देश में E20 पेट्रोल (20 प्रतिशत एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल) को लेकर सोशल मीडिया पर तेजी से फैल रही भ्रामक जानकारियों के बीच केंद्र सरकार ने स्थिति स्पष्ट करते हुए 10 प्रमुख दावों का तथ्यात्मक जवाब दिया है। पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने कहा है कि E20 कार्यक्रम पूरी तरह वैज्ञानिक शोध, अंतरराष्ट्रीय अनुभव और नियामकीय मानकों पर आधारित है तथा इससे जुड़ी कई अफवाहों का कोई तथ्यात्मक आधार नहीं है।
सरकार ने स्पष्ट किया कि E20 पेट्रोल को लेकर इंजन खराब होने, माइलेज में भारी गिरावट, अत्यधिक पानी की खपत, वाहन की वारंटी खत्म होने और पर्यावरण को नुकसान पहुंचने जैसे दावे भ्रामक हैं। मंत्रालय के अनुसार, भारत ने दिसंबर 2025 में निर्धारित समय से पहले पेट्रोल में 20 प्रतिशत एथेनॉल मिश्रण का लक्ष्य हासिल कर लिया था।
मिथक 1: एक लीटर एथेनॉल बनाने में 10,000 लीटर पानी खर्च होता है
सरकार ने इस दावे को पूरी तरह गलत बताया। मंत्रालय के अनुसार, एथेनॉल उत्पादन में प्रति लीटर केवल लगभग 3 से 5 लीटर प्रोसेस्ड पानी का उपयोग होता है। अधिकांश आधुनिक डिस्टिलरी Zero Liquid Discharge (ZLD) तकनीक अपनाकर पानी का पुनः उपयोग करती हैं। साथ ही एथेनॉल उत्पादन के लिए केवल अतिरिक्त उपलब्ध अनाज का उपयोग किया जाता है, जिससे खाद्य सुरक्षा प्रभावित नहीं होती।
मिथक 2: E20 से इंजन खराब हो जाता है
सरकार के अनुसार, ऑटोमोटिव रिसर्च एसोसिएशन ऑफ इंडिया (ARAI), इंडियन ऑयल, इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ पेट्रोलियम और SIAM द्वारा किए गए परीक्षणों में E20 ईंधन से इंजन या धातु एवं प्लास्टिक के पुर्जों को कोई महत्वपूर्ण नुकसान नहीं पाया गया। केवल बहुत पुराने वाहनों में कुछ रबर पार्ट्स अपेक्षाकृत जल्दी बदलने की आवश्यकता हो सकती है।
मिथक 3: E20 से माइलेज काफी कम हो जाता है
मंत्रालय ने कहा कि लगभग 40,000 किलोमीटर तक कारों और 20,000 किलोमीटर तक दोपहिया वाहनों पर किए गए परीक्षणों में केवल मामूली बदलाव देखा गया। वाहन की ड्राइविंग क्षमता पर कोई गंभीर असर नहीं पाया गया। E20 के लिए डिजाइन किए गए इंजन बेहतर ऑक्टेन रेटिंग का भी लाभ उठा सकते हैं।
मिथक 4: E20 एक प्रयोगात्मक ईंधन है
सरकार ने कहा कि E20 कोई नया प्रयोग नहीं है। अमेरिका, ब्राजील, कनाडा, जापान, थाईलैंड और कई यूरोपीय देशों में वर्षों से एथेनॉल मिश्रित ईंधन का सफलतापूर्वक उपयोग किया जा रहा है।
मिथक 5: E20 इस्तेमाल करने से वाहन की वारंटी और बीमा समाप्त हो जाएगा
मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि जिन वाहनों को E20 के अनुरूप डिजाइन या स्वीकृत किया गया है, उनकी वारंटी और बीमा पूरी तरह वैध रहेगा। वाहन निर्माता और बीमा कंपनियों ने भी इस संबंध में स्पष्ट जानकारी दी है।
मिथक 6: E20 में चीनी होने से चींटियां और मधुमक्खियां आकर्षित होती हैं
सोशल मीडिया पर वायरल इस दावे को भी सरकार ने निराधार बताया। मंत्रालय ने कहा कि फ्यूल ग्रेड एथेनॉल में डिस्टिलेशन प्रक्रिया के दौरान सभी शर्करा तत्व समाप्त हो जाते हैं। इसमें डिनैचुरेंट मिलाए जाते हैं, जो कीड़ों को दूर रखते हैं।
मिथक 7: E20 के कारण पेट्रोल टैंक में पानी चला जाता है
सरकार ने कहा कि आधुनिक वाहनों और पेट्रोल पंपों में ऐसी सुरक्षा व्यवस्था होती है, जिससे ईंधन में पानी प्रवेश नहीं कर सकता। इसलिए यह दावा भी भ्रामक है।
मिथक 8: गन्ने का रस सीधे पेट्रोल में मिलाया जाता है
मंत्रालय ने वायरल वीडियो को फर्जी बताते हुए कहा कि एथेनॉल औद्योगिक प्रक्रिया के माध्यम से तैयार किया जाता है और निर्धारित गुणवत्ता मानकों के अनुसार ही पेट्रोल में मिलाया जाता है।
मिथक 9: सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में E20 को ‘प्रयोग’ बताया था
केंद्र सरकार ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट में मामला एथेनॉल खरीद से जुड़े अनुबंधों का था, न कि E20 कार्यक्रम की गुणवत्ता या विश्वसनीयता का। इस संबंध में प्रकाशित कुछ मीडिया रिपोर्टों को भी गलत बताया गया है।
मिथक 10: E20 पर्यावरण के लिए नुकसानदायक है
सरकार का कहना है कि सभी एथेनॉल संयंत्रों को पर्यावरणीय मंजूरी, भूजल नियमों और Zero Liquid Discharge जैसी व्यवस्थाओं का पालन करना अनिवार्य है। मंत्रालय के अनुसार, एथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम से अब तक 1.9 लाख करोड़ रुपये से अधिक विदेशी मुद्रा की बचत, 1.6 लाख करोड़ रुपये से अधिक का भुगतान किसानों को, 930 लाख मीट्रिक टन कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन में कमी तथा 310 लाख मीट्रिक टन से अधिक कच्चे तेल के आयात में कमी दर्ज की गई है।
देश को क्या मिला फायदा?
सरकार के अनुसार, वर्ष 2013-14 में पेट्रोल में एथेनॉल मिश्रण केवल लगभग 1.5 प्रतिशत था, जो बढ़कर दिसंबर 2025 में 20 प्रतिशत तक पहुंच गया। वर्तमान में देश की एथेनॉल उत्पादन क्षमता लगभग 2,000 करोड़ लीटर है, जबकि 2025-26 आपूर्ति वर्ष में 1,200 करोड़ लीटर से अधिक एथेनॉल की खरीद का अनुमान है।
केंद्र सरकार का कहना है कि E20 कार्यक्रम न केवल भारत की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करेगा, बल्कि किसानों की आय बढ़ाने, पेट्रोलियम आयात पर निर्भरता कम करने और पर्यावरण संरक्षण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।








