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  • कच्चे तेल में उबाल से शेयर बाजार में हाहाकार, सेंसेक्स 600 अंक से ज्यादा टूटा; निवेशकों के ₹2.79 लाख करोड़ डूबे

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    अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव तथा अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल का असर बुधवार को भारतीय शेयर बाजार पर साफ दिखाई दिया। कारोबार शुरू होने के कुछ ही मिनटों में सेंसेक्स 600 अंकों से अधिक टूट गया, जबकि निफ्टी भी भारी गिरावट के साथ कारोबार करता नजर आया। इस बिकवाली के चलते निवेशकों की संपत्ति में करीब ₹2.79 लाख करोड़ की कमी दर्ज की गई।

    बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) का प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स शुरुआती कारोबार में 625 अंकों तक लुढ़ककर 77,555 के स्तर तक पहुंच गया। वहीं, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) का निफ्टी भी 180 अंकों से अधिक गिरकर 24,207 के आसपास कारोबार करता दिखा। बाजार में लगातार दूसरे दिन कमजोरी देखने को मिली।

    बाजार में सबसे अधिक दबाव सीमेंट, ऑटो, बैंकिंग, मेटल और ऑयल एंड गैस सेक्टर के शेयरों पर देखने को मिला। अल्ट्राटेक सीमेंट, एशियन पेंट्स, इंडिगो, मारुति सुजुकी, बजाज फाइनेंस, आईटीसी, कोटक महिंद्रा बैंक, एसबीआई, टाटा स्टील, भारत इलेक्ट्रॉनिक्स (BEL) और रिलायंस इंडस्ट्रीज के शेयरों में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई। हालांकि इंफोसिस, टीसीएस और सन फार्मा जैसे कुछ चुनिंदा शेयरों में मामूली बढ़त देखने को मिली।

    बाजार में अस्थिरता का संकेत देने वाला इंडिया VIX भी 5 प्रतिशत से अधिक बढ़कर 12.25 के स्तर पर पहुंच गया, जिससे निवेशकों की चिंता और बढ़ गई। व्यापक बाजार में भी बिकवाली का दबाव रहा, जहां गिरने वाले शेयरों की संख्या बढ़ने वाले शेयरों की तुलना में काफी अधिक रही।

    विशेषज्ञों के अनुसार, बाजार में गिरावट की सबसे बड़ी वजह अमेरिका और ईरान के बीच दोबारा बढ़ा भू-राजनीतिक तनाव है। दोनों देशों के बीच हालिया सैन्य घटनाक्रम के बाद वैश्विक निवेशकों में अनिश्चितता बढ़ी है, जिसका सीधा असर वित्तीय बाजारों पर पड़ा है।

    तनाव बढ़ने के साथ ही अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड की कीमत 76 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई। कच्चे तेल की कीमतों में तेजी से भारत जैसे आयात-निर्भर देशों की अर्थव्यवस्था पर अतिरिक्त दबाव पड़ने की आशंका बढ़ गई है। इससे महंगाई और व्यापार घाटे को लेकर भी निवेशकों की चिंता बढ़ी है।

    इसके अलावा भारतीय रुपया भी अमेरिकी डॉलर के मुकाबले कमजोर हुआ। रुपया लगभग 20 पैसे गिरकर 95.17 प्रति डॉलर के स्तर पर खुला। कमजोर रुपया और महंगे कच्चे तेल का संयुक्त असर निवेशकों की धारणा पर नकारात्मक रहा।

    बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक पश्चिम एशिया में तनाव कम नहीं होता और कच्चे तेल की कीमतों में स्थिरता नहीं आती, तब तक भारतीय शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है। निवेशकों को फिलहाल सतर्कता के साथ निवेश करने और वैश्विक घटनाक्रम पर लगातार नजर बनाए रखने की सलाह दी जा रही है।

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