान के लिए धार्मिक, राजनीतिक और प्रतीकात्मक महत्व रखने वाला ऐतिहासिक कार्यक्रम माना जा रहा है।







